किसानों की बड़ी मित्र | निधि पंत, 33 वर्ष |सह-संस्थापक, एस4एस टेक्नोलॉजी॓ज़ छत्रपति संभाजीनगर
क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : उन्होंने और उनके सह-संस्थापकों ने छोटे किसानों की उपज को सुरक्षित रखने और उनके उत्पादों के वास्ते बाजार खोजने में मदद के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया

निधि पंत (फोटो- रेहान खान)
एस4एस टेक्नोलॉजीज की निधि पंत का एक जीवन-मंत्र है. वे कहती हैं, “हम दूसरों को ऊपर उठाकर ही ऊपर उठते हैं...यह बात मुझे और मेरी बहन को हमारे माता-पिता ने बचपन में सिखाई थी.” उनके पिता मुंबई के भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) में वैज्ञानिक थे. उन्होंने आइसोटोप ऐप्लिकेशन पर अपने शोध का इस्तेमाल अपने गृह राज्य उत्तरांचल में संभावित जल संसाधनों की पहचान में मदद के लिए किया.
पंत कहती हैं, “यह उस समाज को कुछ लौटाने का उनका तरीका था, जिसने उन्हें गढ़ा.”
2011 में मुंबई के इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी से ग्रेजुएट निधि ने अपने चार बैचमेट्स और दो अन्य लोगों के साथ मिलकर एस4एस टेक्नोलॉजीज़ बनाई. इसका संक्षिप्त नाम उनके विजन को दिखाता था—साइंस फॉर सोसाइटी.
शुरुआत में उन्होंने हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया लेकिन बाद में कृषि पर फोकस किया. विचार यह था कि किसानों के साथ काम करके उनकी उपज के लिए स्टोरेज सुविधाओं की कमी से होने वाले नुक्सान को कम किया जाए.
पंत कहती हैं, “कई बार परिवहन की लागत और सही स्टोरेज न होने से होने वाला नुक्सान मिलकर उपज की कीमत से भी ज्यादा हो जाता है. कभी-कभी किसान अपनी न बिक सकी उपज वापस ले जाने का खर्च भी नहीं उठा पाते.”
अध्ययनों के मुताबिक, भारतीय किसान हर साल इस तरह करीब 3.8 लाख करोड़ रुपए की उपज गंवा देते हैं. कोल्ड स्टोरेज के लिए लगातार बिजली आपूर्ति जरूरी है, जो किसानों के लिए व्यवहार्य नहीं. डिहाइड्रेशन यानी नमी हटाना और एयरटाइट तरीके से सुरक्षित रखना, कृषि उत्पादों को बचाने का एक तरीका था.
इसलिए 2014 में एस4एस टीम ने डिहाइड्रेटर बनाए और 15 देशों में ऐसे 5,000 उपकरण बेचे. लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि छोटी जोत वाले किसानों को यह नहीं पता होगा कि ऐसे डिहाइड्रेटेड उत्पाद कहां बेचें.
पंत ने बताया, “फिर हमने तय किया कि किसानों को खुद प्रोसेसर बनने के लिए सक्षम किया जाए.”
एस4एस टेक्नोलॉजीज़ अब सोडेक्सो, मैरिको और टाटा ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियों के लिए फूड इंग्रेडिएंट्स कंपनी है. यह महाराष्ट्र के नासिक और संभाजीनगर में करीब 5,00,000 किसानों से उत्पाद इकट्ठा करती है.
वे किसानों को तीन लाख रुपए में तकनीकों का एक कॉम्बिनेशन भी देती हैं—कटिंग मशीन, फिक्स्ड बेड ड्रायर, लो एनर्जी कंजम्पशन ड्रायर और सोलर ड्रायर. किसान कितना प्रोसेस कर पाते हैं, उसके आधार पर 40,000 रुपए से 1,00,000 रुपए तक कमा सकते हैं.
कंपनी में करीब 250 लोग काम करते हैं. वित्त वर्ष 2026 में इसका राजस्व 420 करोड़ रुपए रहा और अब यह मध्य प्रदेश, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में विस्तार कर रही है.