समझाइश, फैसला और फाइल बंद | डॉली कुमारी, 36 वर्ष | सरपंच, शादीपुर, गया, बिहार
क्या है जो बनाता है उन्हें सिरमौर : उन्होंने अपने गांव की ग्राम कचहरी को असरदार जमीनी न्याय व्यवस्था में बदल दिया. इस तरह से उन्होंने पारिवारिक झगड़ों, जमीन के दावों, विधवाओं के उत्तराधिकार के अधिकारों से जुड़े करीब 700 विवाद सुलझाने में मदद की

डॉली कुमारी (फोटो- रंजन राही)
उनके साधारण-से मिलेजुले घर-दफ्तर में स्टील के रैक्स पर तमाम मामलों की 700 से ज्यादा भूरे रंग की फाइलें रखी हैं, जिनमें से हरेक पर टाइप किए हुए समान अक्षरों में लिखा है:
केस क्लोज्ड (मामला बंद). बरसों की मुकदमेबाजी के बजाए बातचीत, मान-मनौव्वल और समझौते के जरिए टकरावों को सुलझाना गांव की 36 वर्षीया सरपंच डॉली कुमारी के राजकाज की शैली की खामोश पहचान बन गया है.
राजनीति कभी उनके मंसूबों का हिस्सा नहीं रही. मेरठ में पलीं-बढ़ीं डॉली ने पुणे से एमबीए की पढ़ाई की और बाद में एक विमानन कंपनी के टिकट विभाग में काम किया.
शादी ने उनका पता और भविष्य दोनों बदल दिए. 2014 में उन्होंने डॉक्युमेंट्री फिल्मकार और आंत्रप्रेन्योर धर्मवीर भारती से शादी की और गया आ गईं. सास की मौत के बाद परिवार ने उन्हें 2018 का उपचुनाव लड़ने के लिए राजी कर लिया. वे सात पुरुष उम्मीदवारों के मुकाबले महज 130 वोटों से किसी तरह जीत पाईं.
असल लड़ाई चुनाव के बाद शुरू हुई. यह मानकर कि वे तो महज नाम की सरपंच हैं, कई गांववाले उनके बजाए उनके पति के पास जाते.
हफ्तों धैर्य के साथ शिकायतें सुनकर, स्थलों का निरीक्षण करके और निष्पक्ष फैसले सुनाकर उन्होंने धीरे-धीरे साबित कर दिया कि कमान मजबूती से उन्हीं के हाथ में है, न कि उनके आसपास मौजूद पुरुषों के हाथ में.
आज शादीपुर के 20,000 निवासी ऐसे-ऐसे विवाद लेकर उनके पास आते हैं जिनमें ग्रामीण जनजीवन की दास्तान छिपी होती हैः पैतृक संपत्ति के झगड़े, जमीन के दावे, घरेलू टकराव और पारिवारिक संपत्ति में अपनी कानूनी हिस्सेदारी मांगती विधवाएं.
साड़ी पहने डॉली को अक्सर पूरे गया में अपनी स्कूटी पर घूमते देखा जा सकता है. आम तौर पर दूसरी चुनी हुई जनप्रतिनिधि स्कूटी पर उनके पीछे बैठी होती हैं.
वे अनिच्छुक रिश्तेदारों को साथ बैठकर बातचीत करने और मामला सुलझाने के लिए मना रही होती हैं.
उनकी पहलकदमी से वे विवाद अक्सर छह महीने के भीतर सुलझ जाते हैं जो अन्यथा सिविल अदालतों में बरसों लटकते रह सकते थे. 2021 में दोबारा चुनी गईं डॉली अब तक 700 से ज्यादा विवाद निबटाने में मदद कर चुकी हैं.
अपने दो छोटे बच्चों—आठ साल की बेटी और एक साल का बेटा—की परवरिश करने के साथ-साथ गांव की व्यवस्था संभालने के बीच संतुलन साधती हैं, सो अलग