AI के दौर में कंपनियां युवाओं से क्या चाहती हैं?
कॉग्निजेंट के ग्लोबल ऑपरेशंस के प्रेसिडेंट राजेश वारियर के मुताबिक, AI के दौर में सिर्फ तकनीकी ज्ञान काफी नहीं, कंपनियां समस्या सुलझाने, क्रिएटिविटी, कम्युनिकेशन और बिजनेस की समझ रखने वाले युवाओं को तरजीह दे रही हैं

पांच साल पहले तक रोजगार के लिए किसी व्यक्ति की योग्यता का आकलन मुख्य रूप से उसके शैक्षणिक ज्ञान, परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता और नई चीजें सीखने की योग्यता के आधार पर किया जाता था.
आज जब हर कारोबार तेजी से तकनीक आधारित हो रहा है और AI आसानी से उपलब्ध है, कंपनियां ऐसे ग्रेजुएट्स की तलाश कर रही हैं जिनके पास अपने क्षेत्र का मजबूत ज्ञान, तकनीक की अच्छी समझ और अपनी सीख को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने की क्षमता हो.
कॉग्निजेंट इंडिया के अध्यक्ष-वैश्विक संचालन और अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राजेश वारियर के मुताबिक, ऐसे में सबसे सफल पेशेवर वही होंगे, जो AI और डिजिटल दक्षता के साथ समस्या सुलझाने की क्षमता, रचनात्मकता, संवाद कौशल और कारोबार की समझ को जोड़ सकें.
वारियर कहते हैं, "भारत मजबूत स्थिति में है लेकिन इस बढ़त को बनाए रखने के लिए कौशल विकास, परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता और जीवनभर सीखते रहने के प्रति लगातार प्रतिबद्धता जरूरी होगी." उनके मुताबिक, आज तैयार रहने का मतलब लगातार सीखने, तेजी से बदलाव के अनुसार खुद को ढालने और AI के साथ प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता है.
कॉलेजों से निकलने वाले छात्रों और कंपनियों की जरूरतों के बीच सबसे बड़े अंतर के बारे में वारियर कहते हैं कि तकनीक में तेजी से हो रहे बदलाव के कारण शिक्षा जगत के लिए उद्योग जगत की गति के साथ कदम मिलाना लगातार मुश्किल हो रहा है. क्लास में होने वाली पढ़ाई और कार्यस्थल पर उसके इस्तेमाल के बीच संबंध को मजबूत करने की जरूरत है.
वे कहते हैं कि कई ग्रेजुएट्स के पास मजबूत सैद्धांतिक ज्ञान होता है लेकिन कंपनियों को ऐसे लोगों की जरूरत बढ़ रही है जो जटिल समस्याओं का समाधान कर सकें, अलग-अलग क्षेत्रों के बीच तालमेल बनाकर काम कर सकें, प्रभावी ढंग से संवाद कर सकें और लगातार नए कौशल सीखते रहें.
वारियर कहते हैं, "भविष्य उन्हीं का है जो तकनीकी विशेषज्ञता के साथ व्यावहारिक कारोबारी समझ, बदलाव के अनुसार ढलने की क्षमता और विकास की सोच रखते हैं. उद्योग और शिक्षा जगत को साथ मिलकर काम करना होगा, ताकि पाठ्यक्रम लगातार अपडेट होते रहें, बदलती कारोबारी जरूरतों के अनुरूप बने रहें और छात्रों को उभरती तकनीकों तक पहुंच मिल सके."
ग्रेजुएट्स को किन स्किल पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, इस सवाल पर वारियर तीन प्राथमिकताएं बताते हैं. पहली, पेशा चाहे कोई भी हो, AI और डिजिटल तकनीक की अच्छी समझ विकसित करनी चाहिए. दूसरी, समस्या सुलझाने और आलोचनात्मक सोच की क्षमता मजबूत करनी चाहिए, क्योंकि तकनीक तभी मूल्य पैदा करती है जब उसका इस्तेमाल सार्थक चुनौतियों के समाधान में किया जाए.
तीसरी अहम बात है कम्यूनिकेशन. वारियर कहते हैं कि सहयोग और तेजी से सीखने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि सफलता इस बात पर तेजी से निर्भर करेगी कि लोग अलग-अलग टीमों, ग्राहकों और बुद्धिमान तकनीकों के साथ कितनी प्रभावी ढंग से काम कर पाते हैं. तकनीक के लगातार बदलते रहने के बावजूद ये क्षमताएं प्रासंगिक बनी रहेंगी."
यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कॉग्निजेंट जैसी कंपनियां AI से जुड़े फुल-स्टैक (पूरी तकनीकी प्रणाली से जुड़े) समाधान तैयार कर रही हैं. ऐसे में उन्हें ऐसे प्रतिभाशाली लोगों की तलाश है, जिनमें निर्माण की सोच हो और जो AI का इस्तेमाल करके नई चीजें तैयार कर सकें, प्रयोग कर सकें और कारोबार को ठोस फायदा पहुंचा सकें.
वारियर का मानना है कि लंबे समय में सबसे बड़ा फायदा तकनीकी विशेषज्ञता को रचनात्मकता, समस्या सुलझाने की क्षमता और उद्योग की जरूरतों की गहरी समझ के साथ जोड़ने से मिलेगा. कंपनियों को ऐसे पेशेवरों की जरूरत बढ़ रही है, जो कई क्षेत्रों में गहरी समझ विकसित कर सकें और कोडिंग, डिजाइन, परियोजना प्रबंधन, एजेंट ऑर्केस्ट्रेशन (AI एजेंटों के बीच काम का समन्वय) और अपने क्षेत्र की विशेषज्ञता के बीच सहजता से काम कर सकें.
इसे हासिल करने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत होगी. शिक्षण संस्थानों को पाठ्यक्रमों को आधुनिक बनाने और उद्योग के साथ जुड़ाव मजबूत करने का काम जारी रखना होगा.
उद्योग जगत को लगातार स्किल डेवलपमेंट में निवेश करना होगा और व्यावहारिक अनुभव से सीखने के अवसर पैदा करने होंगे. वहीं सरकारें उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल बुनियादी ढांचे और भविष्य पर केंद्रित शिक्षा तक पहुंच बढ़ा सकती हैं.
वे आगे यह भी कहते हैं, "अगर हम इन प्रयासों को प्रभावी ढंग से एक साथ जोड़ पाते हैं तो भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश लंबे समय तक कायम रहने वाली प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त में बदल सकता है. इससे देश न केवल वैश्विक AI अर्थव्यवस्था में भाग ले सकेगा बल्कि उसे आकार देने में भी मदद कर सकेगा."