‘जिन’ की राह से निकली नई कहानी | वनिता जैन, 44 वर्ष | फाउंडर | रेवेलरी डिस्टिलरी और वनाहा जिन, मुंबई
क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : उन दिनों यानी 2010 में एक छोटे बच्चे की मां वनिता ने उद्यम शुरू करने के लिए कॉर्पोरेट जीवन छोड़ दिया. उसके बाद की गई उनकी पहल ने उन्हें एक अल्कोहलिक बीवरेज डिस्टिलरी बनाने और उसके मालिकाने वाली भारत की पहली महिला बना दिया

वनिता जैन (फोटो- मंदार देवधर)
वनिता जैन सिर्फ छह साल की थीं तभी उन्होंने पिता को खो दिया. अपनी मां, बड़े भाई और छोटी बहन के साथ उन्हें तमिलनाडु में अपना गृहनगर अंबासमुद्रम छोड़ना पड़ा और बेंगलूरू जाना पड़ा.
एक छोटे शहर से दूसरे राज्य के बड़े शहर में आने के बाद नए स्कूल में उनके शुरुआती दिन मुश्किलों वाले थे. लेकिन वनिता ने जल्द ही स्कूल में स्पोर्ट्स, डांस और पढ़ाई में अपनी पहचान बना ली. वे बताती हैं, “मैं और मेरे भाई-बहन एक ऐसे सफर पर थे जहां हमें खुद ही अपना भविष्य बनाना था.”
वनिता ने पहले श्री भगवान महावीर जैन कॉलेज और बाद में ज्योति निवास कॉलेज में दाखिला लिया, जहां उन्होंने मैनेजमेंट डिग्री की पढ़ाई की. लेकिन कॉलेज में दाखिले से भी पहले उन्होंने महज 13 साल की उम्र में ही ट्यूशन पढ़ाना और समर कैंप में कपड़े बेचना शुरू कर दिया था.
19 साल की उम्र में वे जीवन बीमा योजनाएं बेचने लगी थीं. वनिता कहती हैं, “एक रुढ़िवादी उत्तर भारतीय मारवाड़ी परिवार की लड़की के लिए, जिसने अपने पिता को खो दिया हो, ऐसा करना ‘ठीक’ नहीं माना जाता था, लेकिन मैं जायज वजहों से ही रुढ़ियां तोड़ रही थी.”
इससे उन्हें इतनी पॉकेट मनी मिल जाती थी कि वे प्रीमियम चाय और कॉफी का मजा ले सकें. इससे उन्हें समझने में मदद मिली कि पेय पदार्थ कैसे तैयार किए जाते हैं और किन खूबियों के लिए उन्हें सराहा जाता है.
बाद में अपने करिअर में उन्होंने ओऐंडएम, फ्लिपकार्ट और एडेको जैसी कंपनियों में काम किया जहां उन्हें कुछ बेहतरीन ब्रांड और मार्केटिंग माहौल का अनुभव मिला. लेकिन 2010 में जब उनका कॉर्पोरेट करिअर ऊंचाइयों पर था और बेटा डेढ़ साल का था तभी वनिता ने अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया.
पेरिस के ईएसएसईसी बिजनेस स्कूल में लग्जरी ब्रांड मैनेजमेंट का एडवांस्ड कोर्स करने के दौरान उन्हें एक अजीब-सी दिलचस्पी महसूस हुई. वे कहती हैं, “मेरे कानों में वाइन शब्द सीधे-सीधे गूंजने लगा.” और यही जिज्ञासा उन्हें वाइन और स्पिरिट्स की दुनिया तक ले गई. उन्होंने लंदन और पेरिस में ट्रेनिंग ली. सीखने का यह सफर 2022 तक चलता रहा. इस दौरान 2015 में अपनी कंसल्टेंसी द परफेक्ट पोर शुरू की.
इस कंसल्टेंसी की वजह से उन्हें ताज ग्रुप, फोर सीजन्स और दूसरे बड़े हॉस्पिटैलिटी ब्रांडों के साथ काम करने का मौका मिला. वनिता कहती हैं, “मुझे समझ आया कि भारत तेज अल्कोहल वाला बहुत बड़ा बाजार है.” और 2023 में उन्होंने गोवा के घने जंगलों वाले सत्तरी इलाके में अपनी डिस्टिलरी शुरू की, जिससे वे शराब बनाने वाली डिस्टिलरी की मालकिन और उसे तैयार करने वाली देश की पहली महिला बन गईं.
2025 में उन्होंने जिन के रूप में अपना पहला प्रोडक्ट वनाहा लॉन्च किया. “फॉरेस्ट-टू-बॉटल” की अवधारणा पर काम करते हुए उन्होंने पांच-स्टेप वाला डिस्टिलेशन प्रोसेस बनाया. इसमें फूलों और औषधीय पौधों के रूप में करीब 200 वनस्पतियों का आसवन था.
मुंबई मुख्यालय वाली रेवेलरी डिस्टिलरी में वर्तमान में 24 कर्मचारी हैं और उसकी उत्पादन क्षमता सालाना लगभग दस लाख बोतल की है. अपने पति नवीन जैन, जो एक पूर्व बैंकिंग और बीमा पेशेवर हैं, के साथ मिलकर उन्होंने “हाउस ऑफ प्रीमियम स्पिरिट्स” बनाने के लिए अपने सिस्टम और प्रक्रियाओं को कॉर्पोरेट फ्लेवर दिया है.
उनकी यात्रा साबित करती है कि “भारत शानदार स्पिरिट, एक ऐसी मजेदार जिन बना सकता है जो विश्व स्तरीय है और यह भी कि भारत में भी सर्वश्रेष्ठ बनाया जा सकता है”.
काम के कारण उनके पास अब लंबी दौड़ के लिए वह समय नहीं बचा, जब वे आयरनमैन के लिए प्रशिक्षण लेती थीं और मैराथन दौड़ती थीं. वे कहती हैं, “फिलहाल, आंत्रप्रेन्योरशिप ही मेरे लिए अब तक की सबसे लंबी रेस का खेल है.”