ओवैसी SIR को 'बैकडोर NRC' क्यों बता रहे?
'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ' में असदुद्दीन ओवैसी ने SIR, मुसलमानों के अधिकार, समान नागरिक संहिता और BJP-RSS की राजनीति पर खुलकर अपनी बात रखी

तेज-तर्रार नेता और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने 29 सितंबर को कोच्चि में 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ' के मंच से अपनी बात रखी. उन्होंने भारतीय गणराज्य और उसे चलाने वाली राजनीतिक पार्टियों के बीच के बड़े अंतर पर बात की. उनके मुताबिक संविधान बनाने वालों ने जिस भारत की कल्पना की थी वह मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से काफी अलग है.
हैदराबाद से लोकसभा सांसद ओवैसी ने कहा, "हमारे संविधान निर्माताओं ने हमें ऐसा संविधान दिया, जिसमें कहा गया है कि इस देश का कोई धर्म नहीं होगा. यह सभी धर्मों का सम्मान करेगा और जो लोग किसी भगवान में विश्वास नहीं करते, उनका भी सम्मान किया जाएगा."
उन्होंने ऑडियंस को याद दिलाया कि बी.आर. आंबेडकर ने संविधान में समानता का अधिकार और अनुच्छेद 13, 25, 26 और 29 शामिल किए थे. ये मौलिक अधिकार हर नागरिक को समान स्वतंत्रता देते हैं.
लेकिन ओवैसी के मुताबिक, भारत पर शासन करने वाली पार्टियों ने इस समझौते का सम्मान नहीं किया. उन्होंने आरोप लगाया कि इन पार्टियों ने "अल्पसंख्यकों, खासकर मुस्लिम समुदाय को पूरी तरह हाशिए पर डाल दिया" उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर किया, उनकी शिक्षा को पीछे रखा और उन्हें राजनीतिक न्याय से वंचित किया.
कॉन्क्लेव के इस सत्र का नाम था ‘अल्पसंख्यक रिपोर्ट: भारत में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करने की राजनीति’. ओवैसी ने अपनी बात को देश के खिलाफ किसी विवाद के तौर पर पेश करने से इनकार किया.
उन्होंने कहा, "मेरे दादा ने एक चुनाव किया था जो सही फैसला था कि हम भारत में ही रहेंगे. हम दो राष्ट्र के सिद्धांत में विश्वास नहीं करते थे. हमें संविधान पर भरोसा था. हमें सभी गारंटियों, मौलिक अधिकारों और किए गए सभी वादों पर भरोसा था."
उनके मुताबिक, समस्या उस फैसले के बाद शुरू हुई. जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक सत्ता में आई राजनीतिक पार्टियों के दौर में मुसलमानों को समान अधिकार वाले नागरिक के बजाय ‘सिर्फ वोटर’ बना दिया गया.
ओवैसी ने कुछ आंकड़े भी रखे. उनके मुताबिक भारत की आबादी में करीब 14 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाला मुस्लिम समुदाय लोकसभा में करीब 4 फीसदी प्रतिनिधित्व तक सिमट गया है जो "हर चीज के सबसे निचले स्तर" को दिखाता है.
ओवैसी ने इस मामले को सिर्फ दो विकल्पों के बीच की लड़ाई मानने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने "दो बुराइयों में से कम बुरी" को चुना क्योंकि उनके पास कोई तीसरा विकल्प नहीं था.
उनके मुताबिक, BJP और RSS मुसलमानों को आज भी आंतरिक खतरे के तौर पर देखते हैं. उन्होंने कहा कि RSS के दूसरे सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर और उनकी किताब ‘बंच ऑफ थॉट्स’ का असर आज भी बना हुआ है.
उन्होंने कहा कि मौजूदा संघ प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में कहा था कि जो हिंदू मुसलमानों को देश से बाहर करना चाहता है, वह हिंदू नहीं है. लेकिन इसके बावजूद स्थिति नहीं बदली.
ओवैसी ने दावा किया कि भागवत की यह टिप्पणी अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता पर आई प्रतिकूल रिपोर्ट के मद्देनजर कूटनीति का हिस्सा थी. जमीन पर विध्वंस, मॉब लिंचिंग, वक्फ कानून में संशोधन और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA जैसे कड़े कानूनों का इस्तेमाल जारी रहा.
