यूपी-बिहार के यादव वोटबैंक को मोह पाएंगे मोहन यादव!

मध्य प्रदेश के भावी मुख्यमंत्री के जरिए भाजपा गंगा के मैदानी इलाकों में बसे यादव वोटबैंक को सकारात्मक संदेश देने की कोशिश में. ऐसी पूरी संभावना है कि लोकसभा चुनाव से पहले मोहन यादव के यूपी-कनेक्ट को भाजपा राज्य में भुनाएगी

MP New CM Mohan Yadav
मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में चुने गए मोहन यादव

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मोहन यादव का नाम मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर घोषित कर राजनीतिक पंडितों को चौका दिया. पिछड़े वर्ग से आने वाले मोहन यादव को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपकर भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में जातियों के उन गुलदस्ते के साथ जाना चाहती है जिसमें सभी का उचित प्रतिनिधि‍त्व हो. 

मोहन यादव का नाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि मध्य प्रदेश के दो सीमावर्ती राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार में यादव मतदाता अच्छी तादाद में हैं और भाजपा इसमें सेंधमारी के प्रयासों को और तेज करना चाहती है. उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (सपा) मुख्य विपक्षी दल है तो वहीं बिहार में लालू यादव की पार्टी सत्ता में है.

बड़ी संख्या में यादव आबादी वाले दोनों राज्यों में 120 लोकसभा सीटें हैं. मध्य प्रदेश में यादव जाति के नेता को मुख्यमंत्री बनाने के निर्णय का राजनीतिक विश्लेषक दूरगामी रणनीति के तौर पर देख रहे हैं. लखनऊ के बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग के प्रोफेसर सुशील पांडेय बताते हैं, “वर्तमान में यादव जाति से संबंध रखने वाले भाजपा के  विपक्षी दलों का कोई भी नेता मुख्यमंत्री नहीं है. यूपी में तो अखिलेश यादव वर्ष 2017 से सत्ता से बाहर हैं. सपा ने जिस तरह मुलायम सिंह यादव परिवार के लोगों को ही राजनीति में प्राथमिकता दी है उससे भाजपा मोहन यादव के जरिए परिवारवाद का मुद्दा भी यादव वोटबैंक के बीच उछालना चाहती है.” 

वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा ने यादव बेल्ट में सेंध लगाकर समाजवादी पार्टी की सत्ता में वापसी को कोशिशों को नाकाम साबित कर दिया था. अब मध्य प्रदेश के मनोनीत मुख्यमंत्री के यूपी-कनेक्ट के साथ, भाजपा निश्चित रूप से सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले आक्रामक कदम उठाने की कोशिश करेगी, जहां अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी भाजपा की सबसे बड़ी विपक्ष है. मोहन यादव की पत्नी सीमा, जिनकी पृष्ठभूमि भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से है, उत्तर प्रदेश से हैं. मोहन यादव अगस्त 2022 में सुल्तानपुर में अपने 96 वर्षीय बीमार ससुर ब्रह्मदीन यादव से मिलने के लिए अपनी पत्नी के साथ उत्तर प्रदेश के दौरे पर आए थे. यूपी में भाजपा मिशन-80 को ध्यान में रखकर लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार कर रही है.

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा यूपी में यादव वोटबैंक को साधने की हर संभव कोशिश कर रही है. समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बेहद नजदीकी लोगों में शुमार रहे कानपुर के मेहरबान सिंह पुरवा निवासी चौधरी हरमोहन सिंह यादव की विरासत के जरिए भाजपा यादव वोटबैंक को सकारात्मक संदेश दे रही है. हरमोहन सिंह यादव की पुण्यतिथि‍ के अवसर पर 25 जुलाई, 2022 को आयोजित कार्यक्रम को पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली से ऑनलाइन संबोधित किया था. 

अखि‍ल भारतवर्षीय यादव महासभा के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच हरमोहन यादव के बेटे सपा के पूर्व राज्यसभा सदस्य और यूपी विधान परिषद के पूर्व सभापति सुखराम सिंह यादव ने प्रधानमंत्री मोदी की वर्चुअल मौजूदगी में कहा “ मैं जरूर मुलायम सिंह यादव का होकर रहा लेकिन आपको अपना बेटा सौंप रहा हूं.” सुखराम यादव के बेटे और चौधरी हरमोहन सिंह‍ यादव जनकल्याण समिति के अध्यक्ष मोहित यादव यूके से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके लौटे हैं. युवाओं के बीच लोकप्रिय मोहित ने विधानसभा चुनाव से पहले जनवरी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ली थी. 

