महाराष्ट्र में कर्नाटक दोहराने की तैयारी
भाजपा अध्यक्ष तथा गृहमंत्री अमित शाह महाराष्ट्र में भले ही भाजपा की सरकार बनाने में विफल हो गए लेकिन सरकार बनाने की सियासत रुकी नहीं है. पार्टी को उम्मीद है कि शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में बहुत जल्द ही खटपट शुरू होगी और पद से वंचित विधायक पाला बदलने में संकोच नहीं करेंगे

भाजपा अध्यक्ष तथा गृहमंत्री अमित शाह महाराष्ट्र में भले ही भाजपा की सरकार बनाने में विफल हो गए लेकिन सरकार बनाने की सियासत रुकी नहीं है. पार्टी को उम्मीद है कि शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में बहुत जल्द ही खटपट शुरू होगी और पद से वंचित विधायक पाला बदलने में संकोच नहीं करेंगे.
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने जिस दिन विधानसभा में बहुमत हासिल किया उसी दिन बहस के दौरान भाजपा के चंद्रकांत पाटिल ने कहा था कि, देंवेद्र फडणवीस ज्यादा दिन विपक्ष में नहीं बैठेंगे और वह मुख्यमंत्री बनेंगे. भाजपा सूत्रों का कहना है कि पाटिल का यह बयान अनायास नहीं है.
दरअसल, पाटिल ने यह बयान भाजपा की भावी रणनीति के मद्देनजर दिया. पाटिल के इस बयान को तब अधिक बल मिला जब एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने एक मराठी टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा था कि, संसद में पीएम से मुलाकात के दौरान मोदी की तरफ से यह कहा गया कि, महाराष्ट्र में हम साथ काम कर सकते हैं. हालांकि, पवार ने कहा कि उन्होंने इससे इंकार कर दिया लेकिन पवार के इस बयान से यह तो साफ हो ही गया कि, भाजपा ने सरकार बनाने के लिए एनसीपी का साथ लेने का विकल्प खुला रखा है.
महाराष्ट्र भाजपा के एक नेता का कहना है कि, पार्टी जल्दबाजी में कुछ नही करने जा रही है. अलबत्ता यह बात सही है कि पार्टी के पास सरकार बनाने के विकल्प हैं. बस समय की बात है. भाजपा वेट एंड वाच की नीति पर चल रही है.
चंद्रकांत पाटिल कहते हैं कि, भाजपा जोड़-तोड़ नहीं कर रही है न करेगी. लेकिन यदि किसी भी पार्टी का कोई नेता भाजपा में आना चाहता है तो पार्टी उस पर विचार करेगी. आखिरकार, शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के विधायक यह जानते हैं कि यह सरकार मैंडेंट के खिलाफ है.
भाजपा के एक केंद्रीय नेता कहते हैं कि, कर्नाटक का उदाहरण सबके सामने है. राज्य में मैंडेंट भाजपा को मिला था लेकिन कांग्रेस, जेडीएस के साथ चली गई और मैंडेट को धता बताते हुए सरकार बना ली. कुछ ही दिनों बाद सरकार डगमगाने लगी. दोनों ही दलों के विधायकों ने पार्टी को छोड़ना शुरू किया और भाजपा के समर्थन में उतरते चले गए. जिसके बाद उप-चुनाव की स्थिति बन गई. उप-चुनाव होने पर कर्नाटक में भाजपा को बड़ी सफलता मिली और एक स्थिर सरकार के लिए लोगों ने भाजपा को पूर्ण बहुमत दे दिया.
महाराष्ट्र के लोग जानते हैं कि शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की सरकार आपसी हित के लिए एक साथ आई है जिस दिन हित का टकराव शुरू होगा गठबंधन टूटने में देर नहीं होगी. भाजपा सूत्रों का कहना है कि शिव-सैनिक जो वर्षों से कांग्रेस और एनसीपी के खिलाफ लड़ते रहे हैं वह मन से निराश हैं.
गठबंधन की वजह से सरकार बचाने के लिए उद्धव को समझौता करना ही होगा इससे शिव सैनिकों की नाराजगी और बढ़ेगी और ऐसे में काफी संख्या में विधायक और पार्टी पदाधिकारी शिव-सेना का दामन छोड़ने में देर नहीं करेंगे. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि वैचारिक रूप से एक दूसरे के तीखे विरोधी पार्टियों की सरकार बहुत दिनों तक नहीं चल पाती है.
जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने जब पीडीपी के साथ सरकार बनाई तो वह बहुत दिनों तक नहीं चल सकी. इसी तरह बिहार में जब नीतीश कुमार ने लालू यादव के साथ मिल कर सरकार बनाई तो बड़े बहुमत के बाद भी सरकार नहीं चल सकी. महाराष्ट्र में तो शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस दोनों से लड़ कर इस मुकाम तक आई है. अब उन्ही के समर्थन से बनी सरकार कितना दिन चलेगी यह देखने वाली बात है.
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