जेन ज़ी रोष से ‌झुके सोरेन

रांची में हुए जंतर मंतर सरीखे प्रदर्शन ने झारखंड के मुख्यमंत्री को झुकने पर मजबूर कर दिया. मगर अब उनके सामने चरमराई व्यवस्था को दुरुस्त करने की बड़ी चुनौती

10 अगस्त को विधानसभा की ओर कूच करते प्रदर्शनकारी

मजबूरी में ही सही, हेमंत सोरेन को कई कदम पीछे हटना पड़ा. छात्र आंदोलन के 24वें दिन, 17 अगस्त को उन्होंने आखिरी कदम भी पीछे खींच लिया और 2024 की कर्मचारी चयन परीक्षा को रद्द कर दिया. 9-10 अगस्त को बड़े विकेट गिर चुके थे. मगर आंदोलनकारियों का मानना था कि यह कई जगहों से टूट चुकी व्यवस्था में महज मरहम-पट्टी है.

उनकी नजर में झारखंड की भर्ती व्यवस्था अनियमितताओं से इस कदर दागदार हो चुकी है कि वे पूरी व्यवस्था को बदलकर नए सिरे से तैयार करने से कम पर राजी न थे. आखिरकार मुख्यमंत्री ने 2014 से अब तक आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की समीक्षा कराने पर सहमति दे दी. छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के अनशन तोड़ने के साथ ही आंदोलन का पटाक्षेप हो गया.

दस अगस्त को सोरेन के 51वें जन्मदिन पर ही आंदोलन अपने चरम पर पहुंच गया था. छात्रों ने जंतर मंतर सरीखा माहौल बना दिया. आंसू गैस, पानी की बौछार और लाठियों का सामना करते हुए उन्होंने विधानसभा का घेराव किया. उसी शाम झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांगते को गिरफ्तार कर लिया गया, जिन्होंने महज दो हफ्ते पहले झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था.

नौ अगस्त को पूरे विवाद की जड़ बनी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर दी गई. अगस्त में होने वाली 2023 और 2025 की बैकलॉग परीक्षाएं भी रद्द हो गईं. जेपीएससी के बाकी तीन सदस्यों ने भी इस्तीफा दे दिया. मगर इसके समापन में एक हफ्ता और लगा. कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी हस्तक्षेप करना पड़ा और आंदोलन के प्रति समर्थन जताना पड़ा.

व्यावहारिक स्तर पर सोरेन के सामने एक बड़ी चुनौती है. इस साल की जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करना बड़ी बात नहीं. मगर हाल में रद्द की गई 2024 की झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय (जेएसएससी सीजीएल) परीक्षा का मामला अलग है. उस साल सितंबर में हुई इस परीक्षा के रद्द होने से उसमें सफल हुए 1,932 अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया.

उनकी नौकरियां हाथ से जा सकती हैं. अभी वे सचिवालय सहायक, प्रखंड अधिकारी आदि ग्रुप बी और सी पदों पर काम कर रहे हैं. लेकिन झारखंड हाइकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए उस आदेश पर रोक लगा दी‌, जिसके तहत जेएसएसी सीजीएल और सीडीपीओ परीक्षाओं को रद्द किया गया था.

बढ़ती गड़बड़ी
मगर यह परीक्षा इस बवाल में कैसे आ फंसी? विवाद की शुरुआत जेपीएससी की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से हुई थी. 2024 में इसका पिछला चरण काफी अव्यवस्थित रहा था. प्रश्नपत्रों की व्यवस्था और उत्तरों को लेकर विरोध-प्रदर्शन हुए, मुकदमेबाजी चली और नतीजे जारी होने में देर हुई.

मिजोरम मूल के और झारखंड कैडर के सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी खियांगते को व्यवस्था को पटरी पर लाने के मकसद से ही 2025 की शुरुआत में जेपीएससी का अध्यक्ष बनाया गया था. मगर बाद में हालात और बदतर हुए.

जब ऐलान किया गया कि परीक्षा 19 अप्रैल को होगी तो उसे जल्दबाजी भरा फैसला माना गया. छात्रों के पास बहुत बड़े पाठ्यक्रम की तैयारी के लिए बमुश्किल 40 दिन थे. फिर 2 जुलाई की रात को उसके नतीजे आए और उसमें 2,204 अभ्यर्थी पास हुए. उन्हें 103 पदों की मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए महज 17 दिन दिए गए.