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले अपना जनाधार बढ़ाने में जुटी भाजपा अब सपा के कोर वोट बैंक यादव मतदाताओं में सेंध लगाने की जुगत में लगी है. मेहरबान सिंह का पुरवा में भगवा खेमे की सक्रियता इसी रणनीति का हिस्सा है. वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव के बाद 18 अक्टूबर को हरमोहन सिंह यादव की जन्मतिथि पर आयोजित मोहन महोत्सव में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव ने शिरकत की थी. इसके बाद वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हरमोहन यादव के जन्म शताब्दी वर्ष के रूप में बनाए गए मोहन महोत्सव में वर्चुअल ढंग से शामिल हुए थे. वहीं 24 नवंबर, 2021 को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी मेहरबान सिंह का पुरवा पहुंचकर हरमोहन सिंह यादव को श्रद्धांजलि दी थी.

वर्ष 2017 में यूपी में भारी बहुमत से चुनाव जीतकर सरकार बनाने वाली भाजपा ने जौनपुर सदर से विधायक गिरीश यादव को योगी सरकार में राज्यमंत्री बनाकर पूर्वांचल में यादव नेतृत्व उभारने की मुहिम शुरू की थी. वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव के बाद 30 जुलाई को भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के गोमतीनगर में बड़ी जुगौली के रहने वाले बूथ अध्यक्ष सोनू यादव के घर भोजन कर अपने “मिशन यादव” की शुरुआत की थी. 

अगले वर्ष मैनपुरी-एटा में प्रभावी हरनाथ सिंह यादव को भाजपा ने राज्य सभा भेजा. प्रदेश भाजपा के अंदरूनी अनुमान के मुताबिक वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को करीब 12 प्रतिशत यादव मतदाताओं ने वोट दिया था जो अबतक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. इसके बाद भाजपा ने जौनपुर सदर सीट को पहली बार लगातार दो बार जीतकर रिकॉर्ड बनाने वाले गिरीश यादव को योगी सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शामिल किया. 

विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा बेहद आक्रामक ढंग से यादव मतदाताओं के बीच अपना जनाधार बढ़ाने में जुट गई है. पिछले वर्ष अप्रैल में हुए विधान परिषद चुनाव में मथुरा-एटा-मैनपुरी सीट पर विधान परिषद के पूर्व सभापति और सपा नेता रमेश यादव के बेटे आशीष यादव को चुनाव में उतारकर यादव बेल्ट में सेंधमारी की सफल कोशिश की थी. इसके बाद अखिलेश यादव द्वारा छोड़ी गई आजमगढ़ लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ की जीत ने भाजपा के हौसले बुलंद कर दिए.

हालांकि सपा के पूर्व विधान परिषद सदस्य बासुदेव यादव कहते हैं, “भाजपा ने प्रदेश मंत्रि‍मंडल में यादव जाति के एक भी नेता को कैबिनेट मंत्री नहीं बनाया है जबकि यादव जाति से काफी कम संख्या वाली कुर्मी जाति के तीन नेता कैबिेनेट मंत्री हैं. इसी से साबित होता है कि भाजपा यादव जाति के प्रति कितना सम्मान रखती है.” यूपी विधानसभा में वर्तमान में याद‍व जाति के कुल 21 विधायक हैं. इनमें सपा के 19 और भाजपा के केवल दो (जौनपुर सदर और रुदौली विधानसभा) विधायक हैं. विधान परिषद में भाजपा के दो सदस्य सुभाष यदुवंशी और आशीष कुमार यादव, यादव समाज से ताल्लुक रखते हैं

उत्तर प्रदेश के 11 लोकभा क्षेत्रों में यादव वोटर निर्णायक हैं. ये क्षेत्र हैं - इटावा, बदायूं, मैनपुरी, फ़िरोज़ाबाद, इटावा, मैनपुरी, फ़ैज़ाबाद, संत कबीर नगर, बलिया, जौनपुर और आज़मगढ़ सहित कई लोकसभा क्षेत्रों में लगभग. इस बात की पूरी संभावना है कि अगले लोकसभा चुनाव में मोहन यादव यूपी और बिहार में प्रचार करते दिखेंगे. इसके बाद नतीजों में उनका असर भी समझ आएगा. 

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