चक दे! सरपंच | नीरू यादव, 36 वर्ष | सरपंच, लांबी गांव झुंझुनूं, राजस्थान
क्या है जो बनाता है उन्हें सिरमौर : हॉकी के जरिए गांव की लड़कियों को सशक्त बनाया और यह पक्का किया कि पंचायत में महिलाओं की आवाज सुनी जाए

नीरू यादव (फोटो- चंद्रदीप कुमार)
पारंपरिक दामण (स्कर्ट) और कुर्ती, सिर पर ओढ़नी और हाथ में हॉकी स्टिक. नीरू यादव गांव के धूल भरे मैदान में एकदम से पहचान में आ जाती हैं.
हरियाणा के नारनौल में जन्मी और राजस्थान के लांबी गांव में ब्याही गई, इस पूर्व स्कूल शिक्षक को उस समय अपनी राह दिखाई दी जब उन्होंने देखा कि घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को पुरुषों के दबदबे वाले गांव में बुजुर्गों के सामने बोलने तक नहीं दिया जाता.
उनके शब्दों में, “इससे मुझे एहसास हुआ कि एक सरपंच का काम सिर्फ विकास पर ध्यान देना नहीं बल्कि उससे कहीं ज्यादा है.” लेकिन जाति की तल्ख राजनीति में बंटे गांव में पंचायत चुनाव लड़ना बिल्कुल भी आसान नहीं था.
कुछ लोगों ने तो उनके “बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे” होने (गणित में एमएससी के साथ बीएड और एमएड की डिग्रियां) का भी विरोध किया और तर्क दिया कि आखिरकार वे भी जयपुर चली जाएंगी, जहां उनके पति सार्वजनिक निर्माण विभाग में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के तौर पर तैनात थे. लेकिन ये सब बातें उन्हें 2020 में चुनाव मैदान में उतरने से नहीं रोक सकीं. उनके दूसरे बच्चे के जन्म के ठीक दो दिन बाद नतीजे घोषित किए गए.
सरपंच बनने के बाद से ही नीरू ने यह पक्का किया है कि पंचायत में आने वाले परिवार के झगड़ों में महिलाओं की बात सुनी जाए. लेकिन उनका सबसे बड़ा असर हॉकी के जरिए दिखा है.
उन्होंने सामजिक विरोध, जिसमें स्पोर्ट्स शॉर्ट्स पहनने पर ऐतराज भी शामिल है, के बावजूद गांव की लड़कियों को हॉकी के लिए प्रोत्साहित किया.
उनका मानना है कि खेल के जरिए सरकारी नौकरियों में खेल कोटे का लाभ मिल सकता है. नीरू सरपंच के तौर पर मिलने वाले अपने मानदेय को लड़कियों की ट्रेनिंग के लिए दे देती हैं, जबकि उनकी बेटी के नाम पर बना उनका एनजीओ अदित्रि फाउंडेशन कोच की तनख्वाह देता है.
अब कई लड़कियां अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेती हैं, और दो लड़कियां तो सीनियर नेशनल लेवल तक भी पहुंच चुकी हैं.
उतना ही अनूठा है उनका बर्तन बैंक, जिसमें स्टील के लगभग 8,000 बर्तन हैं. गांव वाले शादी-ब्याह और सामूहिक भोज के लिए इन्हें मुफ्त में ले जा सकते हैं, जिससे प्लास्टिक कचरा भी कम होता है और उनके पैसे भी बचते हैं.