खास रपटः प्राइवेट रेल गलियारा
निजी पैसेंजर ट्रेनों के साथ रेलवे बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है हालांकि तंत्र में जड़ जमा चुकी समस्याओं से जूझते रेलवे को कड़े सुधारों की जरूरत

ग्रीन सिगनल
रेलवे का इरादा 109 रूट्स पर 151 निजी ट्रेन शुरू करने का है
ऑपरेटरों को किराया तय करने, डिब्बे खरीदने या लीज पर लेने का अधिकार होगा
8 सितंबर, 2020 को अर्हता आवेदन (आरएफक्यू) की आखिरी तारीख थी, नवंबर में निविदा जारी होने की उम्मीद
मार्च 2023 से 12 निजी ट्रेनों की पहली खेप चलने की उम्मीद
निजी मालगाड़ियां को भविष्य में अनुमति दी जाएगी और वे नए बन रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में चलेंगी
सुधार का रास्ता
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3 सितंबर 2020 को रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन को मंजूरी दी है. अब उसमें आठ की बजाए चार सदस्य और एक सीईओ होंगे. ये सदस्य इन्फ्रास्ट्रक्चर, परिचालन, डिब्बों का मामला और वित्त संभालेंगे. यह दुनिया के दूसरे रेल महकमों की तर्ज पर किया गया है.
दिसंबर, 2019 में आठ रेल कैडर सेवाओं को एक करके एक निकाय बनाया गया—भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा, जहां से नई नियुक्तियां की जाएंगी. लेकिन मौजूदा अफसरों को एकीकृत करना बड़ा दुश्वारी का काम है.
आरआइटीईएस सभी रेल निर्माण इकाइयों के कॉर्पोरेटीकरण और विलय का रोडमैप तैयार कर रहा है. यह प्रक्रिया रायबरेली, उत्तर प्रदेश में कोच फैक्ट्री से शुरू हो चुकी है
रेलवे डेवलपमेंट अथॉरिटी नाम के नियामक की मंजूरी मई, 2017 में हो चुकी है लेकिन इसमें आगे कोई प्रगति नहीं है
मुश्किल राह
पैसेंजर के मामले में रेलवे के हरेक रुपए के निवेश पर महज 57 पैसे की ही कमाई होती है माल ढुलाई पर क्रॉस सब्सिडी इसे गैर-प्रतिस्पर्धी बना देता है
पिछले दशकों में परिचालन अनुपात 90 फीसद से ऊपर रहा और इससे पूंजीगत विस्तार के लिए रकम ही नहीं बची
2015 में तब के रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने अतिरिक्त बजटीय संसाधन शुरू किए थे जिसने रुकी परियोजनाओं को पूरा करने में मदद दी