जासूसीः उलझ गए पड़ोसी के जाल में

पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में एक 'रॉ एजेंट' की गिरफ्तारी का दावा कर जताने की कोशिश की कि भारत इलाके में गड़बड़ी फैला रहा है.

पाकिस्तान ने 29 मार्च को इस्लामाबाद में एक भीड़-भरी सैन्य-असैन्य पत्रकार वार्ता में भारत के खिलाफ दुष्प्रचार का सबसे बड़ा हल्ला बोला. अधिकारियों ने वहां एक 'इकबालिया' वीडियो जारी किया, जो उनके मुताबिक कथित तौर पर उस भारतीय जासूस का है जो उनकी हिरासत में है. छह मिनट के वीडियो में 46 साल के कमांडर कुलभूषण जाधव ने ईरान के चाबहार बंदरगाह से पाकिस्तान के बलूचिस्तान सूबे के खिलाफ खुफिया ऑपरेशन छेड़ने की बात 'कबूल' की. जाधव ने दावा किया कि उन्हें पाकिस्तान से 2 मार्च को गिरफ्तार किया गया.

इसकी भी खास वजह थी कि क्यों यह प्रेस कॉन्फ्रेंस महज दो दिन पहले ईस्टर रविवार को लाहौर के एक सार्वजनिक पार्क में 69 लोगों की जान लेने वाले पाकिस्तानी तालिबान के आत्मघाती हमले से भी ज्यादा सुर्खियों में छाई रही. यह पड़ोस से आतंकवाद को प्रायोजित करने के खिलाफ दशकों के भारतीय सार्वजनिक गुस्से के बदले में पाकिस्तान का प्रत्युत्तर थी. भारत का गुस्सा कई वजहों से था—चाहे वह '26/11' के आतंकवादी हमलों के अकेले बचे हमलावर अजमल कसाब से सालों की जिरह के दौरान दिया गया ब्योरा हो या 2015 में जम्मू में बीएसएफ के काफिले पर हमला करते वक्त जिंदा पकड़ा गया आतंकवादी नवेद हो या 26/11 के साजिशकर्ता डेविड कोलमैन हेडली की हाल की वीडियो गवाही हो.

उधर जवाब में सालों तक बलूचिस्तान और संघ नियंत्रित जनजातीय क्षेत्रों में भारत पर अपने आदमी और हथियार भेजकर अशांति भड़काने की कोशिश करने का पाकिस्तानी आरोप कभी दमदार नहीं बन पाया. लेकिन इस बार पाकिस्तान अपने हाथ में 'प्रामाणिक' सबूत होने की डींग हांक रहा है. हालांकि भारतीय अधिकारियों ने इस वीडियो को बड़ी तत्परता के साथ खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा है कि ''वीडियो में दिख रहे शख्स को जो बयान देते दिखाया गया है, उसका कोई आधार नहीं है. उस शख्स का वीडियो में यह दावा करना, कि वह अपनी इच्छा से यह बयान दे रहा है, भी वीडियो की प्रामाणिकता को चुनौती देता है और साफ तौर पर उस व्यक्ति को सिखाए-पढ़ाए जाने की ओर इशारा करता है.''

विदेश मंत्रालय ने जाधव को भारतीय नौसेना का पूर्व अधिकारी बताया है जो ईरान में व्यवसाय कर रहा था. पाकिस्तान ने एक भारतीय पासपोर्ट के फोटो जारी किए हैं जिसमें फोटो तो जाधव की है लेकिन उस पर नाम हुसैन मुबारक पटेल का है. भारतीय अधिकारियों ने इसे फर्जी बताया है. इस्लामाबाद में पूर्व भारतीय उच्चायुक्त जी. पार्थसारथी कहते हैं, ''वे हिरासत में जो भी कहें, उसे अंतिम नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि वे दबाव में होंगे.'' विदेश मंत्रालय ने 25 मार्च को इस बात की भी पुष्टि की कि जाधव 2013 में रिटायर हो गए थे और फिर व्यवसाय करने लगे. उनका सरकार के साथ कोई नाता नहीं है.

