दान विवाद के बाद कैसे चल रहा राम मंदिर ट्रस्ट का 'रीसेट प्लान'?
दान प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे विवादों के बाद राम मंदिर ट्रस्ट अपने ढांचे में बड़े बदलाव करने जा रहा है. सचिव, CEO और पेशेवर प्रबंधन के जरिए मंदिर संचालन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने की है तैयारी

राम मंदिर ट्रस्ट ने सचिव पद के लिए जगदीश आफले के नाम को मंजूरी दी
अयोध्या के राम मंदिर में दान प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अब अपने कामकाज को संस्थागत और पेशेवर स्वरूप देने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है.
इसी क्रम में ट्रस्ट ने पहली बार सचिव का पद सृजित करने, बैंकिंग व्यवस्था में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं का नया ढांचा बनाने, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने तथा विभिन्न प्रशासनिक पदों के गठन का फैसला किया है; इन सभी प्रस्तावों पर अंतिम मुहर 2 सितंबर को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में लगने की संभावना है.
राम मंदिर ट्रस्ट की स्थापना के बाद से अब तक महासचिव ही प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों का संचालन करते रहे हैं. लेकिन मंदिर के विस्तार, बढ़ते कार्यभार और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए ट्रस्ट ने पहली बार सचिव का अलग पद बनाने का निर्णय लिया है.
इस पद के लिए सबसे प्रमुख नाम मंदिर निर्माण परियोजना के प्रभारी इंजीनियर जगदीश आफले का है. जानकारी के मुताबिक ट्रस्टी बोर्ड ने आफले को सचिव बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. औपचारिक नियुक्ति 2 सितंबर की बैठक के बाद प्रभावी होगी. आफले पिछले तीन से चार वर्षों से राम मंदिर निर्माण परियोजना की निगरानी कर रहे हैं.
पिछले कुछ सप्ताह से वे मंदिर निर्माण के साथ-साथ आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सक्रिय रूप से नजर रख रहे हैं. ट्रस्ट का मानना है कि निर्माण परियोजना से जुड़े होने के कारण उन्हें मंदिर की संरचना, तकनीकी आवश्यकताओं और प्रशासनिक चुनौतियों की गहरी समझ है.
जानकारी के मुताबिक सचिव के रूप में आफले रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज का संचालन करेंगे और अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन को रिपोर्ट करेंगे. हालांकि वे ट्रस्ट के सदस्य नहीं होंगे बल्कि एक पेशेवर पदाधिकारी के रूप में कार्य करेंगे. ट्रस्ट भविष्य में नियुक्त होने वाले CEO के लिए भी इसी मॉडल पर काम कर रहा है जिसमें पदाधिकारी प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालेंगे लेकिन ट्रस्टी नहीं होंगे.
संयुक्त हस्ताक्षर प्रणाली लागू
प्रशासनिक सुधारों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था में बदलाव है. ट्रस्ट डीड के अनुसार बैंक खातों का संचालन दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं के माध्यम से होना आवश्यक है.
पहले यह व्यवस्था महासचिव और अन्य पदाधिकारियों के माध्यम से संचालित होती थी लेकिन हालिया बदलावों और पूर्व महासचिव चंपत राय तथा ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद नई व्यवस्था बनानी जरूरी हो गई.
इसी कारण ट्रस्ट ने जगदीश आफले को संयुक्त हस्ताक्षरकर्ता (को-सिग्नेटरी) के रूप में अधिकृत किया है. इसके साथ ही चार्टर्ड अकाउंटेंट चंदन राय को भी अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की सूची में शामिल किया गया है.
वर्तमान व्यवस्था के तहत अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन, जगदीश आफले और चंदन राय तीन अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता होंगे, जिनमें से किसी भी दो के हस्ताक्षर से बैंकिंग लेनदेन संपन्न होगा. यही व्यवस्था ट्रस्ट के कर्मचारियों के वेतन, निर्माण एजेंसियों के भुगतान, ठेकेदारों के बिल, सेवा प्रदाताओं के भुगतान तथा अन्य वित्तीय दायित्वों के निर्वहन में लागू होगी.
जानकारी के मुताबिक, भारतीय स्टेट बैंक सहित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने प्रारंभ में ट्रस्ट के संविधान और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को लेकर कुछ औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं. इसके बाद ट्रस्ट ने आवश्यक दस्तावेज और प्रस्ताव दोबारा प्रस्तुत किए.
औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद बैंक ने कृष्ण मोहन और जगदीश आफले के संयुक्त हस्ताक्षरों को स्वीकार कर लिया. इससे ट्रस्ट की नियमित बैंकिंग गतिविधियों का रास्ता साफ हो गया है.
