हैदराबाद: बिना तलवार की लड़ाई

हैदराबाद प्ले ऑफ में पहुंचेगी या नहीं, यह तो अंतरिक्ष ही जाने लेकिन अंतरिक्ष की इन संतानों ने एक अंडर डॉग को टॉप डॉग में तब्दील कर ही दिया है.

केन विलियमसन
केन विलियमसन

ध्रुव तारा तो ध्रुव तारा. रात से तड़के तक पूरे आसमान में उसकी चमक दूर से ही नजर आती रहती. धरती पर सबसे ज्यादा लाइक भी उसे ही मिलतीं. आसपास के तारों में कम-ज्यादा असंतोष तो रहता था लेकिन वे कसमसाकर रह जाते थे.

खैर, अभी हाल ही में आई हिचकी नाम की फिल्म में जब खुद रानी मुखर्जी ने अपने श्रीमुख से ध्रुव तारे के कसीदे पढ़ दिए, फिर तो सभी मीडियॉकर तारों में गहरा अवसाद बैठ गया. कइयों ने तो कहना शुरू कर दिया कि ऐसी जिल्लत की जिंदगी से तो ब्लैक होल अच्छा.

उदास तारों में से कइयों ने ब्लैक होल को बेहतर विकल्प माना और अगले दिन उसकी ओर कूच करने का ख्याल कलेजे में लिए-लिए सो गए. लेकिन आसपास चल रही ऐसी आत्मघाती गतिविधियों से कुछ तारे बेहद खिन्न थे.

बिरादरी के एक बड़े तबके में फैलती इस निराशा की बात को उन्होंने पिता अंतरिक्ष तक पहुंचाने का फैसला किया. अंतरिक्ष की तो यह सब सुनकर जैसे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. बहरहाल, पेशेंस तो था ही.

उन्होंने युक्ति निकाली, बोले कि ‘दूसरों को मिलने वाली लाइक से परेशान नहीं हुआ करते. हर साधारण असाधारण होता है.’ दो घड़ी के लिए अंतरिक्ष ने दाढ़ी खुजलाई, फिर एक नजर धरती की ओर डाली और एकाएक चमकती आंखों से कहा कि ‘‘मेरी अच्छी संतानों, लो, तुम सबकी भी लाइक का इंतजाम हो गया.

पर शर्त यही है कि तुम्हें मिलकर काम करना होगा. धरती पर गेंद-बल्ले का एक ग्रेट सर्कस चल रहा है: आइपीएल. जाओ, तुम लोगों को उसी की एक टीम सनराइजर्स हैदराबाद नाम की टीम का खिलाड़ी बनाता हूं. लाइक पूरी टीम को मिलेगी. अकेले लेना चाहोगे तो लौट के यहीं आ जाओगे.’’

ग्यारहवां आइपीएल ठीक आधा खत्म होकर बीचोबीच के टापू में है. पहले अद्धे तक जो कहानियां-किस्से बने हैं, उनमें से एक को तारों और अंतरिक्ष के इस तरह के काल्पनिक संवाद में कोई भी बुन सकता है. सनराइजर्स हैदराबाद यानी एसआरएच या कहें कि हैदराबाद भी बाकी सात टीमों की तरह ही एक टीम है.

इसके 20-25 खिलाड़ियों में से, फिलहाल तो, कोई स्टार नहीं. पर क्या खेल खेल रहे हैं बंदे. 20 ओवर में सवा सौ, डेढ़ सौ रन बनाकर भी विपक्षी के लिए इसे हासिल करना मुहाल कर दे रहे हैं. पूरी तरह से कुटम्मस और धां-धूं वाले क्रिकेट के इस संस्करण में यह एक नया ही फेनॉमेना बनकर उभरता दिख रहा है.

न्यूजीलैंड के केन विलियमसन की अगुआई में मिलकर अंतरिक्ष के ये सितारे प्रतिद्वंद्वी बल्लेबाजों के दिमाग और बल्लों को कुछ यूं जकड़ लेते हैं कि देवदास की तरह पारो की चौखट पर पहुंचते-पहुंचते ढेर.

शायद ऐसे ही नाजुक मौकों के लिए शकील बदायूंनी ने लिखा था: कुछ जीतने के खौफ से हारे चले गए. अब यह शर्तिया तौर पर तो नहीं कहा जा सकता कि इसके प्लेयर बेल का शर्बत पीकर मैदान में उतरते हैं या विपश्यना करके.

लेकिन टेस्ट क्रिकेट इतिहास को नई निर्णायक मोड़ देने वाले इनके मेंटर वीवीएस लक्ष्मण जरूर गीता पढ़ते रहे हैं. वे कहते भी थे कि ‘मैं नहीं देखता, मुझसे पहले कौन खेलकर गया है या टीम की अभी क्या स्थिति है. मैं अपना खेल खेलता हूं.’ मैच में कैसा भी तनाव भरा लम्हा हो, बंदों के ऊपर कोई फर्क ही नहीं पड़ता.

कोई भी छोटा-बड़ा टोटल सब मिलकर खड़ा कर रहे हैं और फिर बांहें चढ़ाकर, चौड़े होकर खड़े हो जाते हैं उसे डिफेंड करने. जैसे कह रहे हों कि ‘आओ, जितना भी है, जरा हासिल करके दिखाओ.’ संदीप शर्मा, सिद्धार्थ कौल, यूसुफ पठान.

ये भला कहां के स्टार बॉलर हैं लेकिन प्रतिद्वंद्वी बल्लेबाजों का जैसे ये दम घोंटकर रख दे रहे हैं. और उस अफगानी गेंदबाज राशिद खान को देखिए जरा! चितवनों से मिलता है कुछ सुराग बातिल का, चाल से तो काफिर की सादगी झलकती है.

क्रीज पर खड़े कुछ बल्लेबाज तो जैसे उन्हें देखकर ही कहने लगते हैं: फिर ऐ दिले शिकस्त कोई नग्मा छेड़ दे, फिर आ रहा है कोई इधर झूमता हुआ. थोड़ा गालिब को भी इसमें जोड़ दें तो लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं.

हैदराबाद प्ले ऑफ में पहुंचेगी या नहीं, यह तो अंतरिक्ष ही जाने लेकिन अंतरिक्ष की इन संतानों ने एक अंडर डॉग को टॉप डॉग में तब्दील कर ही दिया है.  इस सफर में उन्होंने अपने नए दर्शक बना लिए हैं.

इन दर्शकों को अब 13 मई का इंतजार है, जब हैदराबाद का मुकाबला सबको रौंदती जाने वाली और दबंगों से भरी पड़ी, धोनी की चेन्नै से होगा, जिससे अपना पहला मैच हैदराबाद महज 4 रन से गंवा बैठा था. उस दिन अंतरिक्ष शायद ऊपर से हिदायत दें, ‘कमबख्तों, नाक न कटाना’.

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