राजस्थान के कवाई में विकास के उजाले से कैसे रोशन हो रहा जीवन?

इंपैक्ट फीचर : अदाणी के कवाई पावर प्लांट ने बारां गांव में रोजगार, डेयरी, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण आजीविका का नया इकोसिस्टम तैयार किया है

कवाई पावर प्लांट
कवाई पावर प्लांट

राजस्थान के बारां में 1320 मेगावाट का कवाई पावर प्लांट राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रहा है. लेकिन इसकी कहानी मेगावाट और मशीनों से कहीं आगे की है. प्लांट के आसपास रोजगार, डेयरी, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण आजीविका का एक नया इकोसिस्टम भी तैयार हो रहा है.

राजस्थान के बारां जिले की पहचान लंबे समय से खेती और पशुपालन पर आधारित अर्थव्यवस्था से रही है. यहां मौसम की अनिश्चितता ग्रामीण परिवारों की आमदनी को भी प्रभावित करती रही है लेकिन इसी ग्रामीण भूगोल के बीच कवाई में औद्योगीकरण और सामाजिक बदलाव की दो धाराएं अब एक साथ आगे बढ़ती दिखाई देती हैं.

साल 2013 में कमीशन हुआ अदाणी पावर का कवाई पावर प्लांट इस बदलाव का एक प्रमुख केंद्र है. 8,000 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश से स्थापित इस प्लांट की क्षमता 1320 मेगावाट है. मई 2026 तक राजस्थान की यूटिलिटी थर्मल क्षमता करीब 14,727 मेगावाट थी. इस लिहाज से अकेले कवाई की हिस्सेदारी लगभग 9% बैठती है.

कवाई की भौगोलिक स्थिति भी इसे महत्वपूर्ण बनाती है. यह कोटा, बारां, झालावाड़ और आसपास के औद्योगिक तथा लोड सेंटर्स के करीब है और राजस्थान ग्रिड में बिजली पहुंचाने के लिहाज से सही जगह पर है. रेलवे कनेक्टिविटी भारी सामान और कच्चे माल की आवाजाही को आसान बनाती है, जबकि परवन नदी प्लांट की पानी की जरूरत पूरी करने का महत्वपूर्ण स्रोत है.

लेकिन किसी बड़े उद्योग का प्रभाव उसकी चारदीवारी के भीतर ही सीमित नहीं रहता. कवाई में करीब 1,600 लोग, ऑफ-रोल इम्पलॉइ सहित, काम करते हैं और इनमें 85-90% राजस्थान से हैं. इसके साथ स्थानीय वेंडर्स और पार्टनर्स के जरिए परोक्ष रोजगार और कारोबार के अवसर भी बने हैं.

आसपास के क्षेत्र में फैब्रिकेशन, मेंटेनेंस और रिपेयर, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा और दूसरी सेवाओं में कुशल और अर्ध-कुशल लोगों का एक इकोसिस्टम विकसित हुआ है. इस औद्योगिक तस्वीर का दूसरा पहलू आसपास के गांवों में दिखाई देता है.

अदाणी फाउंडेशन ने हाडोती प्रगतिशील प्रोड्यूसर्स कंपनी लिमिटेड के जरिए किसानों को ट्रेनिंग दी

गांव में दूध बना अतिरिक्त आमदनी का जरिया

साल 2022 में अदाणी फाउंडेशन ने हाडोती प्रगतिशील प्रोड्यूसर्स कंपनी लिमिटेड के जरिए किसानों और ग्रामीण महिलाओं को संगठित करना शुरू किया. अप्रैल 2024 में साबर-अमूल डेयरी के सहयोग से बल्क मिल्क कूलर स्थापित होने के बाद गांवों का दूध बाजार तक पहुंचने लगा.

वित्त वर्ष 2025-26 में 17.48 लाख लीटर दूध का संचय हुआ और करीब 9.29 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया गया. आज इस पहल से एक हजार से अधिक परिवार जुड़े हैं और औसतन प्रत्येक परिवार को करीब 9,500 रुपये हर महीने की अतिरिक्त आय हो रही है.

