इतिहास पर जंग
जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश के भारत में विलय में जवाहरलाल नेहरू की भूमिका को लेकर केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू और कांग्रेस के मीडिया प्रभारी जयराम रमेश में जंग छिड़ गई

जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश के भारत में विलय में जवाहरलाल नेहरू की भूमिका को लेकर केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू और कांग्रेस के मीडिया प्रभारी जयराम रमेश में जंग छिड़ गई. 27 अक्तूबर को रिजिजू ने दावा किया कि कश्मीर के शासक महाराजा हरि सिंह भारत में मिलना चाहते थे, पर नेहरू शुरू में अनिच्छुक थे. हरि सिंह के बेटे व कांग्रेस नेता कर्ण सिंह ने भी कहा कि विलय में देरी के लिए उनके पिता दोषी नहीं थे. चार दिन बाद रिजिजू ने कह दिया कि नेहरू तवांग के भारत में मिलने से खुश नहीं थे. तब रमेश ने नेहरू के टेलीग्राम समेत कई दस्तावेज पेश किए और कहा कि रिजिजू 'झूठ फैला रहे' हैं. उन्होंने अंग्रेजी के हिस्टोरियन और डिस्टॉर्शन को मिलाकर एक नया शब्द तक गढ़ डाला—डिस्टोरियन.
''मैं पार्टी का गुलाम, प्रताप जानें वे किसके गुलाम''
राजस्थान की सियासत में इन दिनों गुलाम और गुलाम नबी छाए हुए हैं. गहलोत खेमे से जुड़े खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास (बाएं, ऊपर) ने अपनी ही सरकार के भूजल मंत्री महेश जोशी को गुलाम कह दिया. दरअसल, प्रताप सिंह ने अफसरों की एसीआर भरने का अधिकार मंत्रियों को देने की वकालत करते हुए सीएम को पत्र लिखा था. जवाब में जोशी ने कहा, ''मेरे विभाग के अफसरों की एसीआर तो मैं ही भरता हूं.'' इस पर प्रताप सिंह ने कहा, ''कोई मंत्री किसी अफसर की एसीआर नहीं भरता, जोशी ने तो गुलामी करने का ठेका ले रखा है.'' अब जोशी कहां रुकने वाले थे. उन्होंने भी कह दिया, ''हां, मैं कांग्रेस पार्टी का गुलाम हूं. प्रताप किसके गुलाम हैं वे ही जानें.''
ओवैसी का बदला
लालू प्रसाद के गृह नगर में गोपालगंज सीट पर राजद की कम अंतर से हार के बाद पटना में 'ओवैसी का बदला' जैसे संदेश व्हाट्सऐप पर फैल हो रहे थे. नवंबर 2020 में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन साधारण बहुमत से चूक गई थी तो उन्होंने इसका ठीकरा अल्पसंख्यकों की बड़ी आबादी वाली पांच सीटों को जीतने वाली असदुद्दीन ओवैसी की एआइएमआइएम पर फोड़ा था. जून 2022 में बदला लेते हुए तेजस्वी ने एआइएमआइएम के पांच में से चार विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल करा लिया था. लगता है ओवैसी की पार्टी ने भी उसका बदला ले लिया है. पार्टी के उम्मीदवार ने गोपालगंज में 12,000 वोट हासिल करके राजद पर 2,000 से भी कम वोटों से भाजपा की जीत सुनिश्चित कर दी.
निशाने पर अफसर
मुरादाबाद मंडल कमिशनर आंजनेय कुमार सिंह 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान रामपुर के डीएम थे. आंजनेय पर टिप्पणी के हेट स्पीच के मामले में ही अब आजम खान की विधानसभा सदस्यता चली गई. यूपी में आंजनेय की छह साल की प्रतिनियुक्ति 2021 में पूरी होने के बाद केंद्र ने नियमों में ढील देते हुए दो साल की प्रतिनियुक्ति बढ़ा दी थी. इसी वर्ष रामपुर में हुए लोकसभा उपचुनाव में सपा ने चुनाव आयोग से आंजनेय की शिकायत की थी. अब रामपुर विधानसभा उपचुनाव की घोषणा होते ही वे फिर सपा के निशाने पर हैं. सपा नेताओं का कहना है कि उनके रहते निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकता.
डीजीपी की दौड़ और जहांगीरी घंटा
बिहार में पुलिस महानिदेशक पद पर एक से एक दिलचस्प अफसर तैनात होते रहे हैं. पिछले डीजीपी जो थे उन्होंने पहले पद पर रहते नशामुक्ति अभियान चलाया, फिर एक अभिनेता को न्याय दिलाने की मुहिम के अगुआ बने. फिर चुनाव लड़ा, हार गए तो बाबा बनकर आजकल प्रवचन दे रहे हैं. जो डीजीपी आजकल है, उनके साथ फर्जी चीफ जस्टिस ने धोखाधड़ी की और उनसे गलत फैसला करवा लिया. वे जल्द रिटायर हो रहे हैं, इसके बाद जिन लोगों का डीजीपी बनने का नंबर है, उनमें से एक ऐसे अधिकारी हैं, जिन्होंने आईजी रहते अपने आवास पर जहांगीरी घंटा लगवा लिया था. मगर उनके साथ दिक्कत है कि एक पुराने मामले में लापरवाही की सजा उन्हें मिली है और कई दफा वेतन वृद्धि रुकी है. वे बनते तो राज्य के डीजीपी की कतार में खुद भी अनूठे साबित होते. मगर लग रहा है कहीं वे डीजीपी बनते-बनते न रह जाएं.
—साथ में आशीष मिश्र, पुष्यमित्र, अमिताभ श्रीवास्तव और आनंद चौधरी