छात्र राजनीति में सक्रिय युवा महिलाएं बनेंगी देश की अगली नेता?

‘इंडिया टुडे वुमन समिट 2026’ में छात्र राजनीति की युवा महिला नेताओं के बीच Gen Z , मोदी सरकार और राष्ट्रीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका को लेकर तीखी बहस हुई

इंडिया टुडे वुमन समिट 2026 (फोटो : अरुण कुमार)

राजनीति से Gen Z  क्या चाहती है? क्या वह मोटे तौर पर नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ हो रही है या युवाओं के बीच राजनीतिक माहौल इससे कहीं ज्यादा जटिल है? और क्या युवा महिलाएं छात्र राजनीति से आगे बढ़कर राष्ट्रीय नेतृत्व की अगली पीढ़ी बन सकती हैं?

इन सवालों पर ‘इंडिया टुडे वुमन समिट 2026’ के एक सत्र में तीखी बहस हुई. इसमें अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाली चार युवा महिलाओं ने हिस्सा लिया.

इनमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की कानूनी मामलों की प्रमुख और प्रवक्ता रत्ना सिंह, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) की दिल्ली प्रदेश सचिव जोस्लिन नंदिता चौधरी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की भोपाल केंद्रीय कार्यसमिति की सदस्य और पूर्व राष्ट्रीय सचिव शालिनी वर्मा और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की दिल्ली यूनिवर्सिटी सचिव अंजलि शामिल थीं.

बहस की शुरुआत हालिया छात्र आंदोलन और सरकार को मांगें मानने के लिए मजबूर करने में नवगठित CJP की भूमिका से हुई. रत्ना ने इस आंदोलन को मूल रूप से नेतृत्वविहीन बताते हुए कहा कि 37 दिनों बाद सरकार का मांगें मान लेना इसमें शामिल सभी लोगों के लिए बेहद भावुक क्षण था. 

उन्होंने इस बात से इनकार किया कि CJP ने उस मुद्दे को अपने हाथ में ले लिया जिसे स्थापित छात्र संगठनों का मुद्दा होना चाहिए था.

जोस्लिन ने कहा कि कांग्रेस और NSUI शुरुआत से ही इसमें शामिल थे. उन्होंने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान का जिक्र किया और कहा कि कांग्रेस की छात्र इकाई इस मुद्दे से पीछे नहीं हटी. उनके मुताबिक, ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह था कि प्रदर्शन के बाद FIR और कानूनी मामलों का सामना कर रहे छात्रों का क्या होगा.

रत्ना ने कहा कि CJP का ध्यान इसी मामले पर है. पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख के तौर पर उन्होंने बताया कि वे वरिष्ठ वकीलों के संपर्क में रही हैं और ऐसे वकीलों का नेटवर्क बनाने की कोशिश चल रही है जो अलग-अलग जिलों में प्रदर्शनकारियों की मदद कर सकें.

इसके बाद बहस इस सवाल पर पहुंची कि क्या यह प्रदर्शन युवाओं में मोदी सरकार के खिलाफ व्यापक राजनीतिक माहौल का संकेत है. शालिनी वर्मा ने इस बात का कड़ा विरोध किया. 

उन्होंने कहा कि ABVP को सिर्फ ऐसे छात्र संगठन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए जो अपने आप BJP सरकार का समर्थन करता है. उनके मुताबिक, छात्र राजनीति को केवल मोदी समर्थक या मोदी विरोधी नजरिए से नहीं देखा जा सकता.

अंजलि ने इससे बिल्कुल अलग राय रखी. उन्होंने कहा कि वामपंथ की राजनीति विश्वविद्यालय परिसरों से बाहर भी प्रासंगिक बनी हुई है. उन्होंने पेपर लीक, शिक्षा, स्कूलों को बंद किए जाने, निजीकरण और छात्रों के प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों का जिक्र किया. 

उन्होंने सवाल उठाया कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, जामिया मिलिया इस्लामिया और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में छात्र संघ चुनाव अब भी क्यों नहीं हो रहे हैं.

अंजलि के मुताबिक, सिर्फ संसदीय राजनीति ही राजनीतिक प्रासंगिकता तय करती है, यह तर्क पर्याप्त नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकारों को जवाबदेह बनाए रखने के लिए सड़कों पर आंदोलन जरूरी हैं.

बहस उस समय और तीखी हो गई, जब Gen Z के बड़े होने के दौरान बने राजनीतिक माहौल पर चर्चा हुई. अंजलि ने कहा कि युवा भारतीयों से एक नए और ज्यादा समानतापूर्ण भारत का वादा किया गया था. 

इसके बजाय उन्होंने सांप्रदायिक राजनीति, अपमानजनक राजनीतिक भाषा और सामाजिक विभाजन को सामान्य होते देखा. उन्होंने शिक्षा की बढ़ती लागत, पेपर लीक और उच्च शिक्षा के लिए फंडिंग व्यवस्था में बदलाव को लेकर भी चिंता जताई.

शालिनी ने इसके जवाब में कहा कि ये समस्याएं मोदी सरकार के साथ शुरू नहीं हुईं. उन्होंने पिछली सरकारों के दौरान हुए पेपर लीक के उदाहरण दिए और कहा कि ABVP ने खुद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से ज्यादा पारदर्शिता की मांग की थी. 

