लग्जरी वेलनेस कैसे बदल सकता है भारतीय पर्यटन का भविष्य?

IHCL के CEO पुनीत चटवाल ने कहा कि भारत में पर्यटकों के लंबे समय तक ठहरने और वेलनेस अनुभवों को जोड़ने से पर्यटन कारोबार को मजबूती मिल सकती है. वहीं, इरीना शर्मा ने व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार स्वास्थ्य देखभाल, नियमित जांच और टिकाऊ आदतों के महत्व पर जोर दिया

इंडिया टुडे मुंबई कॉन्क्लेव 2026 में IHCL के MD और CEO पुनीत चटवाल और VIVAMAYR की विशेषज्ञ इरीना शर्मा

'इंडिया टुडे मुंबई कॉन्क्लेव 2026' में इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) के प्रबंध निदेशक(MD) और CEO पुनीत चटवाल ने कहा कि आयुर्वेद और योग की अपनी परंपराओं, बढ़ती घरेलू मांग और लंबे समय तक ठहरने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता के साथ, भारत के पास वेलनेस टूरिज्म (स्वास्थ्य पर्यटन) के लिए एक ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में उभरने का एक बड़ा अवसर है.

ऑस्ट्रिया के विवामेयर मेडिकल हेल्थ रिजॉर्ट की स्ट्रैटेजिक पार्टनर और विशेषज्ञ इरीना शर्मा के साथ 'वेलनेस टूरिज्म: द न्यू मार्क ऑफ लग्जरी' सत्र में बोलते हुए, चटवाल ने कहा कि वेलनेस टूरिज्म वैश्विक स्तर पर अभी शुरुआती चरण में है और यह भारत के हॉस्पिटैलिटी उद्योग के लिए एक बड़ा अवसर बन सकता है.

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को लुभाने में भारत के लाभ को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत आने वाले पर्यटक औसतन लगभग 17 दिन रुकते हैं, जबकि कई अन्य देशों में यह अवधि तीन से छह दिन होती है. उन्होंने कहा कि ठहरने की इस लंबी अवधि को वेलनेस अनुभवों के साथ जोड़ने से भारत को अपने इनबाउंड (विदेश से आने वाले) पर्यटन कारोबार को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.

IHCL के आत्मंथन (Atmantan) वेलनेस रिट्रीट के बारे में बात करते हुए चटवाल ने कहा कि अब ध्यान केवल डिटॉक्सिफिकेशन या प्रतिबंधित आहार (रिस्ट्रिक्टिव डाइट) से हटकर इंटीग्रेटेड वेलनेस की ओर बढ़ रहा है. इस तरीके में व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से मेडिकल जांच, पोषण, नींद, व्यायाम और दूसरी थेरेपी को शामिल किया जाता है.

उन्होंने कहा, "वेलनेस का मतलब कई चीजों को छोड़ देना नहीं है." उन्होंने जोर दिया कि मेहमानों को ऐसी आदतें सीखनी चाहिए, जिन्हें वे वेलनेस रिट्रीट से लौटने के बाद भी जारी रख सकें. उन्होंने कहा कि वेलनेस के दौरान सीखी गई 60 फीसदी आदतों को भी अगर कोई व्यक्ति अपनी जिंदगी में बनाए रखता है तो यह सही दिशा में उठाया गया कदम होगा.

शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि वेलनेस को क्षणिक ट्रेंड्स या इन्फ्लुएंसर्स के सुझाए डाइट प्लान्स के बजाय मेडिकल समझ और व्यक्तिगत जरूरतों पर आधारित होना चाहिए. VIVAMAYR का दृष्टिकोण मेटाबॉलिक हेल्थ, पाचन, नींद, व्यक्तिगत सप्लीमेंट और अच्छी आदतों के निर्माण पर केंद्रित है. उन्होंने इस अनुभव को सेहत की एक ऐसी पाठशाला बताया, जहां मेहमान घर लौटने के बाद भी अपनी सेहत का ख्याल रखना सीखते हैं.

