क्या रूस-यूक्रेन जंग रोक पाएंगे ट्रंप; नहीं माने पुतिन तो क्या करेगा अमेरिका?
अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच 15 अगस्त को मुलाकात होनी है, जिसका मकसद रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष विराम कराना है

15 अगस्त 2025, जिस रोज भारत में स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किला की प्राचीर से देश को संबोधित कर रहे होंगे. उसी दिन उत्तरी ध्रुव के नजदीक स्थित अलास्का में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मुलाकात करेंगे.
इस हाईप्रोफाइल मुलाकात का मकसद साढ़े तीन साल से रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग को खत्म करना है. हालांकि, यूक्रेन के पूर्व प्रधानमंत्री आर्सेनी यात्सेन्युक ने इस मुलाकात से पहले दावा किया है कि 2025 में युद्धविराम की केवल 10 फीसद ही संभावना है.
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मुलाकात को लेकर उत्साहित हैं और उन्होंने इशारा किया है कि संघर्ष विराम के लिए दोनों देशों के बीच जमीन का कुछ लेन-देन हो सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या रूस के राष्ट्रपति पुतिन ट्रंप की बात मानकर समझौता करेंगे, वहीं जेलेंस्की इस समझौते के लिए कितना तैयार हैं और अगर यह समझौता नहीं हुआ तो ट्रंप क्या करेंगे, उनका अगला प्लान क्या है?
ट्रंप ने जंग खत्म करवाने के लिए दोनों देशों को क्या प्रस्ताव दिए हैं?
अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि चुनाव जीतने के बाद वे रूस-यूक्रेन जंग खत्म करवा देंगे. लेकिन, राष्ट्रपति बनने के 6 महीने बाद यह बदस्तूर जारी है और उनका यह बड़ा चुनावी वादा अधूरा है.
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या ट्रंप यूक्रेन की आजादी को बचाए रखने के साथ ही वहां स्थायी शांति स्थापित करने को लेकर पुतिन के साथ समझौता कर सकेंगे. यही वजह है कि अलास्का के जिस समझौते का नाम ट्रंप गर्व से ले रहे हैं, दरअसल वहां उनके सौदेबाजी कौशल की परीक्षा भी होनी है.
अमेरिका में सीबीएस न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि व्हाइट हाउस यूरोपीय नेताओं को एक ऐसे समझौते के लिए राजी करने की कोशिश कर रहा है, जिसमें रूस को पूर्वी यूक्रेन का पूरा डोनबास क्षेत्र और क्राइमिया देना शामिल है.
इसके बदले में रूस, खेरसोन और जापोरिजिया क्षेत्रों को छोड़ेगा जिसके कुछ हिस्से पर रूस ने कब्जा कर रखा है. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक रिपोर्ट के मुताबिक पुतिन ने हाल ही में मॉस्को में ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात के दौरान इसी तरह का प्रस्ताव दिया था.
जेलेंस्की और पुतिन क्या ट्रंप के इस प्रस्ताव को मानेंगे?
कैलगरी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एलेक्जेंडर हिल के मुताबिक, इस बात की संभावना बहुत हद तक इस पर निर्भर करती है कि ट्रंप पुतिन और जेलेंस्की को शांति समझौता स्वीकार करने के लिए कितना मजबूर कर सकते हैं.
इसमें कोई दो राय नहीं कि पुतिन शांति वार्ता के लिए तभी तैयार होंगे, जब उन्हें लगेगा कि रूस की सैन्य और क्षेत्रीय बढ़त बरकरार रहेगी. उन्हें जंग खत्म करने का लाभ मिलेगा.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुतिन ने ट्रंप के साथ 15 अगस्त, 2025 को अलास्का में प्रस्तावित बैठक में रुचि दिखाई है और वे युद्धविराम के लिए तैयार हो सकते हैं. बशर्ते इसमें डोनेत्स्क, लुहांस्क, जेपोरिजिया, खेरसोन और क्रीमिया जैसे यूक्रेन के बड़े हिस्से को रूसी क्षेत्र के रूप में मान्यता दी जाए.
हालांकि, प्रोफेसर एलेक्जेंडर हिल का कहना है कि पुतिन की रणनीति रूस की सैन्य प्रगति पर टिकी हुई है. उन्होंने तब तक बातचीत में गंभीरता नहीं दिखाई, जब तक उन्हें मजबूत स्थिति नहीं मिली.
जहां तक यूक्रेन की बात है तो जेलेंस्की ने रूस को जमीन देने वाले ट्रंप के प्रस्ताव को साफ खारिज कर दिया है. उन्होंने 10 अगस्त को कहा कि यूक्रेन किसी भी परिस्थिति में रूस को अपनी जमीन नहीं देगा.
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी की अंगेला स्टेंट का मानना है कि जेलेंस्की की यह कठोर स्थिति यूक्रेनी जनता और सेना के दबाव से उपजी है, जो रूस की शर्तों पर किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेगी. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे उनकी संप्रभुता और भविष्य की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है.
टेलीग्राम पर एक बयान जारी कर जेलेंस्की ने कहा कि, "यूक्रेन के जमीन का सवाल है तो इसका जवाब पहले से ही यूक्रेन के संविधान में है. कोई इसकी अनदेखी नहीं कर सकता. यूक्रेनी अपनी जमीन, कब्जा करने वालों को नहीं देंगे."
