शोहरत की दहलीज पर | कल्याणी प्रियदर्शन, 33 वर्ष | अभिनेत्री, चेन्नै

क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : मलयाली सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई (300 करोड़ रुपए) बटोरने वाली फिल्म लोका चैप्टर 1 : चंद्रा को अपने दम पर कामयाबी दिलाना, यह साबित करना कि महिला-केंद्रित फिल्में भी देश भर में कामयाबी हासिल कर सकती हैं.

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कल्याणी प्रियदर्शन

अपने करिअर और मलयालम सिनेमा की भी निर्णायक फिल्म के बारे में अभिनेत्री कल्याणी प्रियदर्शन कहती हैं, “लोका ने मेरे सपनों को और बड़ा महसूस करवाया है.” 2025 की इस शानदार और रोमांचक फिल्म में उन्होंने वैंपायर सुपरहीरोइन की भूमिका अदा की, जिसकी बदौलत उन्हें केरल के बाहर भी मौके मिले.

वे कहती हैं, “मैं उन्हीं लोगों के साथ अपने को बैठा पाती हूं जिनकी मैं बरसों से प्रशंसक रही हूं. और भी दरवाजे खुल रहे हैं, जो पहले नहीं हुआ. अब मुझे और ज्यादा मेहनत करनी होगी.”

जाने-माने फिल्मकार प्रियदर्शन की बेटी कल्याणी की कामयाबी की राह कुछ ज्यादा ही लंबी रही. वे बताती हैं कि इस सफर का निर्णायक मोड़ जल्द ही आया जब देर रात अपने डैड के साथ एक बातचीत में उन्होंने उनसे कहा कि वे अभिनेत्री बनना चाहती हैं.

वे बताती हैं, “मैं कांप रही थी क्योंकि डैड कतई नहीं चाहते थे कि मैं या मेरा भाई फिल्मों में काम करें. जवाब में उन्होंने कहा, ‘तुम जो भी करना चाहोगी, उसमें मैं तुम्हारी सहायता करूंगा’.”

लोका की कामयाबी के साथ अपनी पसंद और विकल्पों को लेकर जिम्मेदारी का एहसास भी आया है. वे कहती हैं, “मैं हमेशा ऐसी ऐक्टर रही हूं जो लोगों को चौंकाते रहना चाहती है. मैं मानती हूं कि महान ऐक्टर बनने या महान ऐक्टर की तरह विकसित होने के लिए आपको सब कुछ करना आना चाहिए.”

किरदारों की नैतिकता पर फैसले देने के बजाए वे इस बात की पड़ताल करती हैं कि कहानी कितनी अच्छी है और उसके साथ वे कितने गहरे जुड़ पाती हैं.

इस बीच लोका का लहरदार असर पूरे भारतीय सिनेमा पर महसूस किया जा रहा है. ऐक्शन हीरोइन का नाम सामंथा की सितारा मौजूदगी वाली तेलुगु फिल्म मा इंति बंगारम और तमिल फिल्म ब्लास्ट में भी सबसे ऊपर लिखा गया. मगर कल्याणी को बहुत अच्छा लगेगा अगर फिल्म का मोल तय करने की कसौटी लैंगिक पहचान न हो.

वे कहती हैं, “मैं उम्मीद करती हूं कि हम महिला-प्रधान फिल्मों को अलग श्रेणी में रखने का विचार छोड़ देंगे. अच्छी कहानी बस अच्छी कहानी होती है.” महिलाओं को वे क्या सलाह देना चाहेंगी? “कामयाबी को कभी अपने सिर पर न चढ़ने दें और न ही नाकामी को कभी अपने दिल पर लें.”

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