मशहूर करता मुक्का | जैस्मिन लंबोरिया, 24 वर्ष | मुक्केबाज, भिवानी, हरियाणा
क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : मुक्केबाजों के खानदान से आने वाली जैस्मिन लंबोरिया ने 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में 57 किलो भार वर्ग में स्वर्ण जीतने के अलावा 2025 की विश्व चैंपियनशिप भी अपने नाम की थी

जैस्मिन लंबोरिया (फोटो- चंद्रदीप कुमार)
किसी खिलाड़ी को शारीरिक जीत के साथ-साथ मानसिक जीत से भी उतनी ही ताकत मिलती है. इस साल राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली मुक्केबाज जैस्मिन लंबोरिया ने यह बात बार-बार सीखी है, मसलन 2023 के एशियाई खेलों में क्वार्टर फाइनल में मिली हार.
वे याद करती हैं, “वह मेरे लिए सबसे बड़ा निर्णायक मोड़ था. उससे पहले मैंने अपनी किसी भी उपलब्धि से इतना कुछ नहीं सीखा था. मैं बहुत निराश थी. मगर फिर आप उठकर खड़े होते हैं, आकलन करते हैं कि कहां, क्या गलत हुआ और आगे बढ़ते हैं.”
जैस्मिन पुणे स्थित आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट के अपने मनोवैज्ञानिक को इसका श्रेय देती हैं, जिन्होंने उनको अपने फैसलों पर भरोसा करना सिखाया, चाहे वे फैसले जीत की ओर ले जाएं या हार की ओर.
वे बताती हैं, “अपने सत्रों के दौरान मैंने सीखा कि एक खिलाड़ी के रूप में हमारा करिअर छोटा होता है, इसलिए इसे जीने का एकमात्र तरीका यही है कि बिना किसी झिझक के अपना सर्वश्रेष्ठ झोंक दिया जाए.”
2024 ओलंपिक क्वालिफिकेशन के दौरान 60 किलो की बजाए 57 किलोग्राम भार वर्ग में उतरने का उनका फैसला खासा फायदेमंद रहा. दो साल बाद उन्होंने 2025 की विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप और 2025 विश्व मुक्केबाजी कप, दोनों में स्वर्ण पदक जीता और 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में जीते कांस्य को इस बार उन्होंने स्वर्ण पदक में बदल दिया.
यह कामयाबी उनको कुछ हद तक रक्षात्मक रवैये से चिपके रहने की आदत छोड़ने से मिली. अब जब जैस्मिन पर मुक्कों की बौछार होती है तो वे भी पलटकर उसी तरह करारा जवाब देती हैं और प्रतिद्वंद्वियों को चौकन्ना रहने पर मजबूर कर देती हैं.