सेहत की नई मिसाल | सुहासिनी संपत, 43 वर्ष | को-फाउंडर, योगा बार, बेंगलूरू

क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : सुहासिनी ने योगा बार को महज एक एनर्जी बार से बदलकर भारत के प्रमुख हेल्थ फूड ब्रांडों में से एक बना दिया

the Entrepreneurs
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सुहासिनी संपत और अनिंदिता संपत एक ऐसे आम दक्षिण भारतीय परिवार में पलीं-बढ़ीं जहां पढ़ाई-लिखाई पर काफी जोर दिया जाता था. ये दोनों बहनें बेंगलूरू की कंपनी स्प्राउटलाइफ फूड्स की को-फाउंडर हैं और इस कंपनी के पास योगा बार ब्रांड है.

उन्हें हमेशा सिखाया गया कि वे बेहतरीन के लिए प्रयास करें. उनके पिता अक्सर उनसे पूछते, “क्या तुमने उस स्थिति तक पहुंच गई हो?” उनका मानना था कि हर किसी को, चाहे वह लड़का हो या लड़की, आत्मनिर्भर होना चाहिए.

लोगों से वे अक्सर कहते, “तुम्हें खुद पर ही भरोसा करना है.” इस सोच ने न सिर्फ उनके पारिवारिक मूल्यों को आकार दिया बल्कि उनकी बौद्धिक जिज्ञासा और सीखने की ललक को भी बढ़ावा दिया.

उनकी इसी जिज्ञासा ने भारत के पैकेज्ड फूड मार्केट में गैप खोजने में मदद की. दरअसल, न्यूयॉर्क में—जहां सुहासिनी पढ़ाई कर रही थीं और अनिंदिता नौकरी—उन्हें अच्छे स्नैक बार और हेल्दी ब्रेकफास्ट आसानी से मिल जाते थे, पर भारत में काफी कम प्रोडक्ट मिले.

इसे बदलने के इरादे से दोनों बहनें देश लौटीं और तीन साल तक अच्छी सामग्री से पौष्टिक एवं सुविधाजनक फूड प्रोडक्ट बनाने में जुटी रहीं. साथ ही 2012 में सुहासिनी ने स्टार्टअप्स के लिए अकाउंटिंग सर्विस कंपनी फिनएडवांटेज शुरू की.

इससे उन्हें रकम जुटाने, बिजनेस बढ़ाने एवं आंत्रप्रेन्योर्स के साथ काम करने का अनुभव मिला. अगस्त 2015 में इन बहनों ने मल्टीग्रेन एनर्जी बार के साथ योगा बार लॉन्च किया, जो कंपनी का सबसे ज्यादा बिकने वाला प्रोडक्ट बन गया.

आज योगा बार के मूसली, ओट्स, प्रोटीन बार, प्लांट प्रोटीन, प्रोटीन शेक, पीनट बटर, ड्राइ फ्रूट, सीड जैसे कई प्रोडक्ट बेचे जाते हैं. ये प्रोडक्ट 30 से ज्यादा शहरों में 7,500 से ज्यादा स्टोर्स पर उपलब्ध हैं और नेपाल, श्रीलंका, मालदीव, यूएई को निर्यात किए जाते हैं.

कंपनी ने फायरसाइड वेंचर्स और एलिवेशन कैपिटल जैसे बड़े निवेशकों को आकर्षित किया. 2023 में एफएमसीजी की बड़ी कंपनी आइटीसी ने स्प्राउटलाइफ फूड्स की 39.4 फीसद हिस्सेदारी खरीदी जो चरणबद्ध अधिग्रहण का हिस्सा है. उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में 500 करोड़ रुपए की कीमत पर इसका पूरा मालिकाना हक आइटीसी के पास आ जाएगा.

मई तक वह बिजनेस संभालने के बाद सुहासिनी अब अपने अगले आंत्रप्रेन्योरियल वेंचर की ओर बढ़ रही हैं. और, वे जानती हैं कि यह एक कंज्यूमर ब्रांड होगा क्योंकि इसी क्षेत्र को लेकर उनमें सबसे ज्यादा जुनून है.

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