वडोदरा में फिर बदला मोदी का अंदाज, तो अब जेन ज़ी को लुभा पाएगी BJP?
कॉन्सर्ट वाला मंच, बुकमायशो रजिस्ट्रेशन और 'धुरंधर' वाला अंदाज अपनाने के बाद भी BJP शायद यह सोच रही होगी कि क्या युवाओं तक पहुंचने की उसकी कोशिश जंतर-मंतर पर पैदा हुई दूरी को कम कर पा रही है

वडोदरा के आयोजन में पीएम नरेंद्र मोदी
8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा (MSUB) में खास तौर पर बनाए गए Y आकार के रैंप पर चलते हुए आए. उन्होंने दोनों तरफ बैठे लोगों की ओर हाथ हिलाया.
कार्यक्रम का लाइव प्रसारण कर रहे BJP के हैंडल ने क्वीन के 'वी विल रॉक यू' और 'धुरंधर' के 'आरी आरी' गाने को मिलाकर बजाया. इससे वहां मौजूद प्रशंसकों के बीच माहौल बेहद जोशीला हो गया.
'नमो फॉर विकसित भारत' नाम से आयोजित यह कार्यक्रम छह हफ्तों में Zen Z की भाषा बोलने वाली पार्टी के तौर पर खुद को पेश करने की BJP की कोशिश का तीसरा पड़ाव था.
जुलाई में नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद मोदी ने आधी रात को इंस्टाग्राम पर एक रील पोस्ट की जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों को ‘दोस्त’ कहकर संबोधित किया. हालांकि इस रील पर भी काफी मीम बने.
कुछ दिन बाद नई दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में मोदी ने एक बार फिर युवाओं से जुड़ने की कोशिश की. उन्होंने पूर्व छात्रों को ‘ओजी’ कहा और छात्रों से कहा कि SRCC का नाम अपने आप में ‘एक फ्लेक्स’ है.
8 सितंबर को वडोदरा में इस पूरे आयोजन का तामझाम काफी बढ़ा हुआ नजर आया. सरकारी कार्यक्रम के लिए पहली बार बुकमायशो के जरिए रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की गई. QR कोड से प्रवेश दिया गया और करीब 6,000 मुफ्त स्लॉट रखे गए जो कथित तौर पर एक घंटे के भीतर भर गए.
कार्यक्रम के लिए वडोदरा को चुनना भी महज संयोग नहीं था. वडोदरा के लोकसभा सांसद हेमांग जोशी ने 31 अगस्त को BJP की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला. उन्होंने तेजस्वी सूर्या की जगह ली.
अपने कार्यकाल के महज आठवें दिन अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र में BJP का अब तक का सबसे भव्य युवा कार्यक्रम आयोजित करना जोशी के राष्ट्रीय स्तर पर आगाज का ऐलान करने का बिल्कुल सही मौका था.
इससे मोदी का इस सीट से अपना पुराना रिश्ता भी फिर सामने आया. उन्होंने 2014 में वडोदरा लोकसभा चुनाव जीता था लेकिन बाद में वाराणसी सीट अपने पास रखते हुए वडोदरा छोड़ दी थी. वडोदरा उन दो लोकसभा सीटों में से एक थी जहां से जीतकर मोदी पहली बार संसद पहुंचे थे.
इस कार्यक्रम में मोदी के किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के आम तौर पर दिखने वाले अंदाज को भी उलट दिया गया. आम तौर पर उनके कार्यक्रम में एक तय मंच होता है या कभी-कभी वे बैरिकेड वाले रास्ते से धीमे-धीमे रोड शो करते हैं.
लेकिन यहां मोदी बैठे हुए लोगों के बीच पहुंचे, न कि लोगों को उनके आसपास व्यवस्थित किया गया. आलोचक कह सकते हैं कि कार्यक्रम का सेटअप किसी सरकारी आयोजन से ज्यादा प्रोडक्ट लॉन्च, फैशन शो या म्यूजिक कॉन्सर्ट जैसा दिख रहा था.
लेकिन इस चमक-दमक के पीछे भाषण का एजेंडा वही पारंपरिक विकास का था. मोदी ने 35,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाएं देश को समर्पित कीं. इनमें पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे के 326 रूट किलोमीटर में फैले तीन पूरे हो चुके हिस्से भी शामिल थे.
उन्होंने कहा कि इस परियोजना की पहली बार 2004 में कल्पना की गई थी लेकिन 2014 के बाद रफ्तार पकड़ने से पहले यह एक दशक तक अटकी रही.
मोदी ने माल ढुलाई की इस रेल लाइन के जरिए आलोचकों पर भी निशाना साधा. उन्होंने एक काल्पनिक ‘नाराज फूफा जी’ का जिक्र किया जो इस बात को लेकर चिंतित होंगे कि माल ढुलाई सड़क से रेल पर जाने के बाद ट्रक ड्राइवरों का काम छिन जाएगा.
इस तंज को व्यापक तौर पर कांग्रेस और राहुल गांधी की कॉलेज परिसरों में युवाओं तक पहुंचने की मुहिम 'छात्रों की गूंज' पर निशाने के तौर पर देखा गया.
क्या इनमें से कुछ भी काम कर रहा है, यह अभी खुला सवाल है. अब तक की कवरेज में भी काफी अंतर दिखता है.
एक तरफ कुछ लोग इसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ, उन मीडिया संस्थानों समेत जो पिछले कुछ हफ्तों से युवाओं के बीच 'मोदी का जादू फीका पड़ रहा है' जैसी खबरें लिख रहे हैं, इसे जरूरत से ज्यादा कोशिश करने वाला बता रहे हैं.
न्यूज एजेंसियों पर आधारित खबरों में युवाओं की ओर से मोदी का जोरदार स्वागत किए जाने की बात कही गई है.
लेकिन इनमें से कोई भी तस्वीर कार्यक्रम में शामिल लोगों की वास्तविक भावनाओं के आंकड़ों पर आधारित नहीं है. इसकी असली परीक्षा तो चुनाव में ही होती है. तब तक वडोदरा, SRCC और इंस्टाग्राम रील्स राजनीतिक वैज्ञानिकों की पत्रिकाओं में बदलाव के नोट्स भर बने रहेंगे.