करुणा से भरी कुशल कमांडर | मेरिन जोसेफ, 36 वर्ष | पुलिस अधीक्षक, कोझिकोड ग्रामीण केरल
क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : श्रमिक असंतोष को शांतिपूर्वक सुलझाने से लेकर सबसे चुनौतीपूर्ण आपराधिक मामलों में न्याय दिलाने तक—मेरिन जोसफ ने 14 वर्षों की अपनी सेवा के दौरान सख्त पुलिसिंग को करुणा और सहानुभूति के साथ जोड़ा

IPS मेरिन जोसेफ (फोटो- चंद्रदीप कुमार)
मेरिन जोसफ के लिए उत्कृष्टता हमेशा से एक प्राथमिकता रही है. नई दिल्ली में पलीं-बढ़ीं और केरल से ताल्लुक रखने वाली मेरिन सेंट स्टीफेंस कॉलेज की मेधावी छात्रा थीं. वहां उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ब्लावतनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट से पब्लिक पॉलिसी में मास्टर्स करने के लिए चीवनिंग स्कॉलरशिप मिलने से पहले कई अकादमिक पुरस्कार जीते.
भारत सरकार के मुख्य सलाहकार रह चुके उनके पिता डॉ. जोसफ एब्राहम ने ही उन्हें सिविल सेवा परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने महज 22 वर्ष की उम्र में पहले प्रयास में ही यह सफलता हासिल कर ली.
2012 में भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) के केरल कैडर में शामिल होने के बाद मेरिन पहली बार मुन्नार में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में चर्चा में आईं, जब उन्हें हजारों महिला बागान श्रमिकों के आंदोलन पोंबिलाई ओरुमई को नियंत्रित करने के लिए पुलिस कार्रवाई के नेतृत्व का मौका मिला. उन्होंने टाटा के स्वामित्व वाले उद्यम प्रबंधन के साथ वार्ता के जरिए शांतिपूर्ण समाधान निकालने में अहम भूमिका निभाई.
पिछले 14 वर्षों में मेरिन ने संकट के समय नेतृत्व और न्याय को लेकर प्रतिबद्धता के साथ अपनी अलग पहचान गढ़ी है. केरल की 2018 की विनाशकारी बाढ़ के दौरान बचाव अभियानों के समन्वय में निभाई अपनी भूमिका के लिए उन्हें मुख्यमंत्री पदक मिला और फिर लापता महिलाओं और बच्चों की तलाश के अभियान ने उन्हें राज्य पुलिस प्रमुख का बैज ऑफ ऑनर दिलाया.
सबसे बड़ी उपलब्धि कोल्लम में सिटी पुलिस कमिशनर के तौर पर सामने आई, जब उन्होंने एक 13 वर्षीया के दुष्कर्म से जुड़े लंबित मामले को दोबारा खोला. सीबीआइ, इंटरपोल और सऊदी अधिकारियों के साथ समन्वय किया, और 2019 में फरार आरोपी को भारत प्रत्यर्पित कराने के लिए रियाद में पुलिस टीम का नेतृत्व भी किया. बाद में आरोपी को दोषी ठहराया गया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.
वे कहती हैं, “कोई ऐसा एक निर्णायक क्षण नहीं था जिसने मेरी जिंदगी बदल दी हो. लोगों के साथ हर बातचीत, हर कठिन फैसले और वर्दी की हर चुनौती ने इस बात को पुख्ता किया कि मैंने पब्लिक सर्विस को क्यों चुना.”
वे पूर्व आइपीएस अधिकारी किरण बेदी को अपना आदर्श मानती हैं. उनके साहस, ईमानदारी और हर चुनौती से लड़ने की इच्छाशक्ति की वे सराहना करती हैं.
युवतियों के लिए मेरिन का संदेश भी उतना ही स्पष्ट है, “अपनी आवाज की ताकत को कभी कम मत समझो. आपको सफलता के लिए किसी दूसरे की परिभाषा में फिट होने की जरूरत नहीं. बस, सपने देखो!”