भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए ‘ह्यूमन-टेक’ रणनीति पर क्यों भरोसा कर रहा कोस्ट गार्ड?

'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ' में कोस्ट गार्ड के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने बताया कि समुद्री सुरक्षा में AI, ड्रोन और रियल-टाइम डेटा के साथ इंसानी निगरानी क्यों जरूरी है

भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि

भारतीय तटरक्षक बल यानी इंडिया कोस्ट गार्ड अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को तकनीक के जरिए बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है. AI, ड्रोन और रियल-टाइम डेटा नेटवर्क को मानवीय सत्यापन के साथ जोड़ा जा रहा है ताकि भारत की विशाल तटरेखा और समुद्री हितों की सुरक्षा की जा सके.

29 सितंबर को कोच्चि में आयोजित 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ' में भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने कहा कि बल स्वदेशी और आयातित, दोनों तरह की तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है. इसी बीच भारतीय रक्षा क्षेत्र के सरकारी उपक्रम और प्राइवेट कंपनियां भी समुद्री सुरक्षा के लिए सॉफ्टवेयर और सिस्टम विकसित कर रहे हैं.

हालांकि शिवमणि ने जोर दिया कि तकनीक जमीन पर जाकर की जाने वाली जांच की पूरी तरह जगह नहीं ले सकती. ‘गार्डिंग द ब्लू फ्रंटियर’ सत्र में उन्होंने कहा, “आपके पास सबसे बेहतरीन तकनीक हो सकती है लेकिन जब तक आप खुद जाकर जांच नहीं करते, तब तक यह पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो सकता कि किसी जहाज पर मौजूद व्यक्ति कौन है.” 

उन्होंने जहाजों, मछली पकड़ने वाली नौकाओं और अन्य पोतों पर जाकर जांच करने की जरूरत पर जोर दिया ताकि उनमें सवार लोगों की पहचान और उनके बारे में जानकारी की पुष्टि की जा सके.

तटरक्षक बल की दीर्घकालिक योजना में ज्यादा बड़े जहाज शामिल हैं, जो अधिक सामान ले जा सकें, चालक दल के लिए बेहतर सुविधाओं से लैस हों और समुद्र में ज्यादा समय तक रह सकें. इसका एक प्रमुख लक्ष्य ऐसा नेटवर्क तैयार करना है, जिसमें समुद्र से मिलने वाली रियल-टाइम जानकारी बिना किसी रुकावट के समुद्री ऑपरेशन केंद्रों और नियंत्रण इकाइयों तक पहुंचे. इससे किसी खतरे का तेजी से पता लगाने और उस पर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी.

महानिदेशक ने 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के बाद भारत की तटीय सुरक्षा व्यवस्था में आए बदलाव का भी जिक्र किया. 26/11 से पहले कई एजेंसियां अलग-अलग काम करती थीं. उनके बीच समन्वय में कमी थी और साझा प्रयास सीमित थे. उन्होंने कहा कि बेहतर इंटर एजेंसी कोऑर्डिनेशन, अतिरिक्त संसाधनों और बढ़ी हुई मैनपावर के जरिए इनमें से ज्यादातर कमियों को दूर किया जा चुका है.

तटरक्षक बल में महिलाओं की भूमिका भी बढ़ने की उम्मीद है. शिवमणि ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना प्राथमिकता है और भविष्य में किसी महिला का तटरक्षक बल की महानिदेशक बनना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी.

भारत की समुद्री सीमाओं से आगे भी तटरक्षक बल मित्र देशों के साथ प्रशिक्षण, ऑपरेशनल विशेषज्ञता और सूचनाओं के आदान-प्रदान के जरिए सहयोग बढ़ा रहा है. अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ उसका सहयोग, जिसमें क्वाड एट सी शिप ऑब्जर्वर मिशन भी शामिल है, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा समुद्री स्थिति की जानकारी की बढ़ती अहमियत को दर्शाता है.

सत्र की खास बातें

परमेश शिवमणि :

  • “आपके पास सबसे बेहतरीन तकनीक हो सकती है, लेकिन जब तक आप खुद जाकर जांच नहीं करते, तब तक यह पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो सकता कि अंदर मौजूद व्यक्ति कौन है.”
  • “हम समुद्री और तटीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं को पूरा करने में मदद के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित करने के साथ-साथ आयातित तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहे हैं.”
  • “मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि 26/11 से पहले मौजूद ज्यादातर समस्याओं को दूर कर दिया गया है और समुद्री व तटीय सुरक्षा के मामले में हमारी स्थिति अब काफी बेहतर है.”
  • “उन दिनों हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि हर एजेंसी अलग-अलग काम कर रही थी. उनके बीच बिल्कुल समन्वय नहीं था. कोई तालमेल नहीं था.”
  • “रियल-टाइम डेटा समुद्र से समुद्री ऑपरेशन केंद्रों और वहां से सीधे नियंत्रण इकाइयों तक पहुंच सकता है.”

Read more!