मधुर स्वर की मलिका | मधुवंती बागची, 34 वर्ष |  गायिका, मुंबई

क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : धुरंधर और आजाद सरीखी फिल्मों के मधुर गानों और हाल ही ओ रोमियो के साथ 2025 और 2026 में अपने हिट गानों के जरिए वे बॉलीवुड के लोकप्रिय गानों की रैंकिंग में शिखर पर अडिग बनी हुईं.

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मधुवंती बागची

ऐसा कैसे होता है कि एक लड़की जिसने इंजीनियरिंग में मास्टर्स डिग्री ली, जो खुद अपने को अंतर्मुखी कहती है और जिसका संगीत सबसे पहले खुद अपने लिए है, वह हिंदी सिनेमा की सबसे पसंदीदा आवाज बन जाती है?

मधुवंती बागची के अपने शब्दों में, ऐसा “खब्ती सपने देखने” से होता है. यह समय की कसौटी पर खरा उतरा सिद्धांत है. वे कहती हैं, “एक दौर था जब मैंने गाने का कोई प्रोजेक्ट नहीं लिया, उसके बाद 2016 में अचानक एम.एम. कीरवानी का फोन आया.

शुरुआत में मुझे लगा कि कोई मजाक कर रहा है.” वे बताती हैं, “मैंने हैदराबाद में गाना रिकॉर्ड किया. वह फिल्म कभी रिलीज नहीं हुई, लेकिन लौटकर मुझे लगा कि इस पल का कोई न कोई मतलब तो जरूर होगा. मैंने तय किया कि करिअर बनाने के लिए मैं मुंबई निकलती हूं.”

वह सफर बहुत सारे जिंगल या विज्ञापन की छोटी-छोटी धुनों से शुरू हुआ. फिर लोकप्रियता में शिखर पर आने वाला स्त्री 2 का गाना ‘आज की रात’ आया. तब से दो सालों में बागची ने अपने गाए गानों की ऐसी फेहरिस्त तैयार कर ली है जिससे कोई भी रश्क करेगा.

वे पैरों को थिरकने पर मजबूर कर देने वाले गानों की सच्ची महारानी बन गई हैं. उनके हुनर का इससे बेहतर प्रमाण कुछ नहीं हो सकता कि उनके गाने उनके हिसाब से गढ़े गए लगते हैं. वे ऐसी जगह पहुंच गई हैं जहां फटकार कर सच बोल सकती हैं.

खासकर जब उद्योग में फिल्मी गाने रिकॉर्ड करने के लिए कलाकारों को पैसा नहीं देने का चलन अब भी कायम है.

बागची स्वीकार करती हैं कि वे व्यवस्था में औचक बदलाव नहीं ला सकतीं लेकिन इसके बजाए वे पक्षपात भरी स्थितियों से किनारा कर लेंगी और ऐसे संगीतकारों के साथ काम करेंगी “जिनके मन में कलाकारों के लिए इज्जत है.”

वे उन गानों को बहुत सोच-समझकर चुनती हैं जिन्हें वे अपनी आवाज देती हैं. वे कहती हैं, “यह थोड़ा अहंकारी लगता है, लेकिन मैं रोज यह सोचना गवारा नहीं कर सकती कि ‘ओह माइ गॉड, मुझे जल्द से जल्द एक हिट चाहिए और उसके लिए मुझे लोगों को मानो 15 कॉल करने पड़ेंगे’. या यह कि अगर मैं इसे ना कह देती हूं तो अमुक मेरे साथ काम नहीं करेगा या मेरे पास काम नहीं होगा.” अपनी काबिलियत पर भरोसे ने चूहा दौड़ से बचने में उनकी मदद की.

वे यह भी कहती हैं, “अगर मैं अपने कैटलॉग में भीड़ लगा लेती और बहुत सारे गाने गाती तो मैं अपने ऊपर बहुत ज्यादा दबाव डाल लेती और अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं गा पाती.”

यही बात उन्हें संगीत जगत में अलग और अजीब बना देती है, लेकिन किसी की पहचानी जा सकने वाली नकल बनने के बजाए वे ऐसी ही रहना चाहेंगी.    

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