जांबाज फाइटर | स्क्वाड्रन लीडर भावना कांत, 33 वर्ष | फाइटर पायलट, भारतीय वायु सेना
क्या है जो बनाता है उन्हें सिरमौर : भारत में महिला फाइटर पायलटों के पहले बैच का हिस्सा होने से लेकर वायु सेना का सबसे उत्कृष्ट फाइटर कॉम्बैट लीडर का कोर्स पूरा करने वाली पहली महिला बनने तक भावना के नाम के साथ पहले-पहल हासिल कई ऐतिहासिक उपलब्धियां जुड़ी हुई

स्क्वाड्रन लीडर भावना कांत (फोटो- आतिश पिल्लै)
भावना कांत (स्क्वाड्रन लीडर) ने भारतीय वायु सेना के इतिहास के साथ गहरे गुंथे अपने करिअर में अगस्त के पहले हफ्ते में पहले-पहल वाली एक और उपलब्धि जोड़ी.
ग्वालियर स्थित सामरिक और वायु युद्ध विकास प्रतिष्ठान में फाइटर कॉम्बैट लीडर (एफसीएल) का सर्वोत्कृष्ट कोर्स पूरा करके वे वायु सेना की पहली महिला ‘टॉप गन’ युद्धक पायलट बन गईं.
यह बेहद कड़ी मेहनत वाला कोर्स तजुर्बेकार लड़ाकू पायलटों को जटिल हवाई युद्ध अभियानों, उन्नत सामरिक कार्रवाइयों, अभियान की योजना बनाने, सामरिक फैसले लेने और युद्ध में अगुआई के लिए तैयार करता है.
बिहार के दरभंगा जिले में 1992 में जन्मी भावना ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन में इंजीनियर पिता के चरणचिह्नों पर चलते हुए 2014 में मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की.
कुछ वक्त उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में काम किया, पर उनकी महत्वाकांक्षा तो हमेशा उड़ान ही रही थी. वायु सेना की सामान्य प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने पारंपरिक इंजीनियरिंग के करिअर के बजाए मिलिटरी एविएशन या सैन्य विमानन का क्षेत्र चुना.
जून 2016 में वे भारत में महिला लड़ाकू पायलटों के ऐतिहासिक पहले बैच के हिस्से के तौर पर स्क्वाड्रन लीडर अवनि चतुर्वेदी और मोहना सिंह के साथ भारतीय वायु सेना में शामिल हुईं. किरण और हॉक प्रशिक्षक विमानों पर प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे मिग-21 बाइसन फाइटर स्ट्रीम में दाखिल हुईं.
उन्होंने अपनी पहली अकेली उड़ान मार्च 2018 में बाइसन पर भरी. एक साल बाद वे लड़ाकू विमान पर युद्ध अभियान के लिए जाने की योग्यता से लैस पहली भारतीय महिला फाइटर पायलट बनीं.
कॉकपिट से बाहर भी उनका मील के पत्थर गाड़ना जारी रहा. 2020 में उन्होंने अवनि और मोहना के साथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों नारी शक्ति पुरस्कार प्राप्त किया. 2021 की गणतंत्र दिवस परेड में उन्होंने वायु सेना की झांकी का प्रतिनिधित्व किया और ऐसा करने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बनीं.
जैसा कि उनके साथी कहते हैं, उन्हें महज फाइटर पायलट बनने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जा रहा था, उन्हें कॉम्बैट लीडर बनने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा था.