विंध्य पार से आकर छा गईं | रश्मिका मंदाना, 30 वर्ष | अभिनेत्री, हैदराबाद

क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : पिछले साल उन्होंने संभाजी के जीवन पर बनी फिल्म छावा से बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया और द गर्लफ्रेंड जैसी कम बजट की फिल्म में संवेदनशील मुख्य भूमिका निभाकर फिल्म जगत में अपना दबदबा कायम किया

Actress
रश्मिका मंदाना (फोटो- साहिल बहल)

काफी समय तक पुष्पा, एनिमल और छावा जैसी नायक-केंद्रित ब्लॉकबस्टर फिल्मों में एक खूबसूरत और भरोसेमंद प्रेमिका की भूमिका रश्मिका मंदाना की पहचान बनी रही. फिर द गर्लफ्रेंड (2025) आई, जो पूरी तरह उनके कंधों पर टिकी एक छोटी, स्वतंत्र तेलुगु फिल्म थी. इसमें दर्शकों को इस अभिनेत्री की असली काबिलियत देखने का मौका मिला.

भावनात्मक रूप से एक पीड़ादायक रिश्ते में फंसी और खुद को व्यक्त करने में असमर्थ एक नादान कॉलेज छात्रा का किरदार निभाते हुए मंदाना ने खुद पर हावी एक गुस्सैल साथी के साथ रहने की घबराहट और मानसिक थकान को बखूबी दर्शाया.

मंदाना कहती हैं, “युवावस्था के शुरुआती दौर में आपको पता नहीं होता कि अस्वीकार्य होने की स्थिति में आपको 'ना' कहना होता है. आपको यही लगता है कि जो मिल रहा है उससे सहमत होना पड़ेगा और जिंदगी ऐसी ही होती है.”

अपनी पहली सोलो फिल्म के तौर पर इसे चुनना एक साहसिक फैसला था. लेकिन मंदाना के लिए यह एक ऐसी “अहम कहानी” है जिसे बताया जाना जरूरी था और इसने उन्हें बतौर कलाकार अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने का मौका दिया. वे कहती हैं, “जब आप किसी फिल्म में लीड रोल में होते हैं तो किरदार की परतों और बारीकियों में उतरने की काफी गुंजाइश रहती है.”

वे इंडस्ट्री की सबसे व्यस्त अभिनेत्रियों में से एक हैं जिनकी पिछले साल विभिन्न भाषाओं (कन्नड़, हिंदी, तेलुगु, तमिल) में पांच फिल्में रिलीज हुईं. मंदाना अभी कूल्हे की चोट से उबर रही हैं. वे हंसते हुए कहती हैं, “यह कुदरत का तरीका है. आराम की जरूरत के समय अगर आप खुद ब्रेक नहीं लेंगे तो वह कुछ न कुछ ऐसी स्थिति बना देगा कि आपके पास कोई और रास्ता ही न बचे.”

हाल ही अभिनेता विजय देवरकोंडा से शादी करने वाली मंदाना अपने निजी जीवन और पेशे के बीच संतुलन बनाने का पूरा प्रयास करती हैं. वे कहती हैं, “मैं शूटिंग पर समय से जाती हूं और पैक-अप के बाद काम का बोझ घर नहीं लाती. मैं दोनों को अलग-अलग संभालने में पूरी तरह सक्षम हूं.”

कन्नड़ हिट किरिक पार्टी से शुरू हुई अपनी यात्रा को मुड़कर देखते हुए वे संतोष की भावना से भर जाती हैं. कहती हैं, “मैंने खुद अपने बारे में बहुत कुछ सीखा है. मैं वैसी ही हूं जो मैं एक दशक पहले बनना चाहती थी. मेरे पास सफलता, प्यार और सहकर्मियों और दर्शकों से मिला सम्मान है. मुझे उम्मीद है कि इसे आगे भी इसी तरह जारी रखूंगी.”‌

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