बैंकों की तिजोरी में कैसे पहुंच रहे नकली नोट?
सहारनपुर के PNB करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपये के नकली 500 के नोट मिलने से बैंकिंग सिस्टम पर सवाल उठे हैं. जांच अब इस बात की हो रही है कि बैंक की तिजोरी में नकली नोटों की एंट्री कैसे हुई और असली करेंसी कहां गायब हुई

नकली नोटों के नेटवर्क का पता लगाने के लिए SIT गठित की गई है (सांकेतिक फोटो)
सहारनपुर के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपए के नकली 500 के नोट मिलने से बैंकिंग सिस्टम में खलबली मच गई है. सोफिया मार्केट स्थित चेस्ट में हुई करेंसी की जांच में करीब 340 बंडल नकली नोट मिले हैं. शुरुआत में यह रकम 7.40 करोड़ रुपए आंकी गई थी.
लेकिन ऑडिट और वेरिफिकेशन आगे बढ़ने के साथ नकली करेंसी करीब 17 करोड़ रुपए तक पहुंच गई. ज्यादातर नोट नए बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ पुराने नोट भी मिले हैं. मामले की जांच अब सिर्फ चेस्ट में मिले नकली नोटों तक सीमित नहीं है.
पुलिस, PNB और RBI यह पता लगाने में जुटे हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंची, असली नोट कहां गए और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क है. पुलिस ने सात सदस्यीय एसआइटी गठित की है, जबकि RBI और PNB मुख्यालय की 21 सदस्यीय संयुक्त टीम करेंसी और रिकॉर्ड की जांच कर रही है.
कैसे खुला नकली नोटों का राज
मामला पांच अगस्त को उस समय खुला जब सहारनपुर के घंटाघर स्थित PNB शाखा से जयपुर के RBI करेंसी चेस्ट में भेजी गई. जयपुर में गिनती के दौरान 4,30,900 रुपए कम मिले. सूचना मिलने के बाद PNB मेरठ के चीफ मैनेजर और नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे को सहारनपुर भेजा गया.
चेस्ट के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और नौ अगस्त से करेंसी का विस्तृत ऑडिट शुरू हुआ. पहले 148 बंडल नकली मिले. हर बंडल में 500 रुपए के एक हजार नोट थे. इस हिसाब से नकली करेंसी 7.40 करोड़ रुपए निकली.
बाद में ऑडिट आगे बढ़ा तो नकली नोटों का मूल्य करीब 17 करोड़ रुपए हो गया. ऑडिट के दौरान 23 मशीनों से नोटों की जांच की गई और हर नोट के सीरियल नंबर का मिलान किया गया. ऑडिट टीम के अधिकारी अरुण कुमार चौबे ने बताया कि प्रत्येक नोट की गहनता से जांच की गई और RBI से नोटों की डिटेल तथा सीरियल नंबर मांगे गए हैं.
लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम) नवनीत शर्मा के मुताबिक सभी नकली नोट 500 रुपए के हैं और इनके करीब 340 बंडल मिले हैं. बैंक के मुताबिक 500 रुपए के एक बंडल में पांच लाख रुपए होते हैं.
सीसीटीवी में क्या दिखा
जांच में करेंसी चेस्ट का सीसीटीवी फुटेज अहम कड़ी बन गया है. शुरुआती जांच में पार्ट-टाइम हाउसकीपर विशाल कुमार को करेंसी बंडलों से नोट निकालते हुए दिखने की बात सामने आई है. उसे जयपुर भेजी जाने वाली करीब 11.50 करोड़ रुपए की करेंसी के बंडल व्यवस्थित करने का काम दिया गया था.
फुटेज सामने आने के बाद PNB ने उसे काम से हटा दिया. बैंक की शिकायत पर उसे भी आरोपी बनाया गया. अब पुलिस यह पता लगा रही है कि जिन बंडलों से कथित तौर पर असली नोट निकाले गए, वे नोट कहां गए और उनकी जगह नकली नोट कैसे पहुंचे. जांच की कड़ी तीन बैंक अधिकारियों तक भी पहुंची.
PNB ने वरिष्ठ मंडल प्रबंधक कार्यालय के रवि कुमार कंसाय, सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट के प्रबंधक सुशील कुमार शर्मा और यमुनानगर-जगाधरी के खेड़ा बाजार करेंसी चेस्ट के प्रबंधक अमित कुमार को निलंबित किया है.
तीनों से चेस्ट में नकली करेंसी की मौजूदगी और कैश के आने, रखने तथा भेजने की प्रक्रिया को लेकर पूछताछ की गई. जांच अधिकारियों के मुताबिक वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके. इसके बाद बैंक ने विभागीय जांच शुरू की और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई.