ट्रस्ट की नई प्रशासनिक संरचना
राम मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि विशाल संस्थागत व्यवस्था का रूप ले चुका है. प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं का आगमन, करोड़ों रुपये का चढ़ावा, सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, रखरखाव और भविष्य की परियोजनाओं को देखते हुए ट्रस्ट अब पारंपरिक धार्मिक प्रबंधन से आगे बढ़कर कॉरपोरेट शैली की प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना चाहता है.
इसी उद्देश्य से ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की है. इस पद के लिए लगभग 5,200 आवेदन प्राप्त हुए हैं. उम्मीदवारों की जांच और शॉर्टलिस्टिंग का काम सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली समिति कर रही है. चूंकि CEO चयन प्रक्रिया में समय लगने की संभावना है इसलिए अंतरिम व्यवस्था के रूप में सचिव पद बनाया गया है ताकि रोजमर्रा के प्रशासनिक निर्णय प्रभावित न हों.
इसके अलावा ट्रस्ट विभिन्न विभागों के लिए पेशेवर मैनेजर, प्रशासनिक अधिकारी और विशेषज्ञ नियुक्त करने की भी तैयारी कर रहा है. जानकारी के मुताबिक भविष्य में वित्त, दर्शन प्रबंधन, सुरक्षा, मानव संसाधन, परियोजना प्रबंधन और जनसंपर्क जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग पेशेवर अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी.
इसी क्रम में ट्रस्ट आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त करने पर भी विचार कर रहा है ताकि मीडिया और सार्वजनिक सूचनाओं का एकीकृत प्रबंधन हो सके. अब तक इस जिम्मेदारी का निर्वहन विभिन्न ट्रस्टी और पदाधिकारी परिस्थितियों के अनुसार करते रहे हैं.
कौन हैं जगदीश आफले?
जगदीश आफले महाराष्ट्र के पुणे के निवासी हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े माने जाते हैं. उन्होंने IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक की पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने यूरोप और अमेरिका की कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों में लंबे समय तक कार्य किया.
सेवानिवृत्ति के बाद वे भारत लौटे और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण परियोजना से मानद परियोजना प्रबंधक के रूप में जुड़ गए. मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद से वे लगातार अयोध्या में रहकर निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे हैं. इंजीनियरिंग विशेषज्ञता, परियोजना प्रबंधन का अंतरराष्ट्रीय अनुभव और पिछले कई वर्षों से मंदिर निर्माण में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए ट्रस्ट के भीतर उन्हें सबसे उपयुक्त प्रशासनिक चेहरा माना जा रहा है.
हालांकि, सचिव पद के लिए संघ से जुड़े एक अन्य नाम सुदर्शन की भी चर्चा रही लेकिन ट्रस्ट से जुड़े जानकारों का कहना है कि निर्माण परियोजना और संस्थागत व्यवस्था की गहरी समझ के कारण आफले की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है. संपर्क किए जाने पर आफले ने फिलहाल कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है और कहा है कि औपचारिक निर्णय के बाद ही वे मीडिया से बात करेंगे.
2 सितंबर को अहम बैठक
राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर हो रहे ये बदलाव केवल पदों के पुनर्वितरण तक सीमित नहीं हैं. हाल के महीनों में चढ़ावे की सुरक्षा, वित्तीय निगरानी, दर्शन व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर उठे सवालों के बाद ट्रस्ट अपने संचालन तंत्र को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में काम कर रहा है.
इसी कड़ी में दर्शन पास प्रणाली की समीक्षा भी की जा रही है. ट्रस्ट ने स्वीकार किया है कि पास जारी करने की व्यवस्था में आई गड़बड़ियों से श्रद्धालुओं को असुविधा हुई थी. इसके बाद तीर्थ यात्री सेवा केंद्र में पास प्रणाली के प्रभारी सोमेश आनंद को उनके दायित्व से हटाकर अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है.
फिलहाल मौजूदा कर्मचारी संयुक्त रूप से यह व्यवस्था संभाल रहे हैं और नई प्रणाली पर निर्णय 2 सितंबर की बैठक के बाद लिया जाएगा. ट्रस्ट की यही बैठक प्रशासनिक पुनर्गठन की दृष्टि से निर्णायक मानी जा रही है.
सचिव की औपचारिक नियुक्ति, CEO चयन प्रक्रिया की प्रगति, पेशेवर अधिकारियों की नियुक्ति, दर्शन व्यवस्था में सुधार, बैंकिंग ढांचे को अंतिम रूप तथा भविष्य के प्रशासनिक रोडमैप जैसे महत्वपूर्ण विषय इसी बैठक के एजेंडे में शामिल हैं.