ओवैसी के मुताबिक, कांग्रेस और उसके सहयोगियों का रिकॉर्ड भी बहुत अलग नहीं रहा. उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्ष पार्टियां मुसलमानों को इफ्तार और दरगाह में तो चाहती हैं लेकिन मंत्रिमंडल में नहीं.
उन्होंने कहा, "हम सिर्फ इफ्तार पार्टी के समय महत्वपूर्ण होते हैं. मैं 14 घंटे रोजा रखता हूं और जब कांग्रेस का कोई हिंदू नेता आता है तो मैं उसका मुंह खोलकर उसमें खजूर डालूं और फिर अपना रोजा खोलूं. ऐसा नहीं हो सकता."
ओवैसी ने सवाल किया कि कांग्रेस केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के साथ रह सकती है लेकिन कहीं और AIMIM से सिर्फ इसलिए दूरी क्यों रखती है कि उसे ‘हिंदू विरोधी’ न समझ लिया जाए.
2014, 2019 और 2024 के आम चुनावों के नतीजों के लिए AIMIM को जिम्मेदार ठहराने को उन्होंने आसान तर्क बताया. ओवैसी का कहना था कि उन्होंने इतनी ज्यादा सीटों पर चुनाव ही नहीं लड़ा था कि नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनवा सकें.
उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों को लेकर ओवैसी ने बातचीत की गुंजाइश भी रखी, लेकिन अपनी चेतावनी भी दोहराई. AIMIM ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे के लिए बातचीत की पहल की है लेकिन कोई आगे नहीं आया.
उन्होंने कहा, "प्यार और चुनावी गठबंधन में जबरदस्ती का गठबंधन नहीं हो सकता. और यह एकतरफा भी नहीं हो सकता." उन्होंने कहा कि अगर ये पार्टियां मना करती हैं तो AIMIM फिर भी चुनाव लड़ेगी.
ओवैसी ने कहा कि हिंदुत्व को रोकने के लिए सिर्फ मुस्लिम वोट नहीं, बल्कि ‘बौद्धिक ईमानदारी’ की जरूरत है. उन्होंने बिहार का उदाहरण दिया. उनके मुताबिक, INDIA ब्लॉक ने उनके चार विधायकों को अपने साथ लिया फिर भी AIMIM ने पांच सीटें जीतीं. जहां पार्टी हारी, वहां भी उसे 13,000-14,000 वोट मिले.
ओवैसी ने कहा कि AIMIM धर्मनिरपेक्ष है क्योंकि चुनाव आयोग (EC) ने उसे पंजीकृत किया है. हालांकि उन्होंने BJP के लिए यही बात मानने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है.
उनके मुताबिक, जो पार्टी कपड़ों के आधार पर नागरिकों में फर्क करती है, मॉब लिंचिंग और मस्जिदों के विध्वंस को नहीं रोकती, वह दक्षिणपंथी परियोजना का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि ऐसी राजनीति के केंद्र में RSS है. उनके मुताबिक, "एक हजार से ज्यादा मस्जिदों" का विध्वंस हो चुका है, वक्फ कानून संपत्ति पर कब्जे के लिए बनाया गया है और UAPA को और सख्त किया जा रहा है.
ओवैसी ने कहा कि जब मस्जिदें गिराई जाती हैं, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे जाते हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ पूजा स्थलों पर कब्जा किया जाता है, तो "मैं पहले ही बड़ी मुश्किल में हूं. मैं गहरी खाई के किनारे खड़ा हूं."
ओवैसी ने कहा कि उन्हें Gen Z से चिंता नहीं है. उनका दावा था कि उनकी सभाओं में युवा बिना किराए की बसों के पहुंचते हैं. वे BJP को हराना चाहते हैं लेकिन सिर्फ वोटर बनकर नहीं रहना चाहते.
ओवैसी की सबसे तीखी टिप्पणी SIR को लेकर थी. उन्होंने आरोप लगाया, "यह बैकडोर NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) है." उनके मुताबिक, SIR में मतदाता से यह साबित करने को कहा जा रहा है कि उसके माता-पिता या दादा-दादी 2003 में कहां रहते थे, किस घर में रहते थे, किस गांव में, किस विधानसभा क्षेत्र में और उनका नाम किस स्पेलिंग के साथ दर्ज था.
इसके बाद उसे गुहार लगानी होगी कि उसका नाम ड्राफ्ट सूची में बना रहे. फिर ‘अनमैप्ड’ दस्तावेजों को लेकर नोटिस और उन 12 दस्तावेजों की मांग का सामना करना पड़ सकता है जो गरीबों के पास नहीं हैं.
