उनका नाम समाधान | हरिचांदना दसारी, 42 वर्ष | सचिव, शक्ति विभाग, तेलंगाना, हैदराबाद

क्या है जो बनाता है उन्हें सिरमौर : आइएएस के 16 सालों के कार्यकाल में हरिचांदना ने लोगों की रोजमर्रा की चुनौतियों को टिकाऊ समाधानों में बदला. इसमें अभी ताजा-ताजा 92 लाख कामगारों के लिए फायदेमंद तेलंगाना के न्यूनतम मजदूरी सुधार की अगुआई शामिल

हरिचांदना दसारी

वर्ष 2010 के बैच की आइएएस अधिकारी हरिचांदना 2020 और 2023 के बीच नारायणपेट की जिला कलेक्टर के तौर पर अपने कार्यकाल की एक घटना याद करती हैं, जिसमें उनके मुताबिक जनसेवा का सार निहित है.

वे साप्ताहिक हाट देखने गई थीं, तभी वहां एक महिला उनके पास आई और कहा कि हाल ही में लाए गए पर्यावरण के अनुकूल चलते-फिरते शी-टॉयलेट या महिला शौचालय की बदौलत ही वह फिर से अपनी उपज बेच पा रही है.

इससे पहले दूर-दूर तक फैले इस बाजार में शौच की जगह न होने के कारण बाजार से दूर जाना पड़ता था. इसी के चलते वे उपज बेचने नहीं आ पाती थीं और रोजी से वंचित थीं.

हरिचांदना कहती हैं, “उसके इस एक वाक्य ने मुझे राजकाज के बारे में उससे कहीं ज्यादा सिखाया जितना किसी फाइल ने कभी भी सिखाया.”

रोजमर्रा की समस्याओं को सुलझाने और राजकाज को ज्यादा सुलभ और समावेशी बनाने पर यह जोर ही उनके 16 साल लंबे करिअर की पहचान बन गया है.

अप्रैल 2026 में तेलंगाना के श्रम, रोजगार, प्रशिक्षण और कारखाना विभाग की कमान संभालने के बाद से ही वे शक्ति—यानी कौशल, मानव पूंजी और ज्ञान प्रशिक्षण पहलकदमियों—में इसके कायापलट की देखरेख करती आ रही हैं. विभाग का नाम और पहचान बदलने के अलावा उन्होंने राज्य के पहले समग्र न्यूनतम मजदूरी संशोधन को अंजाम दिया.

यह वह सुधार है जिसे अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने मान्यता दी और जिसका फायदा 92 लाख से ज्यादा कामगारों को मिलने की उम्मीद है. वे कौशल विकास का एकीकृत ढांचा भी विकसित कर रही हैं और 40,000 से ज्यादा गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों के लिए कल्याणकारी उपायों की तजवीज भी कर रही हैं.

जनसेवा उनके परिवार की ही परंपरा है. पूर्व आइएएस अफसर की बेटी और आइआरएस अधिकारी की पत्नी हरिचांदना की इस बुनियाद में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और हैदराबाद विश्वविद्यालय से लिए गए पर्यावरणीय अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान के अकादमिक प्रशिक्षण ने चार चांद लगा दिए.

अपनी मौजूदा तैनाती से पहले हैदराबाद की जिला कलेक्टर के तौर पर अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने व्हाट्सऐप प्रजावाणी की शुरुआत की, जिसके जरिए वरिष्ठ नागरिक और विकलांग व्यक्ति अपनी शिकायतें दूर बैठे-बैठे ही दर्ज कर पाते हैं.

प्रोजेक्ट शक्ति लॉन्च किया, जिसमें स्कूलों में पढ़ने वाली 60,000 से ज्यादा लड़कियों को दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले सैनिटरी पैड किट दिए गए; और कलेक्ट्रेट में समता रसोई की स्थापना की, जिसे ट्रांसजेंडर और विकलांग व्यक्ति चलाते हैं. एक के बाद एक हर नई तैनाती के साथ उनके काम का फलक बड़ा ही होता गया.

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