चलताऊ समझौता
स्विट्जरलैंड की एक प्रमुख कंटेनर कंपनी को विझिंजम बंदरगाह की हिस्सेदारी बेचने से इस पर बहस हुई तेज. अब क्या करेंगे मुख्यमंत्री सतीशन?

दुनिया की सबसे बड़ी कंटेनर शिपों में शामिल एमएससी इरिना विझिंजम बंदरगाह पर
नए मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन इन गर्मियों में मिली अपनी नई सियासी लोकप्रियता के उत्साह से बाहर आ भी नहीं पाए थे. देर से आए मॉनसून और सत्ता से बेदखल वामपंथ के साथ कुछ नोकझोंक को छोड़ दें तो उनके सामने कोई बड़ी चुनौती नहीं थी.
मगर उनके ये अच्छे दिन अब विझिंजम के उफनते तट पर आकर अटक गए हैं. यहीं भारत की पहली डीप-वॉटर ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह परियोजना ने 2024 में परिचालन शुरू किया था जो शुरू से महत्वाकांक्षी होने के साथ-साथ विवादों में भी घिरी रही है.
यह बंदरगाह तेजी से कारोबार बढ़ा रहा है. इस साल जून तक यहां इसका एक हजारवां वाणिज्यिक जहाज पहुंच चुका था. इनमें दुनिया के कुछ सबसे बड़े मदर शिप शामिल हैं. वैश्विक समुद्री शिपिंग मार्गों से महज 10 नॉटिकल मील दूर स्थित होने के कारण सामरिक दृष्टि से यह अहम ट्रांसशिपमेंट केंद्र उन्हें आकर्षित कर रहा.
मगर भीतर ही भीतर उठी एक हलचल ने सियासी तूफान मचा दिया है. खबर आई कि गौतम अदाणी ने राज्य सरकार को जानकारी दिए बिना अपनी कंपनी की 49 फीसद हिस्सेदारी जिनेवा स्थित दुनिया की सबसे बड़ी कंटेनर शिपिंग कंपनी एमएससी को 13,200 करोड़ रुपए में बेचने का सौदा कर लिया है. 2015 से कांग्रेस और वाम की लगातार तीन सरकारों और अदाणी के बीच यह सार्वजनिक-निजी साझेदारी कायम रही है.
इस परियोजना में राज्य सरकार की 61.5 फीसद हिस्सेदारी है और बंदरगाह का मूलभूत ढांचा तथा भूमि उसी के स्वामित्व में हैं. इसमें केंद्र की 9.6 फीसद हिस्सेदारी है. अदाणी विझिंजम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (एवीपीपीएल) के जरिए बंदरगाह का संचालन करने वाली अदाणी पोर्ट्स ऐंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) की हिस्सेदारी 28.9 फीसद है.
शर्त दरकिनार?
एपीएसईजेड की ओर से 30 जून को घोषित सौदे के मुताबिक, वह एवीपीपीएल की अपनी 49 फीसद हिस्सेदारी एमएससी की टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड को हस्तांतरित करेगी. इसे भारत के बंदरगाह इन्फ्रास्ट्रक्चर में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निजी निवेश बताया जा रहा. दिक्कत यह है कि इस सौदे में कथित रूप से अनुबंध की उस स्पष्ट और अनिवार्य शर्त की अनदेखी की गई जिसके तहत अदाणी समूह को हिस्सेदारी के ढांचे में किसी बदलाव से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति लेना आवश्यक था.
सतीशन सरकार का कहना है कि उसने अपनी आपत्ति दर्ज करा दी है और अब इस सौदे की राष्ट्रीय सुरक्षा तथा एकाधिकार से जुड़े पहलुओं के मद्देनजर जांच की जा रही है. सतीशन ने पहली जुलाई को विधानसभा में कहा, ''राज्य सरकार को पहले से सूचित किए बिना अदाणी समूह ने यह सौदा किया. हिस्सेदारी में बदलाव करने से पहले उन्हें राज्य सरकार को जानकारी देना आवश्यक है.'' वहीं, एपीएसईजेड ने दस्तावेज जारी कर कहा कि इस प्रक्रिया के तहत पहले उसे बाजार नियामक सेबी को इस सौदे की सूचना देनी होती है और उसके बाद राज्य सरकार की मंजूरी लेनी है.
वहीं, सीपीएम की अगुआई वाला विपक्ष सतीशन और अदाणी समूह के बीच 'गुप्त सौदे' का आरोप लगा रहा है. इस आरोप को और बल एक पुरानी अटकल से मिला है. दरअसल, कहा जा रहा कि सतीशन ने 1 मई को विधानसभा चुनाव नतीजे घोषित होने से तीन दिन पहले कथित तौर पर एक निजी विमान से मंगलोर की यात्रा की थी और वहां उन्होंने अदाणी समूह के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की. कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भी इस सौदे को राज्य की जनता के हितों के खिलाफ करार दिया है.
वैसे, रियायत समझौता निर्माण अवधि और परिचालन के पहले साल के बाद अदाणी समूह को अपनी हिस्सेदारी का 74 फीसद तक हस्तांतरित करने की अनुमति देता है. मौजूदा विवाद सिर्फ इसको लेकर है कि समझौते में निर्धारित पूर्व स्वीकृति की प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं.
ओमन चांडी सरकार (2011-16) के लिए मूल समझौते पर बातचीत करने वाले और बाद में पिनाराई विजयन सरकार (2016-26) के विशेष प्रतिनिधि रहे के.वी. थॉमस इस सौदे को वैध मानते हैं. उन्होंने कहा, ''यह सौदा बंदरगाह के तेज विकास में मदद करेगा.'' एपीएसईजेड का भी कहना है कि यह रणनीतिक साझेदारी ''उल्लेखनीय लाभ पहुंचाएगी'' और ''दक्षिण-पूर्व एशिया के केंद्रों'' से मुकाबला तथा पूर्वी अफ्रीका के व्यापारिक मार्गों पर ''मौजूदगी को मजबूत'' करने में मदद करेगी.
फिलहाल विझिंजम बंदरगाह की क्षमता 16 लाख ट्वेंटी-फुट इक्विलेंट यूनिट्स (टीईयू) की है. इसका विस्तार पूरा होने पर 2029 तक इसकी क्षमता बढ़कर 57 लाख टीईयू हो जाएगी. अगर यह सौदा सारी अड़चनें दूर कर लेता है तो एपीएसईजेड की हिस्सेदारी घटकर 51 फीसद रह जाएगी. मगर सतीशन की सियासी पूंजी कितनी दांव पर लगी है, इसका आकलन अभी मुश्किल है.