भारतीय सौंदर्य की बिखेरी चमक | विनीता सिंह, 43 वर्ष | को-फाउंडर और सीईओ, शुगर कॉस्मेटिक्स, मुंबई
क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : ग्लोबल कंपनियों के दबदबे वाले बाजार में विनीता ने भारतीय ग्राहकों के लिए सौंदर्य उत्पाद बनाने और बेचने का तरीका बदल दिया

विनीता सिंह
राजधानी दिल्ली में पलीं-बढ़ीं, आइआइटी मद्रास और आइआइएम अहमदाबाद से पढ़ीं विनीता सिंह ने 2007 में एक करोड़ रुपए के कैंपस प्लेसमेंट को ठुकरा दिया. उस समय वे 23 साल की थीं और उनका इरादा खुद की कंपनी बनाने का था.
उन्होंने पहले दो उद्यम —एक रिक्रूटर्स के लिए बैकग्राउंड वेरिफिकेशन सर्विस और दूसरा मंथली ब्यूटी सब्सक्रिप्शन बॉक्स—शुरू किए थे लेकिन वे चल नहीं पाए. पर शायद नाकामी ने ही उन्हें सिखाया कि तीसरी बार कैसे कामयाब हों.
2015 में उन्होंने पति कौशिक मुखर्जी के साथ शुगर शुरू किया, जिसने भारतीयों के त्वचा सौंदर्य उत्पादों की भीड़ के बीच अलग पहचान बनाई. ये ऐसे ब्यूटी प्रोडक्ट थे जो भारत की गर्मी और उमस में भी खराब नहीं होते थे.
यह सफर खासा उतार-चढ़ाव भरा रहा है. उनके बड़े बेटे और शुगर के जन्म में बस दो ही महीने का फासला था. विनीता याद करती हैं कि दोनों भूमिकाओं के बीच तालमेल बिठाना कितना मुश्किल था, जबकि कौशिक उनके लिए मजबूत सहारा थे.
100 से ज्यादा निवेशकों से रिजेक्ट होने वाली विनीता कहती हैं कि महिला ग्राहकों के लिए काम करने और महिलाओं की अगुआई वाले स्टार्टअप के लिए यह खास तौर पर मुश्किल था लेकिन 2022 में हालात बदले, जब ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी फर्म एल कैटरटन और अभिनेता रणवीर सिंह ने कंपनी में निवेश किया. वे कहती हैं, “हमने साबित किया कि एक घरेलू ब्रांड नकल करने के बजाए नेतृत्व भी कर सकता है.
हमने अपने संदेशों में बेबाकी से कहा है कि हम भारतीय स्किन और भारतीय सोच के हिसाब से प्रोडक्ट बनाते हैं. मेरा काम इसे आगे बढ़ाना है कि ब्यूटी के क्षेत्र में ‘मेड इन इंडिया’ क्या है—कोई सस्ता विकल्प नहीं, बल्कि वह उत्पाद जिसे लोग चाहें.” शुरुआत में सोशल मीडिया पर दांव लगाने से भी इसमें मदद मिली.
विनीता कहती हैं, “उस एक फैसले ने एक नवेले ब्रांड को मोटा खर्च किए बिना देश भर में पहुंचने में मदद की.” रियलिटी शो शार्क टैंक इंडिया की एक शार्क विनीता के लिए बड़ी बात थी जब शुगर के उत्पादों की पहुंच आम दुकानों तक भी हो गई.
वे कहती हैं, “हमारा मानना था कि भारतीय महिलाएं अपने फोन के साथ-साथ आस-पास की दुकानों, दोनों जगह से मेकअप के उत्पाद खरीदना चाहती हैं. इसलिए कोविड के दौरान हमने दुकानों तक जाने का फैसला किया. इसी ने हमारे लिए सब कुछ बदल दिया.”
आज, होठों, आंखों और स्किनकेयर के साथ दूसरी कैटेगरी में शुगर के 550 प्रोडक्ट हैं. ये ऑनलाइन तथा 45,000 रिटेल आउटलेटों के जरिए बिकते हैं. 50 फीसद से ज्यादा बिजनेस अब ऑफलाइन बिक्री से आता है.
आगे बढ़ते रहने की ताकत या मुश्किल हालात में भी डटे रहने की मजबूती उन्हें दौड़ने के अपने जुनून से मिलती है. एक ट्रायथलीट और अल्ट्रा-मैराथनर होने के नाते इन अनुभवों ने उन्हें सिखाया है कि कैसे राह पर नजरें गड़ाए रखें.
यही कारण है कि वे शुगर में काम करने वाली 2,000 महत्वाकांक्षा और अपने दम पर आगे बढ़ने वाली महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं. ये महिलाएं कंपनी की कुल वर्कफोर्स का 70 फीसद हिस्सा हैं. उनकी यह मैराथन जारी है और विनीता एक ऐसी “मजबूत, मुनाफे वाली और स्वाभिमानी भारतीय कंपनी” बनाना चाहती हैं जो हजारों महिलाओं को रोजगार दे.