इंडिया ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट कैसे एक शर्मिंदगी का सबब बन गया
इंडिया ओपन 2026 में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों ने ट्रेनिंग और मैच वेन्यू की स्थिति काफी खराब होने की शिकायत की. इससे अगस्त में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले इन कमियों को सुधारने का भारी दबाव है.

पूरे विवाद की शुरुआत डेनमार्क की खिलाड़ी मिया ब्लिचफेल्ट के उस बयान के साथ हुई, जिसमें उन्होंने नई दिल्ली स्थित के.डी. जाधव स्टेडियम और इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम के आसपास के पूरे वातावरण को ही unhealthy यानी बीमार कर देने वाला बताया.
उन्होंने कहा कि अगस्त में वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेजबानी करने से पूर्व यहां बहुत कुछ सुधारने की जरूरत है. पूर्व वर्ल्ड चैंपियन रचनोक इंतानोन और कनाडा की मिशेल ली ने भी उनका साथ देते हुए कहा कि स्टेडियम में अत्यधिक ठंड के कारण वार्म-अप करना मुश्किल हो गया.
ब्लिचफेल्ट ने कहा, “अगर ऐसे माहौल में कारण खिलाड़ी बीमार या चोटिल होते हैं तो यह गलत होगा. मुझे नहीं लगता कि तमाम अन्य एथलीट भी ऐसी स्थिति में खेलना चाहेंगे.”
ब्लिचफेल्ट के अपने ही देश के एक खिलाड़ी इसमें शामिल है. डेनमार्क के एंडर्स एंटोनसेन ने इंस्टाग्राम पर बताया कि उन्होंने दिल्ली के “जानलेवा प्रदूषण” के कारण टूर्नामेंट छोड़ दिया, जिस पर बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) ने उन पर 5,000 डॉलर का भारी-भरकम जुर्माना लगाया. सोशल मीडिया पर इन शिकायतों के बाद भारतीय बैडमिंटन संघ (BAI) को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा. लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई.
खेल पत्रकार जोनाथन सेल्वराज ने स्टेडियम में एक बंदर की फोटो शेयर की. आम तौर पर बैडमिंटन मैच पसीना पोंछने के लिए रुकते हैं लेकिन एच.एस. प्रणय और सिंगापुर के लोह कीन यू के बीच मैच को दो बार कोर्ट पर चिड़िया की बीट गिरने के कारण रोकना पड़ा.
पूर्व विश्व चैंपियन कीन यू ने भी बताया कि कैसे प्रदूषण के कारण उन्हें मास्क पहनना पड़ा और उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई. उन्होंने मीडिया से कहा, “हर खिलाफ का स्टैमिना दो लेवल नीचे आ गया. मौसम अच्छा नहीं है. मेरी सेहत काफी खराब हो गई. मैं जहां तक संभव हो अंदर ही रहता हूं क्योंकि यही एकमात्र उपाय नजर आता है.”
15 जनवरी को BWF ने एक बयान जारी कर स्वीकारा कि खिलाड़ियों की शिकायतें जायज हैं. साथ ही, आश्वासन दिया कि अगस्त में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप में ऐसी स्थिति नहीं होगी क्योंकि तब “मौसमी समस्याएं” (वायु गुणवत्ता और प्रदूषण) नहीं रहेंगी. बयान में कहा गया, “इस बारे में मिला फीडबैक—सकारात्मक और नकारात्मक दोनों—टूर्नामेंट और आगे भी चैंपियनशिप के लिए हरसंभव बेहतर वातावरण तैयार करने में अमूल्य है.”
अपने बयान में BWF में कहा, “इस हफ्ते मौसमी परिस्थितियों, जैसे धुंध और ठंड के कारण आयोजन स्थल के अंदर वायु गुणवत्ता और तापमान पर पड़ने वाले असर के प्रबंधन में चुनौतियां आईं. हालांकि सामान्य स्वच्छता व साफ-सफाई और जीव-जंतुओं पर नियंत्रण जैसी चीजों पर ध्यान देने की जरूरत थी और BAI ने इन चिंताओं को दूर करने के लिए तुरंत कार्रवाई की है.”
बहरहाल, स्थिति तब और शर्मिंदगी भरी हो गई जब भारतीय खिलाड़ियों का घरेलू मैदान पर प्रदर्शन निराशाजनक रहा. पोडियम के लिए भारत की सबसे प्रबल दावेदार पुरुष युगल जोड़ी चिराग शेट्टी और सात्विकसाईराज रेंकीरेड्डी राउंड ऑफ 16 में ही बाहर हो गई. 17 वर्षीय तन्वी शर्मा ने जरूर दिखाया कि वह भारतीय बैडमिंटन की अगली बड़ी स्टार हैं लेकिन अंततः लक्ष्य सेन क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाले एकमात्र खिलाड़ी रहे इससे आगे नहीं बढ़ पाए.
आयोजन संबंधी चिंताओं की फेहरिस्त बढ़ते जाने के बीच भारतीयों ने सोशल मीडिया पर यह टिप्पणी करना शुरू कर दिया कि अगर सुपर 750 प्रतियोगिता के आयोजन का यह हाल है त देश राष्ट्रमंडल खेलों जैसे बड़े आयोजन को सफलतापूर्वक कैसे आयोजित कर पाएगा. गौरव यू. गुलैया ने एक्स पर लिखा कि इंदिरा गांधी स्टेडियम एक जिउ जित्सु प्रतियोगिता के AJP टूर की मेजबानी के लिए उपयुक्त नहीं था. उन्होंने वहां तैनात अधिकारियों के रिश्वत मांगने और टॉयलेट बेहद गंदे होने का जिक्र किया. अंततः आयोजकों ने एक निजी स्टेडियम को चुना.
BAI को इस अनुभव से बहुत कुछ सीखना जरूरी है. उसकी तरफ से तर्क दिया जा सकता है कि इंदिरा गांधी स्टेडियम पहली बार इस टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा है और इंडिया ओपन बुनियादी ढांचे और संचालन की जांच के लिए एक कसौटी थी. उम्मीद है, BAI अगस्त तक इन सब कमियों और खामियों को दूर कर लेगा. आखिरकार, अब उन्हें पता है कि अगर सब कुछ ठीक नहीं हुआ तो आलोचनाएं झेलनी पड़ेंगी.