छात्रों के समर्थन में राहुल गांधी का धरना, पुलिस हिरासत और कांग्रेस की पांच मांगें

जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ एकजुटता दिखाते हुए 21 जुलाई को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया. दिल्ली पुलिस ने बाद में इन सभी को हिरासत में ले लिया हालांकि करीब दो-तीन घंटे बाद सबको रिहा कर दिया गया

Congress leaders, including Rahul Gandhi, staged a sit-in protest outside the PM's residence. (File Photo: ITG)
प्रधानमंत्री आवास के बाहर से राहुल गांधी को हिरासत मे लेते हुए दिल्ली पुलिस

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सोमवार, 20 जुलाई को आयोजित 'संसद मार्च' के दौरान दिल्ली पुलिस और छात्रों के बीच कई जगहों पर झड़प हुई थी. इस दौरान दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए, जिन्हें दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया. इसके अगले दिन यानी 21 जुलाई की सुबह से ही घायलों से मिलने नेताओं का अस्पतालों में पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का दौरा किया. वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी RML अस्पताल में घायल छात्रों से मुलाकात की.

इस बीच 21 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों को उस समय और ताकत मिलती दिखी जब कांग्रेस पूरी तरह खुलकर उनके समर्थन में आई. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की अगुवाई में कांग्रेस के कई सांसदों और वरिष्ठ नेताओं ने नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग के बाहर धरना दिया. उन्होंने CJP के 'संसद मार्च' के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की.

धरना शुरू करने से पहले राहुल गांधी ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को भारत के हर परिवार पर 'हमला' बताते हुए X पर एक पोस्ट भी लिखी है.

कांग्रेस ने इस दौरान केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया. पार्टी ने अपनी पांच प्रमुख मांगें भी दोहराईं. इनमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, गृह मंत्री का संसद में बयान, दोनों सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा, छात्रों की चिंताओं को सुना जाना और सोमवार को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित हिंसा की जांच शामिल है.

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह राहुल गांधी से बातचीत करते हुए

इस बीच पीएमओ में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह राहुल गांधी से मिलने पहुंचे. उन्होंने कांग्रेस नेताओं से धरना खत्म करने की अपील की. बाद में उन्होंने कांग्रेस नेता पर निशाना साधते हुए X पर लिखा, "सरकार नीट और उससे जुड़े आंदोलन से जुड़े सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है. जबकि कांग्रेस पार्टी ने अब तक नियमों के तहत इस गंभीर मुद्दे पर औपचारिक चर्चा के लिए कोई नोटिस नहीं दिया है. श्री राहुल गांधी का व्यवहार लोकतंत्र के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है."

दिल्ली पुलिस राहुल गांधी को हिरासत में लेते हुए

बाद में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी लोक कल्याण मार्ग पहुंचे. हालांकि शाम को दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव सहित अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया. इन सभी को दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया. हालांकि कुछ देर बाद इन सभी को रिहा कर दिया गया. 

हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस बस में अखिलेश यादव

दिल्ली पुलिस की हिरासत से बाहर आने के बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी आवाज सुनने में कोई हर्ज नहीं है. प्रियंका ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ पिछले दिन बेहद गलत व्यवहार किया गया. उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि लोकतंत्र और देश युवाओं का है, इसलिए उन्हें विरोध करने का पूरा अधिकार है. प्रियंका गांधी ने कहा कि वह इन मुद्दों पर संसद में चर्चा चाहती हैं लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं है.

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का कहना था कि सरकार को छात्रों की मांगों पर सहमति जतानी चाहिए लेकिन वह ऐसा नहीं कर रही है. उन्होंने छात्रों के साथ हुए कथित व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें पीटा गया, उनके सिर फोड़े गए और उनकी हड्डियां तक तोड़ दी गईं. अखिलेश ने आरोप लगाया कि छात्राओं के कपड़े भी फाड़े गए. उन्होंने कहा कि जब प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, तब लोकतंत्र में किसी सरकार से इस तरह के बर्ताव की उम्मीद नहीं की जाती. अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को सदन में उठाएगी.

इधर BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने को लेकर राहुल गांधी को निशाने पर लिया है. उन्होंने कहा है,  "मेरा मानना ​​है कि लोकतंत्र में असहमति और अराजकता अलग-अलग बातें हैं. जब मर्यादा की सीमा पार कर जाती है, तो वह अराजकता में बदल जाती है. अब राहुल गांधी अराजकता का प्रतीक बन गए हैं. संसदीय जीवन में कुछ पद ऐसे होते हैं जो किसी खास पार्टी के नहीं होते. प्रधानमंत्री सिर्फ एक पार्टी के नेता नहीं होते, बल्कि 140 करोड़ नागरिकों के चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं."

जंतर-मंतर पर नेताओं का पहुंचना जारी

इस बीच CJP के प्रदर्शनकारी अभी भी जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं और कई दलों के नेता उनसे मिलने पहुंच रहे हैं. 21 जुलाई की दोपहर को आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने धरना स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के पास कुछ नहीं था, लेकिन इसके बावजूद उन पर लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और पत्थर फेंके गए. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी प्रदर्शनकारियों को कानूनी समेत हर संभव मदद देगी.

NCP (CS) के नेता शरद पवार भी मंगलवार को जंतर-मंतर पहुंचे. CJP के मुताबिक, पवार ने 'संसद मार्च' के दौरान दिल्ली पुलिस की 'बर्बर हिंसा' के बाद प्रदर्शनकारियों का हालचाल जाना. उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने धरना स्थल पर पहुंचीं. रात को शिवसेना (UBT) के नेता उद्धव ठाकरे भी धरना स्थल पहुंचे.

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