जेलेंस्की का कहना है कि जो भी समाधान यूक्रेन को शामिल किए बिना या यूक्रेन के खिलाफ लिया जाएगा, वह शांति के खिलाफ होगा.
अगर पुतिन या जेलेंस्की नहीं माने तो ट्रंप क्या करेंगे?
ओबामा सरकार के दौरान रूस में अमेरिकी राजदूत रहे माइकल मैकफॉल का कहना है, "अगर आप बिना तैयारी के पुतिन के साथ होने वाले बैठक में पहुंचते हैं, तो पुतिन आपको घेर सकते हैं. शिखर सम्मेलनों का उद्देश्य अमेरिकी राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाना होता है. ये मौके लक्ष्य प्राप्ति का साधन हैं. जबकि ट्रंप के बयान से मुझे कभी-कभी लगता है कि उनके लिए सिर्फ बैठक आयोजित हो जाना भर अपने आप में एक लक्ष्य या उद्देश्य की पूर्ति है."
एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूस और यूक्रेन अगर शांत समझौता के लिए तैयार नहीं हुए, तो उन्हें झुकाने के लिए अमेरिका ने अलग-अलग प्लान तैयार कर रखे हैं. अब एक-एक कर दोनों देशों के लिए अमेरिका की तैयारी के बारे में जानते हैं.
पुतिन के लिए तैयार है ट्रंप का प्लान बी: अमेरिका के हडसन इंस्टीट्यूट में यूरोप और यूरेशिया केंद्र के निदेशक पीटर रफ का मानना है कि रूस अगर नहीं मानता है तो ट्रंप सबसे पहले चीन और भारत जैसे देशों पर टैरिफ की कार्रवाई करेंगे. ये वो देश हैं, जो रूसी तेल खरीदते हैं.
रूस समेत इन देशों पर अमेरिका 100 फीसद तक टैरिफ लगा सकता है. इस रणनीति का उद्देश्य रूस के तेल राजस्व में कटौती करके उसकी युद्ध अर्थव्यवस्था को तबाह करना है. यह उसके सैन्य बजट का 40 से 50 फीसद हिस्सा है. अमेरिका को उम्मीद है कि इससे रूस जंग से पीछे हटने के लिए मजबूर हो जाएगा.
यूक्रेन में अमेरिका के पूर्व राजदूत जॉन हर्बस्ट का सुझाव है कि युद्धविराम के लिए 10-12 दिन की समय-सीमा (जुलाई 2025 में 50 दिनों से घटाकर) तय करना यह दिखाता है कि ट्रंप निर्णायक कार्रवाई के लिए तैयार हैं. हालांकि, अगस्त 2025 तक प्रतिबंधों को लागू करने में उनकी देरी उनकी प्रतिबद्धता पर संदेह पैदा करती है.
कार्नेगी एंडोमेंट के एक वरिष्ठ फेलो माइकल कॉफमैन का कहना है कि अगर पुतिन किसी समझौते से इनकार करते हैं तो ट्रंप रूस पर दबाव बनाने के लिए यूक्रेन को जंग के मैदान में मजबूत करेंगे. हालांकि, लंबे समय तक सहायता के लिए पूरी तरह से सहमत होने में ट्रंप की अनिच्छा, दोनों देशों के बीच जारी इस जंग को लेकर तुरंत समाधान पर उनके ध्यान को ही दिखाती है.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कुछ यूरोपीय राजनयिकों के हवाले से यह बताया गया है कि अगर पुतिन युद्धविराम को अस्वीकार करते हैं, तो ट्रंप रूस को और अलग-थलग करने के लिए अपने सहयोगियों पर दबाव डाल सकते हैं. अगस्त 2025 में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और अन्य देशों ने अपने संयुक्त बयान में बलपूर्वक सीमा परिवर्तन के खिलाफ सामूहिक रूप से खेद जाहिर किया है, जिससे संकेत मिलता है कि ट्रंप NATO देशों को रूस के खिलाफ कड़े कदम उठाने के लिए एकजुट कर सकते हैं.
यूक्रेन के लिए क्या है अमेरिका का प्लान: रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI) लंदन के जोनाथन इयाल ने एक इंटरव्यू में कहा है कि ट्रंप की रणनीति जेलेंस्की पर दबाव डालकर उन्हें युद्धविराम के लिए राजी करने की है, न कि यूक्रेन की सरकार को अस्थिर करने की.
ट्रंप ने जेलेंस्की के साथ तनावपूर्ण बातचीत (जैसे फरवरी 2025 में ओवल ऑफिस में हुई बैठक) और सैन्य सहायता में कटौती जैसे कदमों के जरिए यूक्रेन को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश की है.
इयाल के मुताबिक, तख्तापलट जैसे कदम ट्रंप के लिए "विपरीत परिणाम" दे सकते हैं, क्योंकि इससे यूक्रेन में अराजकता फैल सकती है, जो रूस के हित में होगी और ट्रंप की "शांतिदूत" के इमेज को नुकसान पहुंचाएगी. कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप का लक्ष्य युद्ध को जल्द खत्म करना है और इसके लिए वे काफी हद तक दबाव बनाकर यूक्रेन पर को मना चुके हैं.