वक्ताओं ने उपवास, निवारक स्वास्थ्य सेवा (प्रिवेंटिव हेल्थकेयर) और दीर्घायु (लॉन्जिविटी) में बढ़ती रुचि पर भी चर्चा की. शर्मा ने तर्क दिया कि उपवास को भुखमरी (स्टार्वेशन) समझने की भूल नहीं की जानी चाहिए और खान-पान के पैटर्न को व्यक्तिगत जरूरतों व शरीर की दैनिक लय (डेली रिदम)  के अनुरूप होना चाहिए. उन्होंने पर्याप्त विशेषज्ञता के बिना चिकित्सा हस्तक्षेप (मेडिकल इंटरवेंशन) देने वाले वेलनेस कारोबारों को लेकर भी आगाह किया और इसके लिए बेहतर नीतियां बनाने तथा निगरानी बढ़ाने की जरूरत बताई.

दोनों वक्ताओं ने व्यक्तिगत तौर पर नियमित स्वास्थ्य जांच और टिकाऊ दिनचर्या के महत्व पर जोर दिया. चटवाल ने प्रगति को समझने के लिए विशेषज्ञों से सलाह लेने, बुनियादी जांच और समय-समय पर स्वास्थ्य संकेतकों पर नजर रखने की सलाह दी.

इसका व्यापक संदेश यह था कि लग्जरी वेलनेस अब केवल विलासिता तक सीमित न रहकर प्रिवेंटिव हेल्थकेयर (निवारक स्वास्थ्य सेवा) और लंबे समय तक अच्छी सेहत बनाए रखने की ओर बढ़ता जा रहा है. भारत के सामने चुनौती यह है कि वह अपनी पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों को भरोसेमंद मेडिकल विशेषज्ञता, अच्छी हॉस्पिटैलिटी और व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से देखभाल के साथ जोड़े ताकि दुनिया भर में वेलनेस टूरिज्म के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना सके.

खास बातें | पुनीत चटवाल

  • “वेलनेस टूरिज्म अभी अपने शुरुआती दौर में भी नहीं है; यह बिल्कुल एक नवजात शिशु की तरह है.”
  • "यदि भारत में पर्यटकों के ठहरने की लंबी औसत अवधि को वेलनेस टूरिज्म के साथ जोड़ दिया जाए तो हमारे सामने एक बहुत बड़ा अवसर होगा."
  • “यदि आप वहां (किसी वेलनेस कार्यक्रम में) की गई 60 प्रतिशत चीजों का भी पालन करना जारी रखते हैं तो यह सही दिशा में उठाया गया एक कदम है.”
  • “बेहतर जीवन के लिए 'कम ही ज्यादा है'. जिस चीज में भी आप जरूरत से ज्यादा लिप्त होते हैं या जिसे करना आपको पसंद है, उसे थोड़ा कम करना ही बेहतर है.”
  • “हर व्यक्ति की शारीरिक बनावट अलग होती है और उसकी जरूरतें भी अलग होती हैं, यही वजह है कि आपको एक इंटीग्रेटेड वेलनेस कॉन्सेप्ट की जरूरत होती है.”

खास बातें | इरीना शर्मा

  • "हम वह नहीं हैं जो हम खाते हैं, बल्कि हम वह हैं जिसे हमारा शरीर पचा पाता है."
  • "कोई दूसरा आपके लिए खाना नहीं चबा सकता और न ही कोई दूसरा आपकी जगह चल सकता है."
  • “हम इन्फ्लुएंसर्स के आधार पर या यह कहकर कि 'यह आपका सुपरफूड है', अपनी जिंदगी को कॉपी-पेस्ट नहीं कर सकते.”
  • "हम सभी को अपनी आदतों का आर्किटेक्ट खुद बनना होगा."
  • “यहीं पर मुझे चिकित्सा का भविष्य दिखाई देता है: एक व्यक्तिगत दृष्टिकोण, जिसमें कोई वेलनेस सेंटर या डॉक्टर सामान्य स्वास्थ्य सलाह देने के बजाय हर व्यक्ति को एक अलग इंसान के रूप में देखता है."

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