जल परियोजनाएं छत्तीसगढ़ में, मुसीबत ओडिशा में

छत्तीसगढ़ में महानदी पर प्रस्तावित चार परियोजनाओं की वजह से ओडिशा में संभावित जलसंकट को लेकर छिड़ी जंग.

महानदी का एक दृश्य
महानदी का एक दृश्य

धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यावसायिक इतिहास संजोए महानदी आजकल सियासी जंग का मैदान बन गई है. इस नदी के पानी के बंटवारे को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ सरकार में ठन गई है. दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार ने महानदी पर चार बड़ी परियोजनाओं का निर्माण प्रस्तावित किया है जिनमें अभी केवल केलो बांध के निर्माण को मंजूरी दी गई है. केलो के अलावा छत्तीसगढ़ ने पेरिमानडीह, कैंडुला और तेंडुला परियोजनाओं को केंद्रीय जल आयोग के पास भेजा है पर इनके निर्माण को लेकर तकनीकी सलाहकार समिति से अभी मंजूरी नहीं मिली है. इनको लेकर ओडिशा सरकार का आरोप है कि तेंडुला डैम पर निर्माण कार्य बिना स्वीकृति के किया गया है और इनसे ओडिशा में जलसंकट खड़ा हो जाएगा. इस जंग में ओडिशा की बीजेपी इकाई छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार के बचाव में है और ओडिशा में संभावित जलसंकट के लिए प्रदेश की नवीन पटनायक सरकार पर ठीकरा फोड़ रही है. वहीं कांग्रेस अपनी गुटबाजी में ही उलझी है. उसका विरोध दबे स्वर में है.

विपक्षी दलों का आरोप है कि कंधमाल में पांच आदिवासियों का एनकाउंटर, नागड़ा में कुपोषण से 19 बच्चों की मौत, चिटफंड घोटाला जैसे मामलों में चैतरफा घिरी नवीन सरकार ने जनता का ध्यान बांटने के लिए महानदी का मुद्दा उठाया है. ओडिशा के मुख्य सचिव आदित्य पाढ़ी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की ओर से बनाए जा रहे बैराज अवैध हैं, इनका निर्माण रोका जाना चाहिए. उनका यह भी कहना है कि महानदी मामले को लेकर छत्तीसगढ़ ने ओडिशा को कोई जानकारी नहीं दी. उनके मुताबिक, इन बांधों के बनने से ओडिशा के लिए पानी ही नहीं बचेगा. बीजेडी प्रवक्ता प्रताप केसरी देब कहते हैं कि नए बैराज बनने से प्रवाह और कम हो जाएगा और हीराकुड बांध की उपयोगिता खत्म हो सकती है. हीराकुड बांध से ही राजधानी भुवनेश्वर और कटक को पानी सप्लाई होती है. बांध में पानी नहीं आएगा तो दोनों शहरों में जलसंकट उत्पन्न हो जाएगा.

आइआइटी मद्रास और मुंबई की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 साल के दौरान ओडिशा में महानदी में 10 फीसदी पानी कम हुआ है. वर्ष 1983 में हुए एक समझौते के तहत मध्य प्रदेश और ओडिशा के बीच महानदी को लेकर एक संयुक्त कंट्रोल समूह बनाया जाना था पर अब तक इसका गठन नहीं किया जा सका है. छत्तीसगढ़ सरकार ने महानदी पर एक के बाद एक 41 बांध बनाकर भारी मात्रा में ओडिशा के हिस्से का पानी रोक दिया है. इसका सीधा असर मॉनसून के बाद दिखेगा. कहा जा रहा है कि ओडिशा में सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन में भारी गिरावट आएगी.

लेकिन ओडिशा सरकार को सूचित न करने के बीजेडी के दावे की हवा निकालने का काम सबसे पहले सरकार के वरिष्ठ मंत्री दामोदर राउत ने ही कर दिया. उन्होंने कहा कि 2008 से केलो बांध पर काम चल रहा है और सरकार को मालूम ही नहीं, यह बात गले नहीं उतरती. इधर बीजेपी ने एक के एक बाद लेटर बम फोडऩे शुरू कर दिए. उसने छत्तीसगढ़ में निर्माणाधीन और स्वीकृत बांध पर 2008 से लेकर 2011 तक दोनों राज्यों की सरकारों के बीच पत्र व्यवहार की प्रतियां सार्वजनिक करनी शुरू कर दीं. केंद्रीय पेट्रोलियम राज्यमंत्री धर्मेंद प्रधान कहते हैं, ''बीजेपी जल्दी ही महानदी पर श्वेतपत्र जारी करके नवीन पटनायक सरकार की नाकामियां उजागर करेगी.''