पुलिस अब तीनों अधिकारियों की ड्यूटी, चेस्ट तक पहुंच, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और कैश एक्सेस रिकॉर्ड की जांच कर रही है. यह भी देखा जा रहा है कि हाउसकीपर अकेले बंडलों तक पहुंच रहा था या उसे किसी अन्य कर्मचारी का सहयोग था
नोट बदलने का शक
चेस्ट में मिले नकली नोटों में ज्यादातर नए बताए जा रहे हैं. कुछ पुराने 500 रुपए के नकली नोट भी मिले हैं. यही मिश्रण जांच को लंबा कर रहा है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पुराने नकली नोट कब से चेस्ट में थे और क्या नकली करेंसी अलग-अलग समय पर बैंकिंग चैनल में डाली जाती रही.
जांच में यह आशंका भी सामने आई है कि RBI से चेस्ट में पहुंचने वाले नए नोटों की फोटो कॉपी या प्रिंट तैयार कर उनके जैसे दिखने वाले नकली नोट बनाए गए. इसके बाद इन्हें असली करेंसी के साथ चेस्ट में शामिल किए जाने की आशंका है. फिलहाल यह जांच का हिस्सा है और इसकी पुष्टि होना बाकी है.
पुलिस यह भी देख रही है कि असली नोटों को चेस्ट से कब और किस तरीके से बाहर निकाला गया. इसके लिए नोटों के सीरियल नंबर, बंडल, कैश मूवमेंट और सीसीटीवी फुटेज का मिलान किया जा रहा है.
जांच का एक अहम सवाल यह भी है कि नकली नोट सीधे चेस्ट में पहुंचे या अलग-अलग शाखाओं के जरिए वहां जमा हुए. इसी के लिए चेस्ट में आने वाली करेंसी और उससे जुड़े बैंकिंग रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है.
हर खेप के रिकॉर्ड पर नजर
RBI से करेंसी चेस्ट के लिए भेजी जाने वाली नई करेंसी सील्ड लोहे के बाक्स में भेजी जाती है. सेवानिवृत्त बैंक अधिकारियों के मुताबिक बाक्स पर ताले होते हैं और उनकी चाबियों की व्यवस्था अलग-अलग रहती है. एक चाबी करेंसी के साथ भेजी जाती है, जबकि दूसरी संबंधित करेंसी चेस्ट को दी जाती है.
नई करेंसी की खेप के साथ एक या दो अधिकारी भी आते हैं. वे करेंसी को सीधे संबंधित चेस्ट तक पहुंचाते हैं. वहां अधिकृत अधिकारी को नकदी की सुपुर्दगी होती है और उससे जुड़े दस्तावेज तैयार किए जाते हैं.
इसी प्रक्रिया को देखते हुए RBI और PNB की संयुक्त टीम अब चेस्ट में आने वाली करेंसी की खेपों का रिकॉर्ड खंगाल रही है. किस तारीख को कितनी करेंसी आई, किस मूल्यवर्ग के नोट आए, किसने उन्हें रिसीव किया और उसके बाद उनका इस्तेमाल या स्थानांतरण कैसे हुआ, इसकी जांच की जा रही है.
31 अगस्त को डीआईजी अभिषेक सिंह, जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान और एसएसपी अभिनंदन सिंह ने सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट का दौरा किया. अधिकारियों ने कैश हैंडलिंग और करेंसी मूवमेंट से जुड़े रिकॉर्ड देखे. RBI के अधिकारी भी चेस्ट की जांच और बैंक कर्मचारियों से पूछताछ कर चुके हैं. PNB मुख्यालय की अलग टीम विभागीय जांच कर रही है.
हरियाणा-उत्तराखंड तक जांच
नकली नोटों के स्रोत और नेटवर्क का पता लगाने के लिए पुलिस ने सात सदस्यीय एसआईटी बनाई है. एसएसपी अभिनंदन के मुताबिक टीम नकली नोटों के स्रोत, सप्लाई, खपत और मामले में शामिल लोगों की भूमिका की जांच करेगी.
जांच अब हरियाणा, उत्तराखंड और आसपास के जिलों तक पहुंच गई है. नामजद बैंक अधिकारियों में दो के यमुनानगर क्षेत्र के रहने की बात सामने आई है. पुलिस उनके स्थानीय संपर्कों और गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है. संभावित ठिकानों पर दबिश के साथ मोबाइल लोकेशन भी खंगाली जा रही है.
पुलिस बैंकिंग रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, कैश एक्सेस लॉग और करेंसी भेजने से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही है. जांच सिर्फ चार नामजद आरोपियों तक सीमित नहीं है. रिकॉर्ड में किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका सामने आने पर उससे भी पूछताछ की जाएगी.
इस बीच मेरठ जोन की सभी करेंसी चेस्ट को अलर्ट किया गया है. बैंकों को कैश की जांच, नोटों की छंटाई और संदिग्ध करेंसी की पहचान में अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं. सहारनपुर की करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ रुपए के नकली नोटों का मिलना अब इस सवाल का जवाब मांग रहा है कि बैंक की तिजोरी तक पहुंचने से पहले करेंसी की किस कड़ी पर सेंध लगी.
जांच एजेंसियां फिलहाल असली नोटों की निकासी, नकली नोटों की एंट्री और दोनों के बीच की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी हैं.