मेनोपॉज को लेकर भारतीय महिलाओं को अब भी किन बातों का भ्रम है?

इंडिया टुडे वुमन समिट 2026 में जाने-माने डॉक्टरों ने कहा कि आखिरकार अब उस बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ रही है जिसे भारतीय महिलाएं पीढ़ियों से चुपचाप सहती आ रही हैं

इंडिया टुडे वुमन समिट में डॉ. अंबरीश मिथल और डॉ. अनीता गुप्ता (फोटो : चंद्रदीप कुमार)

भारत में मेनोपॉज को लेकर अब काफी बात हो रही है लेकिन इसके बारे में गलत जानकारी भी तेजी से फैल रही है. नई दिल्ली में हुए इंडिया टुडे वुमन समिट 2026 में डॉ. अनिता गुप्ता, एसोसिएट डायरेक्टर, प्रसूति एवं स्त्री रोग, फोर्टिस ला फेम; और डॉ. अम्बरीश मिथल, ग्रुप चेयरमैन एवं प्रमुख, एंडोक्राइनोलॉजी और डायबिटीज, मैक्स हेल्थकेयर ने इस सोच को गलत बताया कि मेनोपॉज खुद बदल रहा है. उनका कहना था कि मेनोपॉज कोई नई चीज नहीं है बल्कि अब लोगों को इसके बारे में जानकारी मिल रही है. भारतीय महिलाएं पीढ़ियों से चुपचाप इसके असर को सहती आई हैं.

‘मेनोपॉज मैटर्स: द साइलेंट हेल्थ क्राइसिस’ सत्र में डॉ. गुप्ता ने कहा, “मेनोपॉज में बदलाव नहीं आया. यह हमेशा से था लेकिन हमें इसके बारे में जानकारी नहीं थी.” उन्होंने कहा कि शहरों में तनाव, खराब खान-पान और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके लक्षणों को बढ़ा सकते हैं लेकिन इससे मेनोपॉज की उम्र नहीं बदलती. मेनोपॉज किस उम्र में शुरू होगा, यह काफी हद तक आनुवंशिक होता है. उन्होंने बताया कि भारत में मेनोपॉज की औसत उम्र 47 साल है. उत्तर-पश्चिम से लेकर उत्तर-पूर्व तक अलग-अलग इलाकों में यह उम्र अलग हो सकती है.

डॉ. मिथल ने इस बातचीत को सिर्फ हॉट फ्लैश यानी अचानक शरीर में गर्मी महसूस होने तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने मेनोपॉज के बाद शरीर में होने वाले बदलावों के बारे में बताया. मेनोपॉज के बाद पेट के अंदर जमा होने वाली चर्बी बढ़ सकती है, शरीर में इंसुलिन का असर कम हो सकता है, डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है और एस्ट्रोजन का सुरक्षा देने वाला असर खत्म होने के बाद दिल की बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़ जाता है.

उन्होंने हड्डियों की सेहत को लेकर भी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि मेनोपॉज के आसपास के पांच साल में महिलाएं अपनी हड्डियों का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा खो देती हैं.

हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी यानी HRT को लेकर लंबे समय से डर बना हुआ है. इसकी वजह 2001 में हुई वुमन्स हेल्थ इनिशिएटिव स्टडी थी. डॉ. मिथल ने कहा कि नई रिसर्च और त्वचा के जरिए दी जाने वाली HRT दवाओं से पहले की कई चिंताएं दूर हुई हैं.

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि HRT हर किसी के लिए बिना जोखिम वाली नहीं है. उन्होंने कहा, “अगर यह इतनी अच्छी है, तो हर कोई HRT क्यों नहीं ले रहा? बात इतनी आसान नहीं है.” उन्होंने बताया कि महिला की उम्र, मेनोपॉज के कितने समय बाद HRT शुरू की जा रही है और स्तन कैंसर या खून के थक्के बनने जैसी व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्याएं इसमें अहम भूमिका निभाती हैं.

डॉ. गुप्ता ने बताया कि अब मेनोपॉज को लेकर जागरूकता बढ़ रही है इसलिए ज्यादा महिलाएं लक्षणों के बढ़ने से पहले ही डॉक्टर से सलाह ले रही हैं. उन्होंने कहा, “मेरे पास बहुत सी महिलाएं आती हैं और पूछती हैं.” उन्होंने मरीजों को इंटरनेट पर बिना जांची-परखी जानकारी पर भरोसा करने से बचने की सलाह दी.

दोनों डॉक्टरों के अनुसार 45 साल की उम्र से प्रतिवर्ष स्वास्थ्य जांच कराना जरूरी है. इसमें हड्डियों की मजबूती, दिल से जुड़े जोखिम और कैंसर की जांच शामिल होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि योनि की सेहत(वजाइनल हैल्थ) और यौन स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर भी खुलकर बात करने की जरूरत है क्योंकि अभी इन पर उतनी बात नहीं होती.

खास बातें :

डॉ. अनिता गुप्ता

  • “मेनोपॉज बदला नहीं है. यह हमेशा से था, लेकिन हमें इसके बारे में जानकारी नहीं थी.”
  • “महिलाओं पर परिवार और नौकरी, दोनों संभालने का काफी तनाव होता है.”
  • “मेरे पास बहुत सी महिलाएं आती हैं और पूछती हैं: डॉक्टर, मेनोपॉज.”

डॉ. अम्बरीश मिथल

  • “अगर यह बात सुनने में इतनी ही अच्छी है तो हर कोई हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी क्यों नहीं ले रहा? बात इतनी आसान नहीं है.”
  • “उम्र के साथ शरीर में जो भी बदलाव होते हैं, अगर उनका असर आपकी जिंदगी की गुणवत्ता या लंबी उम्र पर पड़ रहा है तो उनका इलाज किया जा सकता है और करना भी चाहिए.”
  • “भारत में मेनोपॉज की सामान्य औसत उम्र 47 साल है.”

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