कुछ ही दिनों में नतीजों को लेकर असामान्य बातें सामने आने लगीं. विभिन्न आरक्षण श्रेणियों के लिए कटऑफ जारी नहीं किए गए, लिहाजा किसी को पता नहीं था कि किस अभ्यर्थी ने कितने अंक पाकर परीक्षा पास की है. कुछ उत्तर-पुस्तिकाओं पर जेपीएससी के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे. फिर एक सफल अभ्यर्थी की लीक हुई ओएमआर उत्तर पुस्तिका वायरल हो गई. उसमें 200 में सिर्फ 48 प्रश्नों के उत्तर दिए गए थे, फिर भी अभ्यर्थी परीक्षा पास कर गया. उसके बाद तो हंगामा बरपा हो गया. 

सीआइडी ने 21 जुलाई को आठ लोगों को गिरफ्तार किया. उनमें एक उप परीक्षा नियंत्रक और लखनऊ की टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के कर्मचारी शामिल थे. ओएमआर शीट के मूल्यांकन से लेकर नतीजे तैयार करने तक, परीक्षा से जुड़े अहम बैकएंड काम इसी कंपनी को आउटसोर्स किए गए थे. अगले दिन खियांगते ने पद छोड़ दिया.

सबसे बड़ा सवाल यह था कि टीडीपीएल को यह काम कैसे और क्यों दिया गया और वह भी सीधे नामांकन के जरिए, बिना किसी प्रतिस्पर्धी टेंडर के. वहीं, 2024 में हुई जेएसएससी सीजीएल परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के चलते जेएसएससी ने टीडीपीएल को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था. 

उस परीक्षा में भी बड़े पैमाने पर सुनियोजित नकल के आरोप लगे थे. मार्च 2025 में सौंपी गई एक रिपोर्ट में राज्य सीआइडी ने कहा था कि उसे 150 में से 120 सवालों की उत्तर-कुंजी लैंडलाइन के जरिए बताए जाने के सबूत मिले और बाद में उन्हें व्हाट्सऐप के जरिए फैलाया गया था.

उस सनसनीखेज रिपोर्ट को दबा दिया गया और अब विवादों में घिरी जेएसएससी भर्ती प्रक्रिया को एक दूसरी जांच के बाद आगे बढ़ने दिया गया. इतना ही नहीं, राज्य की सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया को संभालने का ठेका दोबारा टीडीपीएल को दे दिया गया. खियांगते पर आरोप है कि उन्होंने यह ठेका दिलाने के बदले भारी रिश्वत ली थी.

भ्रष्टाचार की एजेंसी
जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा पर इसके असर का अंदाजा लगाया जा सकता है. टीडीपीएल ने कथित रूप से डिजिटल रिकॉर्ड में हेरफेर कर पसंदीदा अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाए. आरोप है कि टीडीपीएल के कर्मचारी रक्षक सिंह ने अपनी ओएमआर शीट में हेरफेर कर परीक्षा पास कर ली.

यह भी सामने आया है कि टीडीपीएल के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी जेएसएससी सीजीएल पास करने के बाद गोड्डा के पैरेयाहाट में प्रखंड आपूर्ति के पद पर नियुक्त हो गया. जांचकर्ताओं का कहना है कि उसने 13 वर्षों में राज्य और केंद्र स्तर की 12 परीक्षाएं पास कीं. अभ्यर्थियों को मनचाहे नतीजे दिलाने का दावा करने के लिए वह अपने इसी रिकॉर्ड का हवाला देता था. पूरे नेटवर्क में वह अहम कड़ी था.

टीडीपीएल से जुड़ी नौ प्रतियोगी परीक्षाएं रद्द हो चुकी हैं. सोरेन ने प्रवर्तन निदेशालय से जांच, फास्ट-ट्रैक अदालत और भर्ती सुधारों के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग भी मान ली है. मगर सीबीआइ जांच की मांग पर उन्होंने अभी तक सहमति नहीं दी है.

17 अगस्त को छात्र दो धड़ों में बंट गए. महतो और मूल आंदोलनकारियों के एक धड़े ने आंदोलन खत्म कर दिया. वहीं दूसरे धड़े ने रांची के जयपाल मुंडा स्टेडियम में चल रहे अपने धरने को खत्म कर दिया और सरकार को अपने आश्वासन को पूरा करने के लिए 60 दिन का समय दिया.

विपक्ष-शासित राज्य होने की वजह से यहां आंदोलन को अलग सियासी रंग मिला. जंतर मंतर के उलट, यहां भाजपा प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी थी. भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने सोरेन के आवास के बाहर धरना देकर राहुल गांधी के तरीके को भी दोहराया.

वहीं, सोरेन के हिसाब से, सीबीआइ जांच की मांग राजनीति से प्रभावित है. केंद्रीय जांच एजेंसियों को लेकर उनमें आशंका की वजह भी है क्योंकि 2024 के आम चुनाव से पहले उन्हें पांच महीने बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में बिताने पड़े थे.

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