मुंबई में उनके परिवार के मित्रों का कहना है कि वे मुंबई पुलिस के एक रिटायर्ड सहायक आयुक्त के पुत्र हैं. वे ईरान के चाबहार बंदरगाह क्षेत्र में रह रहे थे और उनकी चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र में ही कनमिडा ट्रेडिंग नाम की एक छोटी शिपिंग कंपनी भी है. उनकी कंपनी के पास 3,500 टन का एक पोत है जो कांडला बंदरगाह और बंदर अब्बास के बीच ट्रैक्टर के कलपुर्जे, डामर, चावल और गेहूं जैसे हल्के सामान लाता-ले जाता है. जाधव के पासपोर्ट पर चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए ईरान निवासी परमिट की मुहर थी. अंदेशा है कि उनका अपहरण किया गया होगा. विदेश मंत्रालय ने 29 मार्च के अपने बयान में कहा, ''जाधव की पाकिस्तान में मौजूदगी सवाल खड़े करती है जिसमें ईरान से उनके अपहरण की आशंका भी शामिल है.''

दोस्तों का कहना है कि जाधव ने 29 फरवरी को भारतीय समयानुसार शाम 4 बजे फोन पर आखिरी बार बात की थी. हैरानी की बात यह है कि उनके कथित रूप से पाकिस्तान में पाए जाने के कई दिन बाद भी उनके फोन की घंटी बजती रही थी. उनका पोत दो माह से भी ज्यादा वक्त से गायब है.

पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक (डीजी-आइएसपीआर) का इस प्रकरण से सिलसिलेवार तरीके से परदा उठाया जाना एक बहुत महत्वपूर्ण घटनाक्रम से ठीक पहले हुआ और वह था ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी की 25 मार्च को होने वाली पहली इस्लामाबाद यात्रा. डीजी-आइएसपीआर के एक प्रवक्ता ने 26 मार्च को बताया कि पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष जनरल राहील शरीफ ने रॉ की गतिविधियों का मसला ईरानी राष्ट्रपति के समक्ष उठाया. डीजी-आइएसपीआर प्रवक्ता ने कहा, ''फिक्र करने की बात है कि रॉ पाकिस्तान में सक्रिय है, खास तौर पर बलूचिस्तान में और कभी-कभी वह हमारे बिरादराना मुल्क ईरान की जमीन का भी इस्तेमाल करती है.'' यह ईरानियों के लिए चेतावनी थी, जिनके बारे में पाकिस्तान को लंबे समय से संदेह रहा है कि वे भारतीय खुफिया एजेंटों को शरण देते रहे हैं. हालांकि रूहानी ने इस मुद्दे पर बात होने से इनकार किया. उन्होंने इस्लामाबाद में पत्रकार वार्ता में कहा कि ''जब भी ईरान पाकिस्तान के नजदीक आता है तो इस तरह की अफवाहें फैलाई जाती हैं.''

25 मार्च को ही, जिस वक्त पाकिस्तान अपने कैदी के फोटोग्राफ जारी कर रहा था और उसके विदेश सचिव ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त गौतम बंबावाले को तलब कर इस बारे में विरोध जताया, उसी समय उत्तरी कोरिया के मीडिया ने एक पत्रकार वार्ता प्रसारित की जो कथित तौर पर अक्तूबर से हिरासत में रखे गए एक अमेरिकी नागरिक किम दोंग-चुल को लेकर थी. वह चीन और रूस के निकट एक विशेष आर्थिक क्षेत्र में कार्यरत व्यवसायी था. उसने कुबूल किया कि उसने सैन्य गोपनीय जानकारियां चुराईं थीं. इस पर, अमेरिकी विदेश विभाग ने प्रतिक्रिया ही नहीं दी.

पाकिस्तान ने जाधव को भारतीय उच्चायोग की मदद पाने की इजाजत नहीं दी है. भारतीय अधिकारियों का मानना है कि वह जाधव को पकड़े रखेगा और उससे यथासंभव अंतरराष्ट्रीय फायदा उठाने की कोशिश करेगा. एक पूर्व खुफिया अधिकारी का कहना है, ''वह उनके लिए प्यादा बना रहेगा. वे उसे जिंदा रखेंगे, उसे पेश करते रहेंगे और उसका इस्तेमाल हमारे खिलाफ अधिकतम दुष्प्रचार करने में करेंगे.''

1985 में पाकिस्तान ने एक भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह को गिरफ्तार किया था जिस पर पाकिस्तानी शहरों में विस्फोट करने का आरोप था. उसकी मौत की सजा को तो जेल में उम्र कैद में बदल दिया गया लेकिन 2013 में उसे जेल में ही अन्य कैदियों ने मार डाला था. उनके वकील, सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता सूरत सिंह सरबजीत सिंह को निर्दोष बताते हुए कहते हैं, ''पाकिस्तान में कैदियों को टॉर्चर करना और उनसे जबरदस्ती कुछ भी उगलवा लेना नई बात नहीं है. मुझे डर है कि कहीं ऐसा ही जाधव के साथ न हो.''

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