नए जमाने की नौकरियों में किसे मिल सकता है बड़ा फायदा?
नए दौर के सेक्टरों में नौकरियां बढ़ रही हैं, लेकिन ज्यादा सैलरी उन लोगों को मिल रही है जो AI और दूसरी नई टेक्नोलॉजी की स्किल्स सीख रहे हैं

AI की वजह से अब जॉब प्रोफाइल में भी बदलाव हो रहे हैं (सांकेतिक फोटो)
नए दौर के सभी सेक्टरों में नौकरियां एक जैसी तेजी से नहीं बढ़ रही हैं. इलेक्ट्रिक वाहन (EV), रिन्यूएबल एनर्जी, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज एंड इंश्योरेंस (BFSI) और फिनटेक जैसे सेक्टर तेजी से बढ़ रहे हैं.
लेकिन इन सेक्टरों में भी नई टेक्नोलॉजी और नए वर्कफ्लो से जुड़े रोल सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं और इनमें सैलरी भी काफी ज्यादा मिल रही है.
खासतौर पर इंडिया टुडे के लिए की गई रिसर्च में रिक्रूटमेंट फर्म अडेको ने पाया कि नए दौर के सेक्टरों में नौकरियां तेजी से बढ़ रही हैं लेकिन इनके भीतर नई टेक्नोलॉजी से जुड़े रोल 15-30 फीसदी की दर से बढ़ रहे हैं. इन रोल में सैलरी 12-40 फीसदी तक ज्यादा मिल रही है. वहीं, पारंपरिक रोल में सैलरी बढ़ने की दर आमतौर पर 4-7 फीसदी है.
इनमें EV सेक्टर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेशलिस्ट, EV डिजाइन इंजीनियर और हाइड्रोजन सेफ्टी मैनेजर, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में रिन्यूएबल प्रोजेक्ट इंजीनियर और BFSI व फिनटेक में प्रोडक्ट मैनेजर, डेटा साइंटिस्ट, AI इंजीनियर और AML स्पेशलिस्ट जैसे रोल शामिल हैं.
टीम-लीज डिजिटल की CEO नीति शर्मा बताती हैं कि टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है और इसके साथ दो बड़े बदलाव हो रहे हैं. पहला, AI, साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नए तरह के जॉब रोल सामने आ रहे हैं. इनकी मांग काफी ज्यादा है. दूसरा, ये टेक्नोलॉजी नई हैं, इसलिए इन्हें समझने और इस्तेमाल करने वाली प्रतिभा की कीमत भी ज्यादा है.
टेक्नोलॉजी के कामकाज में शामिल होने से जॉब के रोल भी बदल रहे हैं. उदाहरण के लिए, BFSI में क्रेडिट रिस्क एनालिस्ट के लिए अब सिर्फ एनालिटिकल स्किल्स होना काफी नहीं है, बल्कि AI की समझ भी जरूरी होती जा रही है.
इसी तरह सेमीकंडक्टर सेक्टर में इंजीनियरों को AI और मैन्युफैक्चरिंग, दोनों के साथ काम करना पड़ रहा है. आने वाले समय में मैन्युफैक्चरिंग में फिजिकल AI का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर बढ़ने की उम्मीद है. ऐसे में रोबोटिक्स और AI की अतिरिक्त ट्रेनिंग लेने वाले इंजीनियरों को बढ़त मिलेगी.
अडेको इंडिया में परमानेंट रिक्रूटमेंट के एसोसिएट डायरेक्टर और सेल्स हेड पीयूष सप्रू बताते हैं कि नए और उभरते सेक्टरों, जैसे EV, में शुरुआती स्तर की प्रतिभा अक्सर मौजूदा सेक्टरों से ही आती है.
कंपनियों के लिए दूसरे देशों से एक्सपर्ट्स को नियुक्त करना काफी महंगा और कई बार व्यावहारिक नहीं होता. ऐसे में जो लोग उभरती टेक्नोलॉजी में सबसे पहले अपस्किल करते हैं और काम के दौरान नई चीजें सीखते हैं, वे ज्यादा सैलरी हासिल कर पाते हैं.
ये लोग उस क्षेत्र में आगे बढ़कर नेतृत्व की भूमिका में आते हैं और बाकी कर्मचारियों को नई स्किल्स सिखाते हैं. इसके बाद AI रिस्क एनालिस्ट, डिजाइन इंजीनियरिंग, एजेंटिक AI स्पेशलिस्ट जैसे नए उभरते रोल में भी इन्हीं लोगों को आगे बढ़ने का मौका मिलता है.
इसका असर अलग-अलग सेक्टरों में साफ दिखाई देता है. BFSI या मैन्युफैक्चरिंग में पारंपरिक रोल में 4-7 फीसदी की स्थिर लेकिन सीमित ग्रोथ जारी रहेगी. वहीं, इसी तरह के रोल में AI या नई टेक्नोलॉजी को शामिल करने पर ग्रोथ 15-30 फीसदी तक हो सकती है और सैलरी में 40 फीसदी तक का प्रीमियम मिल सकता है.
इन आंकड़ों से साफ है कि आपकी सैलरी और करियर की ग्रोथ सिर्फ इस बात से तय नहीं होगी कि आप किस सेक्टर में काम कर रहे हैं. असली फर्क आपकी स्किल्स से पड़ेगा.
EV, रिन्यूएबल एनर्जी या फिनटेक जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टर का हिस्सा होना अब अपने आप तेज ग्रोथ या बेहतर सैलरी की गारंटी नहीं है. ज्यादा फायदा उन लोगों को मिलेगा जो बदलती टेक्नोलॉजी के साथ खुद को अपडेट रखते हैं और उभरती टेक्नोलॉजी में नई स्किल्स सीखते हैं.
(अडेको इंडिया की रिसर्च से जुड़ी टेबल अब इस मूल रिपोर्ट के आखिर में जाकर देख सकते हैं)