बद्रीनाथ में भी चंदा चोर

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद उत्तराखंड स्थित पवित्र बद्रीनाथ धाम में भी दान में हेराफेरी और वीआइपी दर्शन के नाम पर वसूली के गंभीर आरोप

भगवान को धोखा लखपत बुटोला बद्रीनाथ में चढ़ावे की गड़बड़ी के खिलाफ सत्याग्रह की बात करते हुए

- एम. सी. पांडेय

अयोध्या के राम मंदिर में हाल में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद अब उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में भी दान और चढ़ावे में हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं. इन आरोपों के बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने जांच समिति का गठन कर दिया था. समिति ने चढ़ावे में चोरी की पुष्टि होने के बाद आरोपी, मंदिर समिति अध्यक्ष के पूर्व निजी सहायक प्रमोद नौटियाल के खिलाफ बद्रीनाथ थाने में 8 जुलाई को एफआइआर दर्ज करा दी.

नौटियाल पर आरोप है कि उसने 2 जुलाई को सुबह 9 बजे से 9:30 बजे के बीच मंदिर के दान-पात्र (थाली भेंट) की गिनती के दौरान आरती की थाली से पैसे निकाल लिए. समिति ने नौटियाल को निलंबित कर दिया. पुलिस टीम ने भी बद्रीनाथ धाम पहुंचकर सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त कार्रवाई की बात कही है तो स्थानीय विधायक ने उपवास कर हाइकोर्ट जज से जांच कराने की मांग उठाई है.

बद्रीनाथ मंदिर में दान की रकम में गड़बड़ी का मामला उस वक्त सामने आया जब भैरव सेना नाम के संगठन ने मंदिर समिति से इसकी शिकायत की. भैरव सेना ने मंदिर समिति के अधिकारियों पर चढ़ावे के पैसों के गबन और हेराफेरी का आरोप लगाया. आरोपों में मंदिर समिति अध्यक्ष के निजी सचिव का नाम चढावा चोरी में आया.

समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस प्रकरण में नाम आते ही स्पष्ट किया कि जिस कर्मचारी पर आरोप लगा है वह उनका निजी सचिव नहीं बल्कि एक नियमित कर्मचारी है. भैरव सेना के संस्थापक संदीप खत्री का कहना है कि मामले को सार्वजनिक करने के बाद से पुलिस लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर रखने में लगी है. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने और उनको ज्ञापन सौंपने के लिए जाने से भी पुलिस रोक रही है.

मामले के सियासी रूप से तूल पकड़ता देख मुख्यमंत्री धामी भी ऐक्शन मूड में दिखे. उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच के लिए गढ़वाल के कमिशनर आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है. समिति को 15 दिन में रिपोर्ट शासन को सौंपनी है.

धामी ने हरिद्वार में राम कथा गा रहे मोरारी बापू से आशीर्वाद लेने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि मंदिर में चोरी जैसे प्रकरण के दोषियों को किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने कहा कि पुलिस अपना काम कर रही है. उन्होंने आश्वस्त किया कि मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी को गोहत्या और माता-पिता की हत्या के बराबर का अपराध बताया.

उधर, बद्रीनाथ से कांग्रेस के विधायक लखपत सिंह बुटोला ने 7 जुलाई को ज्योतिर्मठ में अपने समर्थकों के साथ उपवास किया. दूसरे ही दिन वे देहरादून पहुंचे और मीडिया से उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच हाइकोर्ट के तीन जजों की विशेष समिति से कराई जानी चाहिए. बुटोला का कहना था कि ''चारधाम यात्रा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और चढ़ावे के रखरखाव तथा उसका लेखा-जोखा रखने में गंभीर लापरवाही बरती गई है.''

बातचीत के दौरान बुटोला अत्यंत भावुक भी हो गए. उन्होंने कहा,''मैं इस पवित्र और पावन भूमि का प्रतिनिधित्व करता हूं, जहां पर साक्षात् भगवान विष्णु का बैकुंठ धाम है, जहां गुरुओं की तपोभूमि हेमकुंड साहिब है. लेकिन इस देव स्थान के पवित्र मंदिरों में चढ़ावे की चोरी हो रही है. देश-विदेश के करोड़ों सनातनियों के साथ उनका मन इससे काफी दुखी है. मामले में केवल एक निजी सहायक को निलंबित कर कार्रवाई पूरी नहीं मानी जा सकती.'' बुटोला ने कहा कि इस मामले में सीधे-सीधे मुख्यमंत्री दोषी हैं और यह पूरा षड्यंत्र प्रदेश सरकार की शह पर रचा गया.

इस विवाद के अलावा बद्रीनाथ धाम में वीआइपी दर्शन के लिए शुल्क वसूली भी सवालों के घेरे में आ गई है. इससे एकत्र धनराशि के उपयोग को लेकर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं. आरोप है कि धाम में बिना बीकेटीसी के प्रस्ताव के प्रति व्यक्ति 1,100 रुपए लेकर बैक डोर से लोगों को दर्शन कराए गए. इस पर सीईओ का कहना है कि भीड़ बढ़ने पर यह व्यवस्था की गई थी और इसके लिए रसीद भी दी जाती है. विवाद के केंद्र में भी निजी सहायक प्रमोद नौटियाल का नाम सामने आ रहा है. आरोप है कि प्रोटोकॉल व्यवस्था संभालने के दौरान उसने वीआइपी दर्शन के लिए शुल्क आधारित व्यवस्था लागू कराई. शिकायत होने के बाद अब इस राशि के ऑडिट की बात कही जा रही है. 

पैसों से जुड़े इन दोनों मुद्दों के एक साथ सामने आने से इस पवित्र धाम का प्रबंधन सवालों के दायरे में आ गया है और श्रद्धालु इसका प्रभावी समाधान चाह रहे हैं.

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