टेलीकॉमः संकट के सिग्नल
टेलीकॉमः संकट के सिग्नल

इस दशक की शुरुआत में हुए 2 जी स्पैक्ट्रम घोटाले के झटके के बाद से 1.5 लाख करोड़ का भारतीय मोबाइल टेलीफोन क्षेत्र अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है. ऐसे वक्त में जब रिलायंस जियो के लॉन्च के बाद इस उद्योग के एकीकरण की लहर हवा में उड़ गई, उद्योग की मूल्य निर्धारण क्षमता लगातार गिर रही है और पिछले छह महीनों में डेटा की कीमतों में 67 फीसदी की कटौती हुई है. यह इस क्षेत्र के लिए एक बुरी खबर है, जहां मुकेश अंबानी के नेतृत्व में जियो के इस वर्ष अप्रैल तक मुफ्त सेवाएं देकर भारी मूल्य प्रतिस्पर्द्धा शुरू करने के कारण कंपनियां पहले से ही गिरावट से जूझ रही हैं. बाजार के कुल राजस्व में 34 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली कंपनी एयरटेल का मुनाफा 2016-17 की पिछली तिमाही में 72 फीसदी की गिरावट के साथ 373.4 करोड़ रु. पर आ गया, क्योंकि ग्राहकों को बांधे रखने के लिए इसने अपना शुल्क घटा दिया था. वहीं इस वित्तीय वर्ष में वोडाफोन इंडिया के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 10 फीसदी की गिरावट आई. ब्रोकरेज कंपनी सीएलएसए के मुताबिक, भारतीय मोबाइल उद्योग का राजस्व पहली बार गिरकर वित्त वर्ष 2016-17 में 1.88 लाख करोड़ रु. पर आ गया है और वित्त वर्ष में आगे इसके गिरकर 1.84 लाख करोड़ रु. होने के आसार हैं.
राजस्व में गिरावट के अलावा दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को लाइसेंस के लिए मोटी फीस भरनी पड़ती है, स्पैक्ट्रम उपयोग के एवज में हर साल सरकार को शुल्क देना पड़ता है और उनके समायोजित सकल राजस्व के प्रतिशत के रूप में हर साल सरकार को नीलामी की किस्त का भुगतान करना पड़ता है. वित्त वर्ष 2016 में समायोजित सकल आय में महज 6.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि सरकार को किया जाने वाला भुगतान 24 फीसदी बढ़ गया. रिपोर्टें बताती हैं कि वर्ष 2010 से दूरसंचार उद्योग ने कुछ अग्रिम भुगतान और शेष 2028-29 तक के लिए विलंबित भुगतान की शर्त पर कुल 3.45 लाख करोड़ रुपए का स्पेक्ट्रम खरीदा है. आइडिया-वोडाफोन के विलय के बाद टाटा ने बताया है कि वह दूरसंचार व्यवसाय से बाहर निकल जाएगी और मुकेश के भाई अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस का कर्ज घटाने के लिए अपने दूरसंचार व्यवसाय का एयरसेल के साथ विलय करने के अब निरस्त हो चुके प्रयास के बाद पूरा दूरसंचार क्षेत्र मंथन के दौर से गुजर रहा है.
दूरसंचार उद्योग पांच लाख करोड़ रु. के कर्ज में फंसा है, टाटा टेलीसर्विसेज पर 34,000 करोड़ रु. और रिलायंस कम्युनिकेशंस पर 25,000 करोड़ रु. का कर्ज है. दूरसंचार क्षेत्र की इस हलचल से रोजगार पर असर पड़ रहा है, जिसकी स्थिति पहले से ही गंभीर बनी हुई है. टाटा टेली के बंद होने से पांच हजार रोजगार खत्म हो जाएंगे, जबकि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने 1,200 लोगों को निकाल दिया है और आइडिया व वोडाफोन, दोनों ही कंपनियां विलय के समय हजारों कर्मचारियों को निकालने की योजना बना रही हैं. दूरसंचार उद्योग में लगभग 1,50,000 रोजगार खत्म होने वाले हैं, क्योंकि वह तेजी से बढ़ती चुनौतियों के माहौल में लागत घटाने के लिए संघर्ष कर रहा है. क्रिसिल की एक रिपोर्ट बताती है कि ''डेटा ग्राहकों के लिए मूल्य घटाने की होड़ ने वायरलेस दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की आय को चोट पहुंचाई है, इनमें से कोई अभी उबर नहीं पाई है." क्रिसिल रिपोर्ट आगे बताती है कि एक बार जब यह होड़ खत्म होगी, तो इसके फायदे होंगे, जैसा कि रुझान पूरी दुनिया में देखा जाता है. बाजार की शीर्ष कंपनी प्रति उपयोगकर्ता औसतन उच्च राजस्व (एआरपीयू), प्रीमियम ग्राहकों का एक बड़ा हिस्सा और अपेक्षाकृत कम मेहनत में हासिल करती है. लेकिन हालात दुरुस्त होने तक दूरसंचार कंपनियां निरंतर गहरी परेशानी का सामना करेंगी.ढ