फुकेत-दिल्ली फ्लाइट में गड़बड़ी : एयर इंडिया की जांच कहां अटकी?
शुरुआती जांच रिपोर्ट यह स्पष्ट नहीं करती कि 4 अगस्त को फुकेत-दिल्ली फ्लाइट के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में दबाव क्यों चला गया और विमान की ऊंचाई में अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई

इस फ्लाइट की गड़बड़ी में कुल 24 लोग घायल हुए थे (सांकेतिक फोटो)
4 अगस्त को एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट की ऊंचाई में अचानक आई गिरावट की शुरुआती जांच में पता चला है कि 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान के दौरान विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में कुछ समय के लिए दबाव खत्म हो गया था.
इसके बाद ऑटोपायलट बंद हो गया और एयरबस ए320 की ऊंचाई में बड़ा बदलाव आया. विमान के कमांडर पायलट का ड्रग्स के लिए किया गया टेस्ट ‘नॉन-नेगेटिव’ आया है. एयर इंडिया ने 4 सितंबर को उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं.
इन निष्कर्षों से सुरक्षा से जुड़े दो सवाल उठते हैं. पहला, फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम में अचानक आई तकनीकी खराबी की वजह क्या थी. दूसरा, क्या कैप्टन इस उड़ान की कमान संभालने के लिए सुरक्षित रूप से फिट थे. हालांकि, अब तक सरकार के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने ड्रग्स के टेस्ट के नतीजे और हाइड्रोलिक सिस्टम की खराबी या इसके कारण विमान की ऊंचाई में आई गिरावट के बीच कोई संबंध स्थापित नहीं किया है.
रिपोर्ट में विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को ड्रग्स के उपयोग के संबंध में कार्रवाई की अलग से सिफारिश की गई है. साथ ही कहा गया है कि विमान की ऊंचाई में गिरावट की तकनीकी वजह की जांच अभी जारी है.
यह घटना एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में हुई थी और इसमें 24 लोग घायल हुए थे. विमान में 137 यात्री और आठ क्रू मेंबर सवार थे. ऊंचाई में अचानक बदलाव के समय विमान कोलकाता फ्लाइट इंफॉर्मेशन क्षेत्र के ऊपर 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था. घायल 20 यात्रियों और चालक दल के चार सदस्यों को दिल्ली पहुंचने के बाद इलाज की जरूरत पड़ी. इनमें से चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे.
शुरुआत में इस घटना को टर्बुलेंस का नतीजा बताया गया था लेकिन जांच अब विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम पर केंद्रित है. शुरुआती रिपोर्ट में यह बताया गया है कि विमान की ऊंचाई अचानक कैसे कम हुई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ऐसा क्यों हुआ. विमान में दर्ज घटनाक्रम के मुताबिक, हाइड्रोलिक दबाव कम होते ही ऑटोपायलट बंद हो गया. इसके बाद कुछ समय के लिए स्टॉल चेतावनी (पायलट को खतरे का संकेत देने वाली प्रणाली) सक्रिय हुई और विमान अपनी निर्धारित ऊंचाई से नीचे आ गया.
जांचकर्ता अभी यह पता नहीं लगा पाए हैं कि हाइड्रोलिक सिस्टम का दबाव क्यों खत्म हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक, 04:02:43 UTC पर विमान के फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम ने ग्रीन हाइड्रोलिक सिस्टम में दबाव खत्म होने की जानकारी दर्ज की. चार सेकंड बाद ब्लू और येलो सिस्टम का दबाव भी खत्म हो गया.
रिपोर्ट में कहा गया, “04:02:48 UTC पर ऑटोपायलट बंद हो गया और लगातार दोहराई जाने वाली घंटी (CRC) सुनाई दी.” इसके तीन सेकंड बाद स्टॉल चेतावनी सक्रिय हुई. शुरुआत में को-पायलट ने स्थिति को संभाला. इसके बाद कैप्टन ने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया. रिपोर्ट के मुताबिक, विमान अपनी निर्धारित ऊंचाई से 372 फीट ऊपर गया और फिर 292 फीट नीचे आया.
हालांकि हाइड्रोलिक सिस्टम की खराबी लंबे समय तक नहीं रही. रिपोर्ट में कहा गया, “लगभग 04:02:52 UTC पर ब्लू हाइड्रोलिक सिस्टम फिर से काम करने लगा और कुछ सेकंड बाद येलो और ग्रीन हाइड्रोलिक सिस्टम भी बहाल हो गए.” इसके बाद विमान के फ्लाइट-कंट्रोल हिस्से सामान्य स्थिति में लौट आए और विमान फिर सामान्य रूप से उड़ने लगा.
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ए320 में तीन हाइड्रोलिक सिस्टम होते हैं, जिन्हें ग्रीन, ब्लू और येलो के नाम से जाना जाता है. विमान के फ्लाइट कंट्रोल जैसी जरूरी प्रणालियों के लिए दबाव पैदा करने में इनकी अहम भूमिका होती है. जांचकर्ताओं ने विमान से संबंधित हाइड्रोलिक हिस्से निकालकर विश्लेषण के लिए भेजे हैं.
