मध्य प्रदेशः भ्रष्ट बाबुओं पर डिजिटल गाज
भ्रष्ट अधिकारियों की करतूतों के वायरल हो रहे वीडियो और ऑडियो. इतने बड़े पैमाने पर भद पिटने के बाद अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कह रहे हैं कि जनता की नहीं सुनने वालों को वे छोड़ेंगे नहीं.

बात बीते अक्तूबर की है. मध्य प्रदेश के भिंड जिले के कलेक्टर मधुकर आग्नेय जनसुनवाई में बैठे थे. तभी अपनी खराब हो चुकी फसल के अवशेष लेकर आई एक महिला किसान रोने लगी. उसकी दयनीय हालत पर पिघलने की बजाए कलेक्टर ने सख्त लहजे में कहा, ''ठीक से बात करो. जब पानी नहीं था तो धान क्यों लगाया? किसने कहा था तुम्हें?''
इस घटनाक्रम को मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने चुपके-से रिकॉर्ड कर लिया. जल्द ही यह वायरल हो गया. खबर भोपाल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक भी पहुंची. उन्होंने आग्नेय को फौरन हटाने का आदेश दे दिया. मध्य प्रदेश में प्रशासनिक कामकाज से जुड़े ऐसे कई वाकयों के ऑडियो वायरल होने से सरकार को कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा है. यूं कहें कि एक अलग ही अंदाज में प्रदेश चर्चा में आ गया है.
दिसंबर में ही आइएएस अफसर जे.एस. मालपानी इसी तरह लपेटे में आ गए. उन पर आदिम जाति कल्याण विभाग का आयुक्त होते हुए बड़वानी में अपने अधीनस्थ सहायक विकास आयुक्त आर.के. श्रोती से कमिशन मांगने का आरोप है. वायरल हुए ऑडियो में उनके शब्द हैं, ''अकेले-अकेले खाओगे तो बदहजमी हो जाएगी.'' इस मामले की जांच अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया ने की थी.
निलंबित हो चुके मालपानी ने कहा कि यह बात उन्होंने मजाक में कही थी. उन्होंने ऑडियो के साथ छेड़छाड़ किए जाने और साजिश के तहत फंसाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा, निलंबित करने की बजाए मेरे खिलाफ विभागीय जांच करवाई जा सकती थी.'' श्रोती—वे भी निलंबित—का आरोप है कि आयुक्त के नाम पर भोपाल से पैसों को मांग की जा रही थी. यही वजह है कि उन्हें इस तरह का कदम उठाना पड़ा. वे कहते हैं, ''मैं अपने निलंबन को लेकर हैरान हूं. मैंने तो भ्रष्टाचार को ही उजागर किया.''
जबलपुर के मुख्य वन संरक्षक रहे अजीत कुमार श्रीवास्तव का मामला देखिए. इस ऑडियो में वे एक लकड़ी व्यापारी से 55 लाख रु. की रिश्वत मांग रहे थे, जिसके लकडिय़ों से भरे ट्रक को उन्होंने जब्त किया था. ऑडियो में पहले तो श्रीवास्तव ने व्यापारी से जमीन की मांग की और उसके बाद पूरी डील 55 लाख रु. में फाइनल की गई. व्यापारी ने बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया. पद से हटा दिए गए श्रीवास्तव भी इसे साजिश बता रहे हैं.
सोशल मीडिया पर जमकर देखी जाने वाली इन ऑडियो क्लिप ने भ्रष्ट अधिकारियों की नाक में दम कर दिया है. इस तरह के कई टेप सोशल मीडिया पर डालने वाले एक पत्रकार इससे जुड़े पहलुओं को स्पष्ट करते हैं, ''ऑडियो क्लिप के भोपाल पहुंचने पर अधिकारी पर कार्रवाई की संभावना बढ़ जाती है. जरूरी नहीं कि हर रिकॉर्डिग वायरल ही हो जाए लेकिन इसके बल पर अधिकारी से काम करवाना आसान हो जाता है. कई लोग इनके बल पर ब्लैकमेलिंग भी कर रहे हैं.''
राजनैतिक विश्लेषक गिरिजा शंकर बताते हैं कि तकनीक का इस तरह इस्तेमाल पहले भी हो रहा था लेकिन क्लिप के वायरल होने पर कारवाई भी हो रही है, इसलिए ऐसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. हालांकि वे संदेह भी जताते हैं: रिकॉर्ड करने वाले लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाने वाले नहीं बल्कि ज्यादातर निजी हितों के लिए ऐसा कर रहे हैं.''
हाल ही में बालाघाट के कलेक्टर वी. किरण गोपाल पर 16 लाख रु. की सागौन की लकड़ी अपने हैदराबाद में बन रहे मकान के लिए अवैध रूप से भेजने का आरोप लगा था. शिकायतकर्ता लांझी विधानसभा के पूर्व विधायक किशोर समरीते के पास डिजिटल सबूत भी मौजूद थे इसके बाद गोपाल को पद से हटा दिया गया. इस बारे में बीजेपी के एक नेता कहते हैं, ''भ्रष्टाचार में कमी आए या नहीं लेकिन इससे अधिकारियों में डर तो पैदा हो रहा है. यह अच्छा संकेत है.''
अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी परेशान हैं. ऐसे मामलों में उनका रुख कितना सख्त है, यह उनके सतना प्रवास में साफ था जब उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ''सबको ठीक कर दूंगा. जो भी जनता की नहीं सुनेगा, गरीबों के हक पर गड़बड़ी करेगा, उसे नौकरी करने लायक नहीं छोड़ूंगा.'' अफसर जब रंगे हाथ पकड़े जा रहे हों तो चारा ही क्या है?