जंगल में कीड़े का कोहराम

मध्य भारत के जंगलों में साल के शानदार पेड़ों के दुश्मन साल बोरर को पकड़कर लाने के लिए दिया जा रहा इनाम

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राज्य में कीड़ों से प्रभावित साल के पेड़; और (इनसेट में) साल बोरर कीड़ा

इनसान की अंगुली के बराबर बीटल यानी एक किस्म के कीड़े ने पूरे जंगल के सफाए का खतरा पैदा कर दिया है. जी हां, होप्लोसिरैम्बिक्स स्पाइनिकोर्निस वैज्ञानिक नाम वाला यह खतरनाक साल बोरर पूर्वी मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में लौट आया है. इसने राज्य के वन विभाग की नींद उड़ा दी है, क्योंकि यह छोटा-सा कीड़ा साल यानी शोरिया रोबस्टा के पेड़ों से आबाद जंगल के विशाल हिस्सों का सफाया कर सकता है. यह उनके शानदार तने में सुराख कर देता है.

कुल प्रभावित क्षेत्र अभी करीब 30,000 हेक्टेयर है, जो तीन पर्वतमालाओं—पूर्व करंजिया, पश्चिम करंजिया और समनापुर—में फैला है. वन अधिकारियों ने इस पर काबू पाने के लिए 1.5 लाख पेड़ काटने की इजाजत मांगी है.

यह सच है कि साल बोरर साल के पेड़ों के साथ ही रहता है और एक वक्त में इलाके के 2-3 फीसद पेड़ों पर ही असर डालता है. मगर जानकार बताते हैं कि हर तीन दशक के आसपास इसकी आबादी में जबरदस्त उछाल आता है.

यह स्थानीय पारिस्थितिकी को अपनी चपेट में ले लेता है, पतझड़ से तापमान बहुत बढ़ जाता है, और लकड़ी का दाम भी खतरे में पड़ जाता है. यहां पिछला बड़ा संक्रमण 1990 के दशक में हुआ था. तब यह पड़ोसी जिलों मंडला, उमरिया और शहडोल तक फैल गया था. बाद में सुदूर नर्मदापुरम जिले के पेड़ भी इसकी चपेट में आ गए थे. सो, दिसंबर 2025 में जब संकट के पहले निशान दिखे, वन अधिकारियों ने वक्त गंवाए बिना प्रभावित पेड़ों की सूची बनाई.

पेड़ को खा जाता है लार्वा

इसकी मादा मॉनसून में अंडे देती है. इसका लार्वा छाल में सुराख करके नरम रसदार लकड़ी से खुराक हासिल करता है. इस सुरंग जैसे रास्ते से होकर यह तने के बीचोबीच पैठ बना लेता है. उन वर्षों में जब इन कीड़ों की आबादी में उछाल आता है, पूरे जंगल के पेड़ों पर गोली लगने सरीखे सूराख दिखने लगते हैं. लकड़ी की कीमत 40,000 प्रति घन मीटर से 30-40 फीसद गिर जाती है.

स्थानीय लोगों को एक कीड़ा पकड़कर लाने के एवज में दो रुपए दिए जा रहे हैं. करीब 14 लाख कीड़े पकड़कर लाए जा चुके हैं और इनाम में करीब 30 लाख रुपए दिए गए हैं. इन्हें पकड़ने के लिए पेड़ों के लट्ठे काटकर रस निकाला जाता है. कीड़ा इस रस से आकर्षित होकर मीलों दूर से आ जाता है.

मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभरंजन सेन का कहना है कि प्रभावित पेड़ों को श्रेणी एक से श्रेणी आठ में बांटा गया है. मुख्य वन संरक्षक (जबलपुर) मस्तराम बघेल का कहना है कि श्रेणी 1-6 के पेड़ों को नवंबर में गिराया जाएगा. बाकी पेड़ फिर जी उठेंगे.

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