28 जुलाई से यह विमान फुकेत से उड़ान भर रहा था और इसका पावर ट्रांसफर यूनिट (PTU) न्यूनतम उपकरण सूची (MEL) के तहत था. यानी विमान की कुछ प्रणालियां और उपकरण अस्थायी तौर पर काम नहीं कर रहे थे. PTU ग्रीन या येलो हाइड्रोलिक सिस्टम को अतिरिक्त दबाव दे सकता है. हालांकि, शुरुआती रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया है कि हाइड्रोलिक दबाव खत्म होने की वजह PTU की कोई समस्या थी.
जांच के नतीजे टर्बुलेंस के बारे में घटना के शुरुआती विवरण से भी अलग तस्वीर पेश करते हैं. रिपोर्ट में कहा गया, “फ्लाइट क्रू और हवाई यातायात नियंत्रण (ATC) की ओर से खराब मौसम की कोई सूचना नहीं दी गई थी.”
इस बीच, कैप्टन के ड्रग टेस्ट के नतीजे ने सुरक्षा जांच के सामने एक और पहलू खोल दिया है. दिल्ली में उतरने के बाद दोनों पायलटों की सांस की जांच और ड्रग्स के लिए टेस्ट किए गए थे. सांस की जांच के नतीजे संतोषजनक रहे. को-पायलट का टेस्ट नेगेटिव आया, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक कमांडर पायलट के शुरुआती और पुष्टि करने वाले दोनों टेस्ट में ‘नॉन-नेगेटिव’ नतीजा आया.
इसके बाद विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने सिफारिश की है कि “DGCA ड्रग्स का उपयोग रोकने के लिए जो भी उचित हो, वह कार्रवाई करे”, क्योंकि चालक दल के एक सदस्य का टेस्ट नॉन-नेगेटिव आया है.
नॉन-नेगेटिव टेस्ट का नतीजा यह संकेत नहीं देता कि घटना के लिए कैप्टन जिम्मेदार थे. शुरुआती जांच रिपोर्ट में हाइड्रोलिक दबाव खत्म होने की वजहों में पायलट की कार्रवाई को शामिल नहीं किया गया है. AAIB ने कहा है कि वह ‘तकनीकी और अन्य पहलुओं’ की जांच जारी रखे हुए है.
एयर इंडिया ने 4 अगस्त की घटना के बाद शुरुआती रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह जांच में ‘पूरा सहयोग’ कर रही है और जांचकर्ताओं को संबंधित परिचालन, रखरखाव और तकनीकी रिकॉर्ड उपलब्ध करा रही है. एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, “सुरक्षा एयर इंडिया की सर्वोच्च प्राथमिकता है. हमारे पायलट लागू राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक कड़े प्रशिक्षण, नियमित दक्षता जांच, मेडिकल जांच और अन्य नियामकीय आकलनों से गुजरते हैं.”
एयरलाइन ने कहा कि 4 अगस्त की घटना के बाद उसने अतिरिक्त सुरक्षा उपाय के तौर पर अपने सभी पायलटों की स्वेच्छा से जांच शुरू कर दी है. प्रवक्ता ने कहा, “एयरलाइन सुरक्षा, फिटनेस या नियामकीय जरूरतों के किसी भी उल्लंघन को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति रखती है और जहां जरूरी होगा, उचित कार्रवाई करेगी.” उन्होंने कहा कि जांच से सामने आने वाली सिफारिशों को लागू किया जाएगा.
यह घटना एयर इंडिया के लिए ऐसे महत्वपूर्ण समय में हुई है जब एयरलाइन अपने बेड़े और परिचालन के व्यापक आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही है. हर घटना अपने होने और जांच के लिहाज से अलग होती है, लेकिन जून 2025 में अहमदाबाद से उड़ान भरने के तुरंत बाद एयर इंडिया के बोइंग 787 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद से एयरलाइन पर नियामकीय और सार्वजनिक निगरानी बढ़ी है.
ए320 मामले में जांचकर्ता हाइड्रोलिक हिस्सों और तरल पदार्थ के नमूनों, फ्लाइट-रिकॉर्डर के आंकड़ों, रखरखाव और परिचालन रिकॉर्ड और अन्य सबूतों की जांच कर रहे हैं. जांच में एयरबस के विशेषज्ञों ने विमान का तकनीकी निरीक्षण भी किया है.
मुख्य सवाल अब भी यही है कि आखिर हाइड्रोलिक सिस्टम में दबाव सबसे पहले क्यों खत्म हुआ. सिस्टम कुछ ही सेकंड में बहाल हो गए और फ्लाइट-कंट्रोल की सामान्य स्थिति भी लौट आई लेकिन शुरुआती रिपोर्ट यह तय नहीं करती कि खराबी की वजह क्या थी.
यह पता लगाना कि घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा, 4 अगस्त को 36,000 फीट की ऊंचाई पर AI2379 के साथ वास्तव में क्या हुआ, इसे समझने का एक अहम हिस्सा होगा.