ABVP की नेता का तर्क था कि मौजूदा सरकार की आलोचना करते समय पिछली सरकारों की नाकामियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

राजनीति में महिलाओं की भूमिका के सवाल ने बहस को एक और दिशा दी. शालिनी ने कहा कि ABVP ने उन्हें नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण अवसर दिए, जिसमें प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर पदाधिकारी के तौर पर काम करना भी शामिल है. 

उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति के जरिए युवा महिलाओं को पहले से ही नेतृत्व की जिम्मेदारियां दी जा रही हैं और आने वाले समय में वे बड़ी राजनीतिक भूमिकाओं में तेजी से आगे बढ़ेंगी.

जोस्लिन ने कहा कि किसान परिवार से आने और दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ का चुनाव लड़ने के बाद वे खुद को एक दिन राजनीति की सबसे ऊंची सीढ़ी तक पहुंचते हुए देख सकती हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे प्रधानमंत्री बन सकती हैं, तो उन्होंने हां में जवाब दिया. 

उनकी राजनीतिक प्रेरणाओं में इंदिरा गांधी और तत्कालीन दौर में प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल हैं.

शालिनी वर्मा ने सुषमा स्वराज और निर्मला सीतारमण का नाम लिया. उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई होल्कर, रानी दुर्गावती और अब्बक्का देवी जैसी ऐतिहासिक हस्तियों से भी प्रेरणा लेने की बात कही. 

अंजलि ने AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा का नाम लिया. उन्होंने लंबे समय तक चले भूख हड़ताल में उनकी भागीदारी और अलग-अलग राज्यों में युवाओं को एकजुट करने के उनके प्रयासों को रेखांकित किया.

रत्ना सिंह ने ज्यादा जमीनी नजरिया रखा. उन्होंने कहा कि उनकी प्रेरणा उन्हें प्रदर्शनों के दौरान मिली युवा महिलाओं से मिलती है. इनमें छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों की वे महिलाएं भी शामिल हैं जो स्कूलों और दूसरे स्थानीय मुद्दों के लिए संघर्ष कर रही हैं.

बहस के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि युवा महिलाएं अब राजनीति में सिर्फ दर्शक बनकर रहने को तैयार नहीं हैं. हालांकि वक्ताओं की राय अलग-अलग थी कि इस राजनीतिक भागीदारी का स्वरूप क्या होना चाहिए. 

जोस्लिन के लिए यह स्थापित पार्टी राजनीति में है. शालिनी के लिए यह राष्ट्रवादी छात्र सक्रियता में निहित है. अंजलि के लिए इसका जुड़ाव वामपंथी राजनीति और सड़क पर होने वाले आंदोलनों से बना हुआ है. वहीं, रत्ना सिंह के लिए यह मुद्दा आधारित उभरती राजनीति है, जो जरूरी नहीं कि स्थापित विचारधाराओं या राजनीतिक दलों के ढांचे में आसानी से फिट हो.

मुख्य बातें :

रत्ना सिंह

  • “हम पहले दिन से कह रहे हैं कि यह नेतृत्वविहीन आंदोलन है. हम चाहते हैं कि लोग आगे आएं और अपनी आवाज खुद उठाएं. हमें राजनीतिक पहचान की जरूरत नहीं है.”
  •  “मेरी प्रेरणा Gen Z की वे लड़कियां हैं, जिन्हें मैं जमीन पर देखती हूं, चाहे वे लखनऊ में प्रदर्शन कर रही हों या ग्रामीण इलाकों में स्कूलों के लिए लड़ रही हों. मुझे लगता है कि प्रेरणा सीधे लोगों से मिलनी चाहिए.”

जोस्लिन नंदिता चौधरी

  • “अगर मैं देश के सबसे बड़े छात्र चुनावों में से एक लड़ सकती हूं तो मैं खुद को एक दिन शीर्ष पर देख सकती हूं. यह मेरी क्षमता और इस बात पर निर्भर करता है कि लोग मुझे स्वीकार करते हैं या नहीं.”
  • “मेरी मुख्य प्रेरणा इंदिरा गांधी हैं. मैं प्रियंका गांधी से भी बहुत प्रेरित हूं. मुझे उनका बोलने, बहस करने और सवाल उठाने का तरीका पसंद है.”

शालिनी वर्मा

  • “छात्र राजनीति को सिर्फ मोदी समर्थक या मोदी विरोधी के तौर पर नहीं देखा जा सकता. ABVP ने तब भी प्रदर्शन किए हैं, जब BJP की सरकारें सत्ता में रही हैं.”
  • “मेरा मानना है कि ABVP छात्राओं को नेतृत्व के सबसे ज्यादा अवसर देता है. मैं ABVP की प्रदेश मंत्री, ABVP की राष्ट्रीय मंत्री और ABVP की विभागीय संगठन मंत्री रही हूं.”

अंजलि

  • “इतिहास ने हमें दिखाया है कि जब संसद नाकाम होती है, तब लोगों को सड़कों पर आंदोलन जारी रखना पड़ा है.”
  • “हमने एक ऐसा नया सामान्य दौर देखा है, जहां सांप्रदायिक जहर और अपमानजनक राजनीतिक भाषा सामान्य हो गई है.”

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