ओवैसी ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही NRC का वादा कर चुके हैं. उन्होंने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 3.3 करोड़ लोगों को दस्तावेजों के पीछे दौड़ना पड़ा, करीब 19 लाख नाम सूची में नहीं आए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक और सूची चाहते थे और मुमताज बेगम को बांग्लादेश भेज दिया गया. बाद में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उनके पति को मुआवजा देने का आदेश दिया.
ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग नहीं की. उन्होंने कहा कि कुमार अमित शाह की ओर से नियुक्त किए गए हैं और वे नहीं जाएंगे.
जब विपक्ष के काफी सदस्यों के निलंबन के बीच CEC की नियुक्ति से जुड़ा कानून पारित किया गया था तब ओवैसी ने संसद में चेतावनी दी थी कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता कम होगी. उन्होंने कहा, "मेरी मांग है कि SIR को खत्म किया जाए."
ओवैसी ने समान नागरिक संहिता की अवधारणा को नए रूप में पेश किए गए हिंदू पर्सनल लॉ के समान बताया. उन्होंने कहा, "एकरूपता या समानता, बराबरी के समान नहीं है." उनके मुताबिक, मुस्लिम विवाह दो बराबर लोगों के बीच एक अनुबंध है. उनका दावा था कि उत्तराखंड, असम और गुजरात की संहिताएं हिंदू विवाह, उत्तराधिकार और तलाक कानूनों जैसी हैं.
ओवैसी ने चेतावनी दी कि केवल आबादी के आधार पर परिसीमन हुआ तो 850 सीटों वाली लोकसभा में दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व घटकर करीब 20 फीसदी रह जाएगा और उत्तर भारत के हिस्से में 400-450 सीटें आ जाएंगी.
उन्होंने जम्मू-कश्मीर और असम का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे वहां की तरह निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में इस तरह बदलाव किया जा सकता है कि मुस्लिम बहुल सीटों की संख्या कम हो जाए.
ओवैसी ने कहा कि BJP मुसलमानों को लगभग कोई टिकट नहीं देती. दूसरी पार्टियां सिर्फ उनका वोट चाहती हैं. उन्होंने सवाल किया, "मेरी राजनीतिक आवाज कहां है? मेरी राजनीतिक भूमिका कहां है?"
उनका कहना था कि मुसलमानों से कहा जाता है कि वोट दो, चुप रहो और बुलडोजर का सामना करो. फिर चुनाव के समय उन्हीं पार्टियों के लिए 'धर्मनिरपेक्षता जिंदाबाद' के नारे लगाने को कहा जाता है जिन्होंने उन्हें हाशिए पर रखा है.
सत्र की प्रमुख बातें
असदुद्दीन ओवैसी :
- "मेरे दादा ने एक फैसला लिया था, जो सही फैसला था कि हम भारत में ही रहेंगे. हम दो राष्ट्र के सिद्धांत में विश्वास नहीं करते थे. हमें संविधान पर भरोसा था. हमें सभी गारंटियों, मौलिक अधिकारों और किए गए सभी वादों पर भरोसा था."
- "मुसलमानों ने हमेशा दो बुराइयों में से कम बुरी को चुना है. उनके पास कोई दूसरा व्यवहारिक विकल्प नहीं था."
- "हम सिर्फ इफ्तार पार्टी के समय महत्वपूर्ण होते हैं. मैं 14 घंटे रोजा रखता हूं और जब कांग्रेस का कोई हिंदू नेता आता है तो मैं उसका मुंह खोलकर उसमें खजूर डालूं और फिर अपना रोजा खोलूं. ऐसा नहीं हो सकता."
- "यह (SIR) NRC है. यह बैकडोर NRC है. यह सरकार और चुनाव आयोग SIR की बात करते हैं. आपको वे 12 दस्तावेज देने होंगे. और अगर मैं वे 12 दस्तावेज दे भी दूं तो हमें नहीं पता कि वहां मौजूद उस महान ERO (निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी) के साथ क्या होगा. जब मैं जनप्रतिनिधित्व कानून पढ़ता हूं तो उसमें 'अनॉमली' शब्द कहां है?"
- "प्यार और चुनावी गठबंधन में जबरदस्ती का गठबंधन नहीं हो सकता. और यह एकतरफा भी नहीं हो सकता."