बस चिड़िया की आंख | अंकिता भकत, 28 वर्ष | अंतरराष्ट्रीय रिकर्व तीरअंदाज ओलंपियन, सहायक प्रबंधक (खेल), टाटा स्टील कोलकाता
क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : भारत की टॉप रिकर्व तीरअंदाजों में से एक, कई विश्व कप पदक विजेता और एशियाई खेलों की कांस्य पदक विजेता, अंकिता भकत आर्थिक तंगी और खेल की चुनौतियों से उबरकर दूसरों के लिए प्रेरणा बनीं. अगला लक्ष्य-ओलंपिक विजय

अंकिता भकत (फोटो- एएफपी)
उन्होंने बड़ी सहजता से खुद को खेल के अनुरूप ढाल लिया. अंकिता भकत महज 10 साल की थीं जब वे अपने पिता के साथ उत्तरी कोलकाता के एक तीरअंदाजी मैदान में पहली बार पहुंचीं. धनुष-बाण देखते ही उनके मन में कुछ हलचल हुई.
जीवन की दिशा बदलने वाले उस क्षण को याद करते हुए वे कहती हैं, “धनुष-बाण मुझे पसंद आए, इसलिए मैंने तीरअंदाजी सीखने का फैसला किया.’’
उनकी गृहिणी मां और दुग्ध व्यवसायी पिता बेटी का सपना पूरा करने को उसके साथ खड़े रहे. लेकिन रिकर्व तीरअंदाजी महंगा खेल है. एक पेशेवर धनुष की कीमत हजारों रुपए होती है.
अंकिता छह साल तक इंडियन राउंड श्रेणी में हिस्सा लेती रहीं, जो लकड़ी के धनुषों के साथ इस खेल का एक पारंपरिक प्रारूप है और साथ ही ओलंपिक रिकर्व धनुष (जो सिरों पर बाहर की ओर मुड़ा होता है) खरीदने के लिए मदद की तलाश करती रहीं. 2014 में जमशेदपुर की टाटा आर्चरी एकेडमी में चुने जाने पर उन्हें वर्ल्ड क्लास कोचिंग मिली और अपना धनुष भी.
अंकिता ने 2015 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया. उनकी प्रतिभा ने उन्हें देश के शीर्ष रिकर्व तीरअंदाजों में शामिल करा दिया और वे सटीक निशाना साधती रहीं—हांग्जो एशियाई खेलों में कांस्य, पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व, 2025 में पहला व्यक्तिगत एशियाई चैंपियनशिप खिताब.
2026 में वे उस भारतीय टीम में शामिल थीं जिसने दक्षिण कोरिया और चीन को हराकर वर्ल्ड कप का स्वर्ण पदक जीता.
टाटा स्टील के खेल विभाग में कार्यरत अंकिता हर दिन रेंज पर छह से आठ घंटे बिताती हैं. तमाम पदक और सराहना हासिल करने के बावजूद उनका मानना है कि सबसे बड़ी उपलब्धि अभी बाकी है.
धनुष-बाण से प्यार करने वाली वह छोटी-सी लड़की अब ओलंपिक पोडियम के सबसे ऊंचे पायदान पर खड़े होने का सपना देख रही है.