आनंद महिन्द्राः सड़क का सुल्तान
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने 1947 में विलीज की जीप का आयात शुरू किया था, जो द्वितीय विश्व युद्ध में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की गई थी.

बाजार के राहगीर
बतौर स्टील कारोबार की कंपनी, लुधियाना से 1945 में शुरुआत करने वाली एमऐंडएम को उस वक्त महिंद्रा ऐंड मोहम्मद के नाम से जाना जाता था. इसकी स्थापना दो भाइयों केसी और जेसी महिंद्रा तथा पार्टनर मलिक गुलाम मोहम्मद ने की थी. आजादी के बाद गुलाम मोहम्मद पाकिस्तान चले गए और वहां के पहले वित्त मंत्री हुए. 1948 में कंपनी का नाम बदलकर महिंद्रा ऐंड महिंद्रा कर दिया गया.
शुरुआती सबक
एमऐंडएम की कहानी भारत के ऑटोमोटिव क्षेत्र के विकास के साथ जुड़ी है, खासकर मल्टीयूटिलिटी और स्पोर्ट्स यूटिलिटी वाहनों के मामले में ऐसा ही है. कंपनी को बड़े बहुउपयोगी वाहनों की श्रेणी में कारोबारी लाभ दिखा और उसने ऐसे वाहनों को बनाना और बेचना शुरू कर दिया. इसकी शुरुआत उस वक्त हुई जब महिंद्रा को भारत में विलीज की जीप असेंबल करने का लाइसेंस मिला. भारत में पहले जीप निर्माता के तौर पर कंपनी की पहचान बनी और इसने ऐसे वाहनों के अपने अनुभव का इस्तेमाल वाहनों और कृषि के काम आने वाले ट्रैक्टर बनाने में किया.
पिछले कुछ वर्षों में कंपनी की नए उद्योगों में दिलचस्पी बढ़ी है. भारत में यह काइनेटिक मोटर्स का अधिग्रहण कर दोपहिया बाजार में उतरी. एमऐंडएम की रेवा इलेक्ट्रिक कार कंपनी में भी निर्णायक भागेदारी है और 2011 में इसने दक्षिण कोरिया की सांगयोंग मोटर कंपनी में नियंत्रात्मक हिस्सेदारी ली थी. इसने 2010-11 में ईपीसी इंडस्ट्रीज खरीदकर लघु ड्रिप सिंचाई क्षेत्र में प्रवेश किया. कुल 19 अरब डॉलर का महिंद्रा समूह एयरोस्पेस, ऑटो, रक्षा, वित्तीय सेवाओं आइटी और आतिथ्य क्षेत्र में भी कारोबार करता है.
अगुआ भूमिका
महिंद्रा समूह के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और विश्व बैंक के कारोबार संबंधी बोर्ड में भी रह चुके हैं. कंपनी का काम प्रबंध निदेशक पवन गोयनका देख रहे हैं. वे स्कॉर्पियो के विकास में काफी करीब से जुड़े रहे थे, जो भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी निर्मित एसयूवी है.