मोर्चे पर कप्तान | सलीमा टेटे, 24 वर्ष | कप्तान, भारतीय महिला हॉकी टीम सिमडेगा, झारखंड

क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : ठेठ झारखंड के एक गांव से आकर भारतीय टीम की कप्तान बनने तक का उनका सफर बताता है कि प्रतिभा बड़े शहरों या संसाधनों की मोहताज नहीं होती

सलीमा टेटे (फोटो- पीटीआइ)

सिमडेगा में पलीं-बढ़ीं सलीमा जब स्थानीय टूर्नामेंटों में अपनी हॉकी का जादू दिखातीं तो पूरा बड़की छापर गांव जश्न मनाता था. अक्सर मैचों में जीत हासिल करने पर उन्हें बकरियां और मुर्गियां इनाम में मिला करती थीं. लेकिन अब पदकों और सम्मान-सराहनाओं का दौर है. उनकी ताजा उपलब्धियों में 2024 में अर्जुन अवाॅर्ड और 2025 में एशिया कप में जीता गया रजत पदक शामिल है.

सलीमा ने पिता सुलक्षण से प्रेरित होकर हॉकी थामी थी जो खुद एक स्थानीय खिलाड़ी और किसान हैं. वे बताती हैं, “मैं उनके साथ टूर्नामेंटों में जाती थी और उन्हें देखकर ही मैंने खेलना सीखा.” पिता आज भी सलीमा के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं.  सलीमा का मानना है कि उनकी सफलता में परिवार और गांववालों के सहयोग का भी बड़ा हाथ रहा है.

वे कहती हैं, “हमारे यहां लड़कियों को खेलने से कभी नहीं रोका गया. भारत के लिए खेलना हमेशा से मेरा सपना था.” उन्हें सिमडेगा ट्रेनिंग सेंटर में जब प्रतिमा बरवा (अब दिवंगत) का मार्गदर्शन मिला तो उनके सपने को मानो पंख लग गए. साल 2017 में उन्होंने राष्ट्रीय सीनियर टीम के लिए अपना पहला मैच खेला.

सलीमा ने दिखाया कि कोई खेल कैसे महिलाओं को सशक्त बना सकता है. तेज रफ्तार और आक्रामक खेल शैली के कारण ‘फेरारी’ नाम से मशहूर यह मिडफील्डर खासकर आदिवासी लड़कियों के लिए आइकॉन बन चुकी है.

वर्ष 2024 में जब उन्हें टीम की कप्तानी सौंपी गई वे महज 22 वर्ष की थीं. उन्होंने नई जिम्मेदारी जल्द और बखूबी संभाल ली. अपनी कामयाबी का श्रेय टीम की साथी खिलाड़ियों के अलावा पूर्व कप्तानों—रानी रामपाल और सविता—को देती हैं, जिनसे उन्होंने सीखा कि जूनियर खिलाड़ियों का हौसला कैसे बढ़ाया जाता है.

कम उम्र में अनुभवी खिलाड़ी बन चुकी सलीमा खेल के कई उतार-चढ़ाव देख चुकी हैं—तोक्यो 2020 ओलंपिक में पदक से बाल-बाल चूकना और 2024 पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाइ न कर पाना. हालांकि, तोक्यो ओलंपिक सलीमा की जिंदगी का सबसे निर्णायक मोड़ साबित हुआ.

वे कहती हैं, “उसके बाद मेरी जिंदगी और घर के हालात बहुत बेहतर हो गए.” अगला लक्ष्य एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाइ करना है. वहां पदक मिलना बड़ी उपलब्धि होगा.

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