डडवाडा गांव के 55 साल के किसान घनश्याम के लिए इसका मतलब आंकड़ों से कहीं ज्यादा है. पहले उनकी एक देसी गाय और दो भैंसों से होने वाली आमदनी चारे का खर्च निकालने के लिए भी काफी नहीं थी. कृत्रिम गर्भाधान और पशुपालन से जुड़ी तकनीकी सहायता मिलने के बाद उनके पास बेहतर नस्ल के पशु आए. अब परिवार की जरूरत के बाद दूध बेचकर वे करीब 7,000 रुपये हर महीने की अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं.

डेयरी और किसान उत्पादक संगठन जैसी पहलों से 1,200 से अधिक महिलाओं को भी फायदा मिला है. दूध संग्रह अब करीब 4,800 लीटर प्रतिदिन तक पहुंच चुका है. इसके साथ पशु नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य शिविर, चारा विकास और किसान प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां ग्रामीण आय के स्रोतों को मजबूत कर रही हैं.

रक्षिता का सपना भी इसी बदलाव का हिस्सा

कचरी गांव की 11 वर्षीय रक्षिता नागर इस बदलाव का एक दूसरा चेहरा है. सोडलहेड़ी के सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाली रक्षिता जवाहर नवोदय विद्यालय जाना चाहती थी लेकिन आसपास प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग उपलब्ध नहीं थी.

अदाणी फाउंडेशन की निःशुल्क कोचिंग से जुड़ने के बाद उसने रोज 5-6 घंटे तैयारी की. लगातार टेस्ट, शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग से आखिरकार उसका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय में हो गया. अब उसका सपना डॉक्टर बनने का है. वित्त वर्ष 2025-26 में ऐसी कोचिंग से 25 स्कूलों के 110 विद्यार्थियों को लाभ मिला. प्रोजेक्ट उड़ान के तहत 8,500 से अधिक विद्यार्थियों को एक्सपोजर विजिट कराई गईं. अमापुरा के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में नया क्लासरूम भी बनाया गया.

निःशुल्क कोचिंग से 11 साल की रक्षिता नागर का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय में हुआ

स्वास्थ्य के मोर्चे पर मोबाइल हेल्थकेयर यूनिट ने 28 गांवों में करीब 40,000 कंसल्टेशन उपलब्ध कराए, जबकि मल्टी-स्पेशलिटी और स्त्री रोग स्वास्थ्य शिविरों से करीब 3,500 लोगों को लाभ मिला. टीबी मुक्त अभियान के तहत 500 पोषण किट भी वितरित की गईं.

वित्त वर्ष 2025-26 में अदाणी फाउंडेशन ने कवाई क्षेत्र में सामुदायिक विकास, आजीविका, स्वास्थ्य, शिक्षा और क्लाइमेट एक्शन पर करीब 4 करोड़ रुपये खर्च किए. पर्यावरण के क्षेत्र में 14 जगहों पर 6,000 फॉरेस्ट्री प्लांट और 900 परिवारों को 5,000 फलदार पौधे दिए गए.

औद्योगिक गतिविधियों के बीच पर्यावरण प्रबंधन भी महत्वपूर्ण है. कवाई एक जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्लांट है, यानी प्लांट क्षेत्र से लिक्विड वेस्ट बाहर डिस्चार्ज नहीं किया जाता. सुपरक्रिटिकल टेक्नोलॉजी वाले इस प्लांट के एमीशन की चौबीसों घंटे निगरानी की जाती है और फ्लाई ऐश के प्रबंधन की भी व्यवस्था है.

ये सब देखते हुए कवाई की कहानी सिर्फ 1,320 मेगावाट बिजली पैदा करने वाले एक पावर प्लांट की कहानी नहीं रह जाती. एक तरफ बिजली राज्य की अर्थव्यवस्था और उद्योगों को ऊर्जा दे रही है तो दूसरी तरफ स्थानीय रोजगार, दूध से होने वाली अतिरिक्त कमाई, गांव तक पहुंचती स्वास्थ्य सेवाएं और रक्षिता जैसे बच्चों के सपने इस औद्योगिकीकरण को मानवीय चेहरा दे रहे हैं. यानी किसी बड़े औद्योगिक निवेश का वास्तविक असर लोगों की जिंदगी पर पर पड़ने वाले प्रभाव से भी मापा जाना चाहिए.

(इंपैक्ट फीचर)

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