मेघालय मकसद वाली रेबल | दैयाफी लामारे उर्फ रेबल, 24 वर्ष | हिप-हॉप आर्टिस्ट
क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : धुरंधर जैसे बड़े फिल्मी साउंडट्रैक पर ताजा काम के साथ रेबल मेघालय के स्वतंत्र हिप-हॉप सीन से निकल राष्ट्रीय लोकप्रिय संस्कृति तक पहुंचीं

दैयाफी लामारे (फोटो- बंदीप सिंह)
अपर्मिता दास
आर्टिस्ट दैयाफी लामारे का एक रूप वह था, जब वे बचपन में पश्चिमी जयंतिया हिल्स के नांगबाह में अकेले लंच करती थीं और मुंह से बमुश्किल बोल फूटते थे. और एक रूप आज का है, जब वही दैयाफी ‘रेबल’ बनकर देश भर के मंचों पर छा जाती हैं.
वे पूर्वोत्तर भारत की हिप-हॉप दुनिया की सबसे अलग आवाजों में से एक हैं. 24 साल की यह रैपर-सिंगर, जिनका असली नाम दैयाफी है और जिसका मतलब है ‘मैं तुम्हारा ख्याल रखूंगी’, नांगबाह में पली-बढ़ी और उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया.
दैयाफी मानती हैं कि उनके दोनों नाम एक-दूसरे से टकराते नहीं. वे कहती हैं, “रेबल, दैया का ही एक हिस्सा है. वह बगावत, गुस्सा और समाज के हिसाब से तथाकथित नेगेटिव भावनाओं को व्यक्त करता है.”
वे कहती हैं कि संगीत ने ही उन्हें बदला, “जब मैंने संगीत को खोजा, तो मैंने आत्मविश्वास को खोजा.” उनके अंतर्मुखी और बहिर्मुखी स्वभाव का यह खूबसूरत तालमेल, जहां वे लोगों से भरा कमरा भी संभाल सकती हैं और शोर थमते ही अपने विचारों की जगमगाती दुनिया में खो सकती हैं.
उनके लिखने के तरीके को तय करता है. यही वजह है कि उनके लिखे गीत बेहद गहरे और सुंदर कल्पनाओं से भरे होते हैं, जिन्हें ध्यान से सुनने पर बहुत आनंद मिलता है, भले ही वे सब कुछ साफ-साफ न कहें. वे कहती हैं, “मैं ऐसे लिखती हूं जैसे कविता लिख रही हूं. आप समझें या न समझें.”
अपनी शर्तों पर कला रचने की यह जिद उनके करिअर को दिशा देती रही है. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि संगीत एक पैशन प्रोजेक्ट से आगे जाएगा. कई सालों की इंडिपेंडेंट रिलीज ने उनकी ऐसी पहचान बनाई कि वे धुरंधर के जरिए बॉलीवुड तक पहुंचीं और रोलिंग लाउड इंडिया समेत कई बड़े फेस्टिवल्स में परफॉर्म किया.
वे अपनी उपलब्धियों को रैंक करने से इनकार करती हैं और उन्हें उन बड़े कामों की दिशा में “छोटे-छोटे कदम” बताती हैं जिन्हें वे आने वाले दशकों में करना चाहती हैं. उनका नया सिंगल ‘प्रेइंग मैंटस’ ‘प्रे’ (शिकार) और ‘प्रे’ (प्रार्थना) के शब्द-खेल पर टिका है.
यह उन लोगों पर चोट करता है जो “नैतिक या धार्मिक श्रेष्ठता का इस्तेमाल ताकत हासिल करने के लिए करते हैं.” आगे एक छोटा म्यूजिक एल्बम और पूर्वोत्तर के साथी कलाकारों के साथ एक शृंखला आने वाली है.
वे कहती हैं, “मैं बस अच्छा संगीत बनाना चाहती हूं. मैं अपनी कला को इस तरह बदलना नहीं चाहती कि नतीजा मेरे ही पक्ष में हो.” हिप-हॉप में महिलाओं की कमी पर वे साफगोई से बात करती हैं.
वे ऐसा मजबूत ईकोसिस्टम बनाने की जरूरत बताती हैं जो ज्यादा महिलाओं को इस शैली में आने के लिए प्रेरित करे. इन सबके बावजूद वे अपनी यात्रा को सिर्फ जेंडर के चश्मे से परिभाषित करने से बचती हैं.