अब 15 साल तक चलेंगे नोट! RBI करेगा 10 और 20 रुपए के पॉलिमर नोटों का ट्रायल

भारतीय रिजर्व बैंक ने 10 और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल का फैसला किया है जिसके तहत जारी किए जाएंगे एक-एक अरब नोट

एआइ से बनी तस्वीर

केंद्र सरकार ने पॉलिमर करेंसी नोट छापने के रिजर्व बैंक के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और इस दिशा में प्रक्रिया भी शुरू हो गई है. अभी प्रचलन में मौजूद कागजी नोट अपेक्षाकृत जल्दी खराब हो जाते हैं जिस वजह से उनकी बार-बार छपाई करनी पड़ती है जो कि खर्चीला काम है. इसके विपरीत पॉलिमर नोटों की उम्र करीब 15 साल तक मानी जाती है इसलिए लंबे समय में वे अधिक किफायती साबित हो सकते हैं.

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 27 जुलाई को संसद में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि सरकार ने पॉलिमर नोट जारी करने के भारतीय रिजर्व बैंक के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर रिजर्व बैंक ने 10 और 20 रुपए के पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल करने का फैसला किया है. इसके तहत 10 रुपये और 20 रुपये के एक-एक अरब नोट जारी किए जाएंगे. देश के अलग-अलग इलाकों में ट्रायल से इन पर पड़ने वाले प्रभाव की प्राथमिक जानकारी मिल सकेगी जिसके बाद ये नोट नियमित रूप से जारी हो सकेंगे.

रिजर्व बैंक ने अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा है कि पॉलिमर नोटों का जीवनकाल कागजी नोटों की तुलना में कई गुना अधिक होता है. हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पॉलिमर नोट लाने की प्रक्रिया भले शुरू कर दी गई है लेकिन कागजी नोटों को पूरी तरह पॉलिमर नोटों से बदलने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है और न ही इस पर रिजर्व बैंक में कोई मंथन हो रहा है.

नोटों की छपाई का काम देखने वाली भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने 17 जुलाई को सुरक्षा फीचर्स वाली पॉलिमर शीट्स की आपूर्ति के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी किया है यानी कंपनियों से सप्लाई के टेंडर्स आमंत्रित किए गए हैं.

BRBNMPL रिजर्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है जो नोटों के डिजाइन, छपाई और आपूर्ति का काम संभालती है. आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त तय की गई है. इसके बाद कंपनियों के भेजे गए पॉलिमर और सुरक्षा फीचर्स के सैंपल्स का परीक्षण किया जाएगा.

बैंकिंग विशेषज्ञ अश्विनी राणा के अनुसार, नोट छापने में रिजर्व बैंक को अच्छा खासा धन व्यय होता है. वे कहते हैं, "सामान्य कागजी नोटों की औसत उम्र पांच वर्ष या उससे कम होती है. यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि उनका उपयोग किस तरह होता है. तेल या धूल लगे हाथों से लगातार इस्तेमाल होने वाले नोट जल्दी खराब हो जाते हैं. पानी, नमी और धूप भी उनकी गुणवत्ता पर असर डालते हैं."

राणा बताते हैं कि पहले भी पॉलिमर नोट लाने की कोशिश हुई थी लेकिन बात नहीं बन सकी. उनका मानना है कि आने वाले समय में बड़े मूल्यवर्ग के नोट भी पॉलिमर से बने दिखेंगे. 

पॉलिमर नोटों की शुरुआती लागत कागजी नोटों से अधिक होती है लेकिन ये कागजी नोटों के मुकाबले ज्यादा चलते हैं. साथ ही इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर्स होने से नकली नोट बनाना कठिन होता है. इन पर पानी का भी उतना असर नहीं होता और जल्दी खराब नहीं होते.

दुनिया के कई देशों में पॉलिमर आधारित मुद्रा पहले से प्रचलन में है. कुछ देशों में पूरी तरह पॉलिमर नोट हैं जबकि कुछ जगह पॉलिमर में सिल्क, कुछ में पेपर मिक्स किया जाता है. भारत में भी इन नोटों को लाने का उद्देश्य मुद्रण लागत कम करना, नोटों की उम्र बढ़ाना और मुद्रा को अधिक सुरक्षित बनाना है.

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