दो मौसमी घटनाएं कैसे बना रहीं भारत में मानसून को ताकतवर?
सैटेलाइट तस्वीरों में तिब्बत के पठार के ऊपर विशाल मानसूनी सर्कुलेशन दिखाई दिया. वहीं बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव से विकसित हुआ डीप डिप्रेशन, पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तट को पार करते हुए देश के भीतर आगे बढ़ रहा है

इन दोनों क्षेत्रों में मौसमी सक्रियता दक्षिण-पश्चिम मानसून को और मजबूत बना रही है. (फोटो: विंडी)
भारत में मानसून सबसे सक्रिय चरण में प्रवेश कर रहा है. इस हफ्ते दो मौसमी घटनाएं एक-दूसरे के साथ टकराना शुरू कर रही हैं जिसके चलते देश के बड़े हिस्से में गरज-चमक के साथ भारी बारिश होने की संभावना बनी रहेगी.
सोमवार को जारी सैटेलाइट तस्वीरों में तिब्बत के पठार के ऊपर एक विशाल मानसूनी सर्कुलेशन दिखाई दिया. वहीं बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव से विकसित हुआ गहरा अवदाब यानी डीप डिप्रेशन, पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तट को पार करते हुए देश के भीतर आगे बढ़ रहा है.
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इन दोनों बड़े मौसमी परिघटनाओं के आपस में टकराने की वजह से दक्षिण-पश्चिम मानसून और मजबूत हो रहा है. इसकी वजह से पूर्वी, मध्य, उत्तरी और दक्षिणी भारत के बड़े हिस्सों में बारिश तेज हो रही है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग(IMD) के अनुसार, यह गहरा अवदाब उत्तर और उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ता रहेगा और बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी लेकर देश के अंदरूनी इलाकों तक पहुंचेगा.
जैसे-जैसे यह आगे बढ़ेगा इसका असर उत्तरी भारत में सक्रिय मानसूनी ट्रफ के साथ मिलकर और बढ़ेगा. इससे घने बादल बनने और व्यापक स्तर पर गरज-चमक के साथ बारिश होने की अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी.
पूर्वी भारत में बारिश पहले ही तेजी से हो रही है और आने वाले दिनों में इसका दायरा धीरे-धीरे पश्चिम और उत्तर भारत तक फैलने की संभावना है.
IMD के अनुसार, मंगल और बुधवार को भी मानसून पूरे जोर पर रहेगा. ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है.
मजबूत होती मानसूनी परिसंचरण प्रणाली का असर प्रायद्वीपीय भारत में भी देखने को मिलेगा. महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है. वहीं पश्चिमी तट पर भी बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है.
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, तिब्बती पठार के ऊपर बना विशाल सर्कुलेशन सिस्टम वायुमंडल में मानसूनी प्रवाह को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है.
दूसरी ओर, बंगाल की खाड़ी में बना गहरा अवदाब नमी को देश के भीतर खींचने का काम करता है. जब ये दोनों मौसमी घटनाएं एक साथ सक्रिय होती हैं तो एक-दूसरे को और मजबूत करती हैं. इससे वायुमंडल में अस्थिरता बढ़ती है और बड़े इलाके में भारी बारिश की संभावना बन जाती है.
इसी वजह से पूर्वी, उत्तरी, मध्य और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में पहले से ही बादल देखे जा रहे हैं और पूरे हफ्ते बारिश का दौर जारी रहने की उम्मीद है.
मौसम विभाग ने बाढ़ संभावित और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. लगातार बारिश की वजह से जलभराव, स्थानीय स्तर पर बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है. खासकर, हिमालयी राज्यों और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है.