तकनीक से बदल पाएगा यूपी पुलिस का चेहरा?

आधुनिक तकनीक के सहारे यूपी पुलिस अपना चेहरा बदलने की कोशिश कर रही है.

आधुनिक तकनीक से लैस लखनऊ पुलिस का कंट्रोल रूम
आधुनिक तकनीक से लैस लखनऊ पुलिस का कंट्रोल रूम

लखनऊ जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर दक्षिण में रायबरेली रोड पर बाईं ओर पीले रंग के गेट से शुरू चमचमाती चार लेन की सड़क नए बदलाव का एहसास कराती है. दोनों तरफ खाली पड़े प्लॉटों से गुजरती इस सड़क पर करीब 2 किमी चलने के बाद दाईं ओर चहल-पहल बढ़ जाती है. यहां देश की सबसे बड़ी पुलिस लाइन आकार ले रही है. इसके बगल में पीले रंग के एक पुराने भवन के बाहर नीली बत्ती लगी गाडिय़ों का जमावड़ा है. यह यातायात निदेशालय है. एक अगस्त की सुबह ठीक 10 बजे अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) यातायात अनिल अग्रवाल अपने कमरे में प्रवेश करते हैं. भीतर वे बाईं ओर टंगे सफेद बोर्ड के सामने रुक जाते हैं. जेब से लाल रंग का स्केच पेन निकालते हैं और बोर्ड पर 61 लिखकर इसे एक गोले से घेर देते हैं. यह संख्या बता रही है कि देश में सबसे बड़े और अनोखे 'डायल-100' प्रोजेक्ट के शुरू होने में अभी कितने दिन बचे हैं.

1988 बैच के आइपीएस अनिल अग्रवाल 2 अक्तूबर को यूपी में शुरू होने वाले उस प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी हैं, जिससे सूबे की पुलिस व्यवस्था में बुनियादी बदलाव की उम्मीद है.

महात्मा गांधी जयंती यानी 2 अक्तूबर को सूबे में भविष्य की पुलिस व्यवस्था का चेहरा सामने आएगा, जब 'डायल-100' प्रोजेक्ट की शुरुआत होगी. प्रदेश के किसी कोने में बैठा व्यक्ति केवल 100 नंबर डायल करके झट से पुलिस तो बुला ही सकेगा, साथ ही स्वास्थ्य, फायर समेत कई अन्य जरूरी इमरजेंसी सेवाएं भी सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी पर मौजूद होंगी. शिकायत दर्ज कराने के लिए थानों का चक्कर लगाने से छुटकारा मिलेगा. अब लोगों की हर शिकायत न केवल दर्ज होगी, बल्कि स्थानीय पुलिस की मदद भी घर बैठे मिलेगी. खास बात यह भी है कि 20 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में हर व्यक्ति के लिए एक जैसी पुलिसिंग मुहैया होगी. पूरे विश्व में ऐसा दूसरा उदाहरण नहीं होगा. लखनऊ में सुल्तानपुर रोड और शहीद पथ के मिलन स्थल पर 900 फोन लाइनों वाला देश का सबसे बड़ा कंट्रोल रूप आकार ले रहा है. इसके एक इशारे पर सूबे के 75 जिलों में मौजूद 3,200 चारपहिया और 1,600 दोपहिया पुलिस पैट्रोलिंग गाडिय़ां पीड़ितों की शिकायतें दूर करने के लिए दौड़ पड़ेंगी (देखें ग्राफिन्न्स). इस पर अब तक 2,500 करोड़ रु. से अधिक धन खर्च किया जा चुका है. 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा जनता में अपनी कार्यप्रणाली में आमूलचूल बदलाव का संदेश देना चाहती है.

स्मार्ट पुलिसिंग का मॉडल लखनऊ
2014 में लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद और गाजियाबाद में आधुनिक कंट्रोल रूम शुरू करने की योजना बनी. पिछले साल अप्रैल में सात करोड़ रु. की लागत से लखनऊ में गोमती नदी के किनारे आधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम की शुरुआत हुई. अगले कुछ महीनों में कानपुर, इलाहाबाद और गाजियाबाद में भी ऐसे कंट्रोल रूम बनकर तैयार हो गए. लेकिन लखनऊ को छोड़कर बाकी तीनों कंट्रोल रूम जनता के बीच अपनी पहचान नहीं बना सके. लखनऊ में 70 प्रमुख स्थानों पर 'पैन टिल्ट जूम' (पीटीजेड) कैमरे लगाए गए हैं, जिन्हें सीधे आधुनिक कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है. ये कैमरे न केवल चारों ओर घूम सकते हैं बल्कि इनसे किसी भी चीज को बड़ा करके देखा जा सकता है. इसके अलावा 200 फिक्स्ड कैमरों का जाल पूरे शहर में बिछाया गया है. आधुनिक कंट्रोल रूम के प्रभारी एएसपी दुर्गेश कुमार बताते हैं, ''आधुनिक कंट्रोल रूम के जरिए पुलिस रोज सैकड़ों की संख्या में वाहनों का ई-चालान कर रही है. ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम (एएनपीआर) से चोरी की गई गाडिय़ों पर नजर रखी जा रही है. ऐसी कई गाडिय़ां पकड़ी भी गई हैं.''

लखनऊ में खुले आधुनिक कंट्रोल रूम से सूचना मिलने के 8 से 10 मिनट के भीतर पीड़ित व्यक्ति तक पैट्रोलिंग गाडिय़ां पहुंचाई जा रही हैं. अक्तूबर, 2014 में पहली बार राज्यव्यापी डायल-100 परियोजना पर विचार शुरू हुआ. देश में डायल-108 एंबुलेंस सेवा की शुरुआत करने वाले वेंकट चंगावल्ली को पिछले साल जनवरी में गृह विभाग का सलाहकार बनाया गया. इसके बाद योजना को पंख लग गए और दो साल से कम समय में यह अक्तूबर में हकीकत में उतरेगी.