कांग्रेस इस प्रकरण में गुटबाजी से ही नहीं उबर पा रही है. प्रदेश अध्यक्ष प्रसाद हरिचंदन कैंप कार्यालय में कोरग्रुप के साथ बैठक कर महानदी पर श्वेतपत्र का ड्राफ्ट तैयार करने में जुटे हैं. हरिचंदन बीजेपी के श्वेत पत्र से पहले इसे जारी करना चाहते हैं. जयराम रमेश ने ओडिशा का दौरा करके महानदी आंदोलन की रणनीति बनाई थी. पर इसके ठीक उलट संगठन को बिना विश्वास में लिए कांग्रेस विधायक दल के नेता नरसिंह मिश्र अपनी टीम के साथ छत्तीसगढ़ का दौरा भी कर आए और सर्वदलीय बैठक भी कर डाली, जिसमें बीजेडी को छोड़कर सभी दल आए थे. दरअसल, मिश्र ने प्रसाद हरिचंदन को कमजोर करने की कोशिश की.

उधर, छत्तीसगढ़ के जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि मामला सिर्फ अरपा भैंसाझार का है. इसके लिए केंद्र से अनुमति मिल चुकी है. उनके मुताबिक, ओडिशा के मुख्य सचिव का यह आरोप गलत है कि ओडिशा सरकार को सूचना नहीं दी गई. अप्रैल 2008 में ओडिशा सरकार ने पत्र लिखकर जानकारी मांगी थी, जो दी जा चुकी है. सवाल यह है कि फिर ओडिशा सरकार और विपक्ष यह मुद्दा अपने-अपने तरीके से क्यों उठा रहे हैं? दरअसल, सरकार की मजबूरी यह है कि अगले साल फरवरी में ग्राम पंचायत के चुनाव होने हैं. पानी, बिजली और सिंचाई का घोर संकट पटनायक सरकार के लिए नई मुसीबत बन सकता है. लिहाजा इस मामले को छत्तीसगढ़ के सिर पर फोडऩा उसके लिए मुफीद है.

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रधानमंत्री मोदी को भेजे पत्र में महानदी पर बने सात पिकअप वियर सहित उसकी कुछ सहायक नदियों में स्वीकृत और प्रस्तावित सिंचाई परियोजनाओं को लेकर चिंता प्रकट की है. छत्तीसगढ़ की वृहद, मध्यम और छोटी जल परियोजनाओं को मिलाकर करीब 17 परियोजनाओं की वजह से महानदी का ओडिशा के हिस्से का पानी कम हुआ है. ओडिशा सरकार ने तत्कालीन मध्य प्रदेश और ओडिशा सरकार के बीच हुए जल समझौते की दुहाई देकर आपत्ति जताई है और छत्तीसगढ़ से बहकर जाने वाली महानदी और उसकी सहायक नदियों पर बनी परियोजनाओं को नियम विरुद्ध ठहराया है. सीमावर्ती रायगढ़ जिले में केलो परियोजना, साराडीह बैराज और कलमा बैराज को भी ओडिशा सरकार ने हिट लिस्ट में रखा है.

 हीराकुड तक महानदी का जलग्रहण क्षेत्र 82,432 वर्ग किलोमीटर है, जिसका 86 फीसदी छत्तीसगढ़ में है. हीराकुड बांध में महानदी का औसत बहाव 40,773 एम.सी.एम. है, इसमें से 35,308 एम.सी.एम. का योगदान छत्तीसगढ़ देता है. वहीं छत्तीसगढ़ में करीब 9,000 एम.सी.एम. पानी का ही इस्तेमाल किया जा रहा है जो कि महानदी के हीराकुड तक उपलब्ध पानी का सिर्फ 25 फीसदी है. ऐसे में लगता नहीं कि छत्तीसगढ़ ओडिशा की हिस्सेदारी को प्रभावित करता है.

छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विवेक ढांड ने 29 जुलाई को नई दिल्ली में केंद्रीय जल आयोग की बैठक में पानी विवाद पर संयुक्त बोर्ड गठित करने पर रजामंदी दे दी. वहीं ओडिशा के मुख्य सचिव पाढ़ी ने कहा कि मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद कोई फैसला लिया जाएगा. इस बात पर भी सहमति बनी है कि दोनों राज्य अपने अधिकार क्षेत्र में महानदी पर निर्मित सभी परियोजनाओं सहित अन्य जानकारियां साझा करेंगे.
इस बीच मॉनसून के चलते महानदी में लबालब पानी भरा है. हीराकुड बांध ने 12 गेट खोल दिए गए हैं. सो मुख्यमंत्री नवीन पटनायक फिलहाल तो बाढ़ से निपटने की तैयारी में हैं.

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