क्रूड ऑयल 70 डॉलर पर फिर भी पेट्रोल-डीजल सस्ता क्यों नहीं हो रहा?

अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले से पहले भी क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर के आसपास ही था

जुलाई में अब तक भारत के लिए क्रूड ऑयल की औसत कीमत 67.7 डॉलर प्रति बैरल रही

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें गिरकर करीब 70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं. यह लगभग वही स्तर है, जहां पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले कीमतें थीं. इसके बाद केंद्र सरकार पर ईंधन की कीमतें घटाने का दबाव बढ़ रहा है.

विपक्षी कांग्रेस ने इस मुद्दे पर नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की है. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि जब संघर्ष के कारण क्रूड ऑयल की कीमत करीब 138 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी तब भारत में पेट्रोल की खुदरा कीमत 94.8 रुपए प्रति लीटर और डीजल की 87.7 रुपए प्रति लीटर थी. लेकिन अब क्रूड ऑयल की कीमत घटकर करीब 70 डॉलर प्रति बैरल रह गई है. इसके बावजूद पेट्रोल 102 रुपए प्रति लीटर और डीजल 95.2 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है.

3 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 71.8 डॉलर प्रति बैरल थी. जुलाई में भारत के लिए क्रूड ऑयल की औसत कीमत 67.7 डॉलर प्रति बैरल रही. जून में यह 83.2 डॉलर, मई में 106.2 डॉलर और अप्रैल में 114.5 डॉलर प्रति बैरल थी.

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें चार बार बढ़ाई थीं. इन बढ़ोतरी से कुल मिलाकर 7.50 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हुई. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसका कारण बताया था कि सरकारी तेल रिफाइनिंग और मार्केटिंग कंपनियां घाटे में चल रही थीं. उन्होंने क्रूड ऑयल की बढ़ी हुई कीमतों का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला था. 15 मई को केंद्र ने चार साल में पहली बार ईंधन की कीमतें 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ाई थीं. इसके बाद अगले कुछ दिनों में कई और बढ़ोतरी की गई.

रिपोर्ट के मुताबिक, कीमतें बढ़ाने की घोषणा से पहले इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था. तब अनुमान लगाया गया था कि 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी से हर महीने 4,400 करोड़ रुपए से थोड़ा अधिक अतिरिक्त राजस्व मिलेगा. लेकिन यह भी साफ था कि कीमतों में और बढ़ोतरी होगी. इसकी वजह यह थी कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का सिर्फ एक महीने का नुकसान ही 30,000 करोड़ रुपए से ज्यादा था.

अब जब क्रूड ऑयल की कीमतें गिर रही हैं तो उम्मीद है कि ईंधन की कीमतें भी कम होंगी. लेकिन केंद्र सरकार फिलहाल ऐसा करने के पक्ष में नहीं दिख रही. यह बात पुरी के बयान से भी साफ होती है. 2 जुलाई को उन्होंने कहा कि सिर्फ इसलिए कीमतों में कटौती की उम्मीद नहीं करनी चाहिए क्योंकि वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल के दाम घटे हैं. उनके मुताबिक, तेल कंपनियां अभी भी उस महंगे क्रूड ऑयल से रिफाइंड ईंधन बेच रही हैं, जिसे पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान खरीदा गया था.

पुरी के अनुसार, अप्रैल से जून की अवधि में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का वास्तविक नुकसान 74,781 करोड़ रुपए रहा. इसकी वजह यह थी कि उन्होंने कच्चा तेल ऊंची कीमत पर खरीदा था. उन्होंने कहा कि केंद्र कीमतों में कटौती पर फैसला लेने से पहले दो से तीन महीने इंतजार करना चाहता है.

केंद्र का यह भी तर्क है कि जिन तेल भंडारों से आज रिफाइनिंग की जा रही है, उन्हें पहले ही ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव आ सकता है.

हालांकि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता हुई है लेकिन क्षेत्र में स्थाई शांति के कोई ठोस संकेत अभी नहीं हैं. रिटेल ईंधन कीमतों में कटौती पर फैसला लेते समय मोदी सरकार के लिए यह भी एक अहम पहलू है.

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