संगीत में करियर की अनिश्चितता के बीच मधुबंती बागची ने कैसे बनाई अपनी जगह?
इंडिया टुडे वुमन समिट में बागची ने संगीत करियर की अनिश्चितताओं और उन पलों के बारे में बताया जब उन्हें लगा कि वे इसी दुनिया का हिस्सा हैं

संगीत की दुनिया में मधुबंती बागची का सफर लगातार कोशिश, खुद को नए सिरे से तलाशने और अपने रास्ते पर टिके रहने के साहस की कहानी है.
‘इंडिया टुडे वुमन समिट 2026’ में प्लेबैक सिंगर और कंपोजर बागची ने संगीत में करियर की अनिश्चितताओं और उन पलों के बारे में खुलकर बात की जब उन्हें लगा कि वे इस दुनिया का हिस्सा बनने के लिए बनी हैं.
2017 में एम. टेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद बागची इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं. उस वक्त वे संगीत छोड़कर कोई पारंपरिक नौकरी करने के करीब पहुंच गई थीं.
तभी ऑस्कर विजेता कंपोजर एम.एम. कीरावणी का रिकॉर्डिंग सेशन के लिए अचानक फोन आया. इस मौके ने उन्हें कोलकाता छोड़कर नए भरोसे के साथ संगीत को करियर बनाने के लिए प्रेरित किया.
बागची का कहना है कि हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की उनकी ट्रेनिंग ने उन्हें अलग-अलग तरह के संगीत में आसानी से काम करने में मदद की. इसमें हीरामंडी का सेमी-क्लासिकल ‘नजरिया की मारी’ से लेकर स्त्री 2 का हाई-एनर्जी ‘आज की रात’ तक शामिल है.
हालांकि, इस बहुमुखी प्रतिभा के साथ उन्हें रूढ़ियों का भी सामना करना पड़ा. खासकर महिला सिंगर्स को मुख्य रूप से ‘पेपी’ गानों तक सीमित रखने की प्रवृत्ति का.
बागची ने माइक्रोफोन के पीछे लैंगिक असमानता पर भी बात की. उन्होंने कहा कि प्रोड्यूसर, कंपोजर और इंजीनियर के तौर पर काम करने वाली महिलाओं की संख्या अभी-भी अपेक्षाकृत कम है. उनके लिए अपनी जगह बनाना सिर्फ इंतजार करने की बात नहीं बल्कि उसे खुद हासिल करने की कोशिश करना है.
उनका मैसेज आखिरकार दृढ़ता का है. संगीत में सफलता का कोई निश्चित रास्ता नहीं हो सकता, लेकिन हार मान लेना इसका जवाब नहीं है. वे ऐसा ओरिजिनल म्यूजिक भी ज्यादा बनाना चाहती हैं, जिसके जरिए प्लेबैक सिंगिंग से आगे उनकी अपनी पहचान और व्यक्तित्व सामने आ सके.
खास बातें :
- “यह (संगीत में करियर) कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है. आप सब कुछ सही कर सकते हैं और फिर भी जरूरी नहीं कि सफल हो जाएं.”
- “हमें किसी के अपनी जगह देने का इंतजार करने के बजाय टेबल पर अपनी जगह खुद हासिल करनी होगी.”