विश्वस्तरीय तकनीकों का संगम
लखनऊ में सुल्तानपुर रोड पर बन रहा डायल- 100 परियोजना का आधुनिक भवन विश्वस्तरीय तकनीकों के संगम का गवाह भी बनेगा. यहां 900 टेलीफोन लाइनों पर आने वाली कॉल को रिसीव करने के लिए विश्व में प्रतिष्ठित 'अवाया' कंपनी ने सॉफ्टवेयर तैयार किया है. कॉल को आगे भेजने का सॉफ्टवेयर 'हेक्सा गन' ने बनाया है. इतना ही नहीं कंप्यूटर और मोबाइल फोन से लैस पैट्रोलिंग गाडिय़ों को केवल इंटरनेट के भरोसे ही नहीं छोड़ा गया है. वैकल्पिक व्यवस्था के तहत इन गाडिय़ों में उच्च क्षमता वाले वायरलेस सेट भी लगे हुए हैं. वायरलेस का सॉफ्टवेयर 'नियोकॉम' ने तैयार किया है. इससे लखनऊ के कंट्रोल रूम से प्रदेश के किसी भी कोने में मौजूद पैट्रोलिंग वाहन से सीधे वायरलेस के संपर्क किया जा सकेगा. अनिल अग्रवाल कहते हैं, ''प्रदेश में पहली बार इस प्रकार केंद्रीकृत वायरलेस सुविधा शुरू होगी. 'डायल-100' में देश का सबसे बड़ा डिजिटल वायरलेस रेडियो नेटवर्क भी काम करेगा.''

तकनीकी के जरिए पुलिस को एक अलग पहचान देने के लिए लखनऊ में वायरलेस चैराहे के पास मौजूद राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो के दफ्तर में मई में प्रदेश का पहला ई-पुलिस थाना खोला गया है. अब घर बैठे कोई भी व्यक्ति उत्तर प्रदेश पुलिस की वेबसाइट पर जाकर ई-थाने में एफआइआर दर्ज करा सकता है. अपर पुलिस महानिदेशक, तकनीकी शाखा, आर.के. विश्वकर्मा कहते हैं, ''ई-थाने का कार्यक्षेत्र पूरा प्रदेश है. पहले चरण में इसमें केवल वही ई-एफआइआर दर्ज की जा रही हैं, जिनमें अभियुक्त अज्ञात हो और अपराध गंभीर प्रकृति का न हो.'' रोज 50 से अधिक एफआइआर ई-थाने में दर्ज हो रही हैं. एफआइआर दर्ज होते ही संबंधित थाने से इसकी जांच कराई जाती है.

सोशल मीडिया से पहचान
45 वर्षीय उपेंद्र कुमार दुबे सिंगापुर की शिप मैनेजमेंट कंपनी में डायरेक्टर हैं. इनके बुजुर्ग पिता सोनभद्र के रेनुकूट में रहते हैं. 12 अप्रैल को इनके पिता को फोन करके कुछ लोगों ने 20 लाख रुपए की रंगदारी मांगी. उपेंद्र को जब इसके बारे में पता चला तो वे परेशान हो उठे. रिश्तेदारों, दोस्तों से संपर्क करने पर भी जब कोई राहत नहीं मिली तो उपेंद्र ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लेकर यूपी पुलिस को ट्वीट कर पूरी घटना की जानकारी दी. डीजीपी ऑफिस ने सूचना मिलते ही रेनुकूट थाने को जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया. 20 मिनट के भीतर गुंडे सलाखों के पीछे थे. ट्विटर पर यूपी पुलिस इसी तरह सक्रिय है. पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जावीद अहमद ने मार्च से यूपी पुलिस के ट्वीटर एकाउंट को नए सिरे से लॉन्च किया और अब तक इसके 34,000 से अधिक फॉलोवर बन चुके हैं. जनता से मिली उत्साही प्रतिक्रिया को देखते हुए ट्वीटर ने यूपी पुलिस के हैंडल को टिक मार्क कर दिया है.

राणा प्रताप मार्ग पर डीजीपी मुख्यालय के जनसंपर्क अधिकारी राहुल श्रीवास्तव की निगरानी में सात पुलिसकर्मियों की एक टीम दिन रात ट्वीटर पर आ रही शिकायतों के निबटारे में लगी है. पहली बार यूपी पुलिस के सभी जिला स्तरीय अधिकारियों के ट्वीटर एकाउंट खोले गए हैं. तकनीक के जरिए यूपी पुलिस को संवारने में लगे अधिकारियों में आशुतोष पांडेय भी हैं जो गूगल क्राइम मैपिंग सिस्टम के नोडल अधिकारी हैं. अब आप गूगल मैप पर यह भी देख सकेंगे कि यूपी के किस स्थान पर कितने अपराध होते हैं. किसी जगह पर किस प्रकार के अपराध ज्यादा होते हैं? गूगल क्राइम मैंपिंग सिस्टम में अभी तक मेरठ, आगरा, कानपुर जैसे जोन में तीन वर्ष के अपराध के आंकड़े गूगल पर लोड किए जा चुके हैं.

सेवा, दक्षता और पराक्रम के संदेश युक्त यूपी पुलिस के आधिकारिक निशान में 'वी केयर' यानी 'हम आपकी चिंता करते हैं' जोड़ा गया
है. अगर सभी ने इस नए संदेश को आत्मसात किया तो वाकई हम विश्व के सबसे बड़े पुलिस बल